अभिव्यक्ति पुलिस बिलासपुर महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

मीडिया को मसाला मिल गया और पुलिस अधिकारयों की पर्सनल जिंदगी को वर्दी की साख से जोड़ दिया गया

बिलासपुर। 3 अक्टूबर 2021 दिन रविवार समय रात 11 बजे के बाद
स्थान बिलासपुर के रामा मैग्नेटो मॉल की दूसरी मंज़िल में संचालित पब कम डिस्को कम बार “भूगोल”

एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के साथ भूगोल पब के बाउंसर ने बत्तमीज़ी की, महिला पुलिस अधिकारी के पति जो सहायक जेल अधीक्षक हैं ने मामले में हस्तक्षेप किया तो पब के बाउंसर ने उसके साथ भी मारपीट की। हंगामा बढ़ता देख पब में खाना खाने आई एक अन्य महिला पुलिस अधिकारी और उनके परिवार ने भी हस्तक्षेप किया।

सभी पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ बत्तमीज़ी और मारपीट की इस घटना की शिकायत रात मे ही सिविल लाईन पुलिस स्टेशन में की। एडिशनल SP उमेश कश्यप के कहने पर कोतवाली CSP स्नेहिल साहू सिविल लाईन थाने आईं।

आरोप के मुताबिक चूंकि पब के बाउंसर ने महिला पुलिस अधिकारी के साथ बत्तमीज़ी की थी इसलिए पब के संचालक अंकित दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। सुबह लगभग 4 बजे तक पुलिस अधिकारियों, पब संचालक और उनके कुछ साथियों के बीच बातचीत चलती रही। बाउंसर की खोजबीन की गई पर वो मिला नहीं। में आरोपी बाउंसर द्वारा अगले दिन माफ़ी मांगवा देने की शर्त पर मामला शांत हुआ और दोनों पक्ष पुलिस थाने से चले गए।

अगले दिन समाचार चैनलों ने ख़बर प्रकाशित की। मामले को प्रदेश के बड़े अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री ने भी संज्ञान में लिया। दो महिला पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया और सहायक जेल अधीक्षक पर भी जाँच बिठाने की बात सुनने में आ रही है।

प्रकाशित ख़बरों के मुताबिक CSP सृष्टि चंद्राकर CSP रष्मीत कौर चावला पर तबादले की कारवाई ये कहकर की गई है कि पब में हंगामे की इस घटना से वर्दी की साख ख़राब हुई है। चंद्राकर को कोंडगांव और कौर को गौरेला-पेंड्रा-मरवाहि भेजा गया है (हालांकि दोनों का ये तबादला एक महीने से भी पहले किया जा चुका है ये कोई नया आदेश नहीं है)।

शहर के कई पुलिस अधिकारी परिवार के साथ समय बिताने निकले हुए थे वे न तो वर्दी पहने हुए थे और न ही ड्यूटी पर थे लेकिन सभी के लिए विभाग से लेकर मीडिया तक में यही बात प्रचारित की जा रही है कि इन्होंने वर्दी की साख ख़राब की है।

cgbasket से बातचीत करते हुए एक महिला पुलिस अधिकारी ने निराशा भरे भाव से कहा कि “हम पूरी लगन के साथ अपनी ड्यूटी करते हैं। उस रात हम परिवार के साथ अपना पर्सनल समय बिताने, थोड़ा रिलेक्स करने निकले थे। रविवार का दिन था, जैसे सभी लोग परिवार के साथ समय बिताते हैं वैसे हम भी बिता रहे थे, वर्दी के लिए हमारे मन में बहुत सम्मान है”

लोग महिला पुलिस अधिकारियों के कपड़ों पर भी चुटकियां लेते नज़र आए। लोग ये तक कहने से नहीं चूके कि “उन्होंने ऐसे कपड़े पहने थे कि हम खुद होते तो छेड़ देते”

महिलाओं के चरित्र को कपड़ों से आंकने की ये वही कुंठित मानसिकता है जिसके सहारे ये पितृसत्तात्मक समाज अपनी गन्दी नीयत की सड़ांध को छुपाने की नाकाम कोशिश करता रहता है।

नियमविरुद्ध चल रहे पब “भूगोल”पर कारवाई क्यों नहीं ?

बिलासपुर के बहुत बदनाम पुलिस स्टेशन (सिविल लाईन) क्षेत्र में चल रहा “भूगोल” (पब कम डिस्को कम बार) उसी जगह पर संचालित है जहाँ कुछ साल पहले चर्चित गौरांग बोबड़े हत्याकांड हुआ था। इतनी बड़ी घटना के बाद बिलासपुर पुलिस को शहर के तमाम पब, बार आदि पर कड़ाई करनी चाहिए थी लेकिन अब भी शराब परोसने के निर्धारित समय (रात 11 बजे) के बाद भी सभी बारों में देर रात तक शराब परोसी जाती है।

CCTV फुटेज लेकर जाँच कराने पहुँच पब संचालक

सिविल लाईन पुलिस को “भूगोल” पब से कौन सा प्रेम है

“भूगोल” के लिए भी इसी तरह की बातें कही जाती हैं कि यहाँ भी नियमविरुद्ध निर्धारित समय के बाद भी अवैध रूप से नशा परोसा जाता है। अटल बिहारी विश्वविद्यालय के छात्रों ने भूगोल का ज़िक्र करते हुए एडिशन एसपी को ज्ञापन सौंपकर ऐसी जगहों पर कारवाई करने की मांग की है लेकिन सिविल लाईन पुलिस ने इस पब पर अबतक कोई कारवाई क्यों नहीं की है। “भूगोल” के खिलाफ़ आए दिन ऐसी बातें सुनने में आती रही हैं कि ये पब नियमों का उल्लंघन करता है।

सूत्र बताते हैं कि शराब के अलावा भी कई अवैध नशे यहाँ परोसे जाते हैं, नशे की हालत में होने वाले लड़ाई झगड़े के भी कई किस्से सुनने में आते रहते हैं…लेकिन इन तमाम शिकायतों के बावजूद सिविल लाईन थाने ने इस पब के खिलाफ़ कोई कारवाई नहीं की है…सिविल लाईन पुलिस को इस पब से आखिर ऐसा कौन सा प्रेम है जो वो इसपर इतनी महरबान है।

शहर में आए दिन सिविल लाईन थानाक्षेत्र मे संचालित पब और बारों में मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं। 14 फ़रवरी वैलेंन्टाईन्स डे की रात भी भूगोल में देर रात तकरीबन दो बजे तक पार्टी और हो हंगामे के साथ मारपीट की घटना हुई थी। ऐसी हर घटना की सूचना थाने तक आती तो है लेकिन न जाने क्यूँ पुलिस ने अब तक कोई कारवाई नहीं की है। क्या सिविल लाईन पुलिस फिर से किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है।

हालांकि पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारियों को इस बात का भी खयाल ज़रूर रखना चाहिए कि उनका समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा जुड़ाव होता है। अवैधानिक गतिविधियों को रोकने की ज़िम्मेदारी भी उन्ही के कंधों पर है ऐसे में यदि वे ही बार जैसी जगहों पर निर्धारित समय के बाद जाने की ज़िद करेंगे तो बाकियों को ऐसा करने से कैसे रोक पाएंगे।

इस पूरे मामले में cctv फुटेज की जाँच करके इस तथ्य को भी सामने लाना चाहिए कि उस रात असल में हंगामा किसकी तरफ़ से शुरू हुआ। बाउंसर ने बत्तमीज़ी की या पुलिस अधिकारियों के रौब जमाने के कारण बात बिगड़ी इसकी भी पड़ताल की जानी चाहिए।

वर्दी की साख तो अवैध धन्दों को पालने से भी कम होती होगी ?

पब कम डिस्को कम बार “भूगोल” में रविवार की रात हुई मारपीट की घटना में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों के लिए सभी जगह ये बात कही जा रही है कि इन्होंने वर्दी की साख ख़राब की है।

घटना में शामिल चारों पुलिस अधिकारी घटना के समय वर्दी नहीं पहने हुए थे, वो ड्यूटी पर नहीं थे, वे परिवार के साथ बाहर खाना खाने आए हुए थे, ये उनका फ़ैमिली टाईम था। क्या पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी के अलावा कोई पर्सनल लाईफ़ नहीं होती। परिवार के साथ पार्टी करते हुए यदि उनकी किसी के साथ कोई झड़प हो गई तो इससे वर्दी की साख कैसे ख़राब हुई।

अगर वर्दी की साख बचाने की ही बात है तो सबसे पहले तो उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिनकी महरबानी से कई अवैध कारोबार फलफूल रहे हैं।

अगर वर्दी की साख बचाने की ही बात है तो उन पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए जो इलाके के गुण्डा तत्वों को संरक्षण दिए हुए हैं।

उन पुलिस वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए जिनके उपर ड्यूटी के दौरान महिला पर गन्दी नीयत से दुर्व्यवहार करने का आरोप है।

यदि समाज को पुलिस से ये अपेक्षा है कि वो संवेदनशील हो, गंभीर मुद्दों पर मानवीय पहलू से विचार करे तो समाज को भी पुलिस अधिकारियों के लिए मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना होगा।

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