अभिव्यक्ति आंदोलन छत्तीसगढ़ बिलासपुर मानव अधिकार

विश्व मानवाधिकार दिवस: GSS व अन्य संगठनों ने नारों और जनगीतों से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया

बिलासपुर। विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर 10 दिसंबर को बिलासपुर के नेहरू चौक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग एकत्रित हुए और सरकारों द्वारा लगातार की जा रही मानवाधिकार हनन की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए अपना विरोध दर्ज किया।

कई संगठन शामिल हुए

इस विरोध प्रदर्शन में लोक सिरजनहार यूनियन(LSU, गुरुघासीदास सेवादार संघ(GSS), बिरसा फूले स्टुडेंट युनियन, भीम आर्मी, जाति उन्मूलन आंदोलन, अंबेडकर युवा मंच, ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम(AIPF), ऑल इंडिया लॉयर्स युनियन, सिरजनहार महिला यूनियन (SMU), भारतीय विकास ठेका मजदूर यूनियन NTPC सिपत, सतनाम पुनर्जागरण मिशन(SPM), लोक समता शिक्षण समिति(LS3) आदि कई संगठनों के लोगों ने अपनी बात रखी।

पदयात्रा करते पहुँचे GSS के सदस्य

सामाजिक जनजागरण की दिशा में क्रांतिकारी कार्य कर रहे संगठन GSS के सदस्य मुंगेली नाका क्षेत्र से नारे लगाते, पर्चे बांटते, पदयात्रा करते हुए नेहरू चौक पहुँचे और जनवादी गीतों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।

सत्ता को निरंकुश बना रहे कानूनों का विरोध

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि UAPA जैसे कानूनों का इस्तेमाल जनआंदोलनों को कुचलने के लिए किया जा रहा है। ऐसे दमनकारी कानूनों में ज़मानत पर पाबन्दी के कारण बेगुनाह लोगों को सालों साल जेल में बन्द रहना पड़ता है। देश के संघर्षशील प्रबुद्ध व्यक्तियों को भीमकोरेगाँव मामले में फ़र्ज़ी ढंग से फंसाया गया है। NRC-CAA के खिलाफ़ संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढंग से विरोध कर रही जनता को ऐसे ही दमनकारी कानूनों इस्तेमाल कर फंसाया गया। राष्ट्रीय एजेंसि NIA का इस्तेमाल लोकतंत्र को कुचलने के लिए किया जा रहा है। ऐसे कानून भारतीय संविधान के मान्य संघीय ढांचे के विरुद्ध केंद्र सरकार को निरंकुश शक्ति देता है इसलिए इन कानूनों को निरस्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों को बहाल किया जाना चाहिए।

नक्सली मुठभेड़ के नाम पर मानवाधिकार हनन

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को नक्सली मुठभेड़ के नाम पर वर्षों से मारा जा रहा है, ऐसी कई फ़र्ज़ी घटनाएं प्रमाणित भी हो चुकी हैं लेकिन पीड़ितों को न्याय नहीं मिला और दोषियों को सज़ा भी आजतक कभी नहीं मिली।

न्यायिक जाँच के बाद भी दोषियों पर कारवाई नहीं

मीना खलखो फ़र्ज़ी मुठभेड़, सारकेगुड़ा और एडसमेटा गोलीकाण्ड को न्यायिक जाँच आयोगों ने भी फ़र्ज़ी करार दिया है इसके बावजूद भी दोषियों पर अबतक कोई कारवाई नहीं की गई है।

घोषणापत्र भूल गई छत्तीसगढ़ कांग्रेस

2018 चुनाव में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि फ़र्ज़ी मुकदमों में जेलों में बन्द आदिवासियों को रिहा किया जाएगा लेकिन सरकार में आने के बाद सारे वादे धरे रह गए। अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर बिलासपुर की सड़कों पर उतरे लोगों ने न्याय, मानव अधिकार और लोकतंत्र को बचाने की बातें कीं।

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