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स्वस्थ्य सुविधा ठीक करने की बजाए कोरोना काल में बाँध क्यों बना रही है मध्यप्रदेश सरकार

भोपाल।  मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मद घाटी की दस परियोजनाओ (चिंकी – बोरास बराज बहुउद्देशीय, शक्कर पेंच लिंक, दुधी बांध, अपर नर्मदा बांध, हांडिया बराज, राघवपुर बहुउद्देशीय, बसानिया बहुउद्देशीय, होशंगाबाद बराज, कुक्षी माइक्रो सिंचाई और सांवेर उदवहन सिंचाई) के लिए पावर फाइनेंस कार्पोरेशन, दिल्ली से 26 मई 2020 को 22 हजार करोङ रूपये कर्ज लेने का अनुबंध किया था। इसमें से 10 हजार 369 करोङ रूपये की चिंकी-बोरास(5083 करोङ), सांवेर उदवहन सिंचाई(3046 करोङ) और अपर नर्मदा बांध(2240 करोङ) परियोजना को 8 जुन 2021 को मध्यप्रदेश मंत्रीमंडल ने मंजूरी दे दी है।

NAPM के सदस्यों ने विज्ञप्ति जारी कर मध्यप्रदेश सरकार के इस कदम पर आश्चर्य और नाराज़गी ज़ाहिर की है. उनका कहना है कि इस समय जब प्रदेश में बदतर स्वास्थ्य सेवा, आक्सीजन, वेंटिलेटर, बेड, दवाई आदि नहीं मिलने से हजारों लोगों की मौत हो गई, तब क्या मध्यप्रदेश सरकार को महामारी से लड़ने के लिए स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के कार्यों को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए?

स्वास्थ्य बजट 7.9% से घटकर 7.3% हो गया

NAPM के सदस्यों राजकुमार सिन्हा, उमेश तिवारी, आराधना भार्गव, अमूल्य निधि, राहुल यादव, देवराम कनेरा आदि का कहना है कि हमारे वित्त मंत्री के अनुसार वर्ष 2021–22 में प्रदेश का अनुमानित बजट 8046 करोड़ का है, जो कि पिछले अनुमानित बजट से 640 करोड़ अधिक है यानि मात्र 9% अधिक है परंतु वास्तविकता यह है कि आनुपातिक रूप से प्रदेश के कुल बजट मे स्वास्थ्य बजट का हिस्सा 7.9% से घटकर 7.3% हो गया है। प्रदेश मे स्वास्थ्य सेवाओं और सूचकांको की दॄष्टि से यह कटौती चिंताजनक है।

कोविड–19 महामारी से सीख लेकर व कोविड–19 महामारी की परिस्थितियों के अनुसार स्वास्थ्य मे बजट प्रावधान ज्यादा बढ़ाने की जरूरत थी। लगभग 640 करोड़ की कुल बढ़ोतरी में से भी 341 करोड़ रुपए यानि लगभग 53.28% भाग स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के लिए आवंटित किया गया है व पूंजीगत और राजस्व खर्च के लिए मात्र 299 करोड़ ही बढ़ाया गया है। यदि हम वर्ष 2019-20 के स्वास्थ्य बजट को देखें तो वह 9618 करोड़ था और वर्ष 2020–2021 मे इसे घटाकर 7406 करोड़ कर दिया था और इस वर्ष भी 9% बढ़कर 8046 करोड़ हुआ यानि पुराने स्तर से अभी भी बहुत कम है।

इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए वर्तमान बजट मे 3038 करोड़ किया गया है जो कि वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान 3035 करोड़ से बहुत थोड़ा ही बढ़ा है, जबकि वास्तविक रूप मे यह बजट आवंटन मे गिरावट है।

स्वस्थ्य के रिक्त पदों पर भर्ती नहीं

मध्यप्रदेश की प्रशासकीय रिपोर्ट 2020–2021 के अनुसार प्रदेश मे चिकित्सकों के 3615 पद स्वीकृत हैं जिसमे से मात्र 719 ही कार्यरत हैं यानि 2896 पद रिक्त हैं, चिकित्सा अधिकारी 5099 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 3509 कार्यरत हैं व 1509 पद रिक्त हैं इसी प्रकार प्रदेश मे कुल 190 दांत चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं परंतु 113 ही कार्यरत हैं और यहाँ पर भी 36 पद रिक्त हैं, इस प्रकार कुल 4482 पर चिकित्सकों के रिक्त हैं यानि की लगभग 50% पद रिक्त हैं।

इसी रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविदा पदों मे भी बड़े स्तर पर रिक्तियाँ हैं, प्रदेश सरकार की इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश मे राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों मे 33221 संविदा पद स्वीकृत हैं यहाँ पर भी मात्र 21209 पदो पर हैं नियुक्तियाँ की गई हैं और 14432 पद रिक्त हैं अर्थात यहाँ भी करीब 44% पद रिक्त हैं।

NAPM का कहना है कि इससे स्पष्ट होता हैं कि सरकार कि प्राथमिकता लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाएँ देने की मंशा नहीं हैं।

 

 

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