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सिंघू बॉर्डर पर छत्तीसगढ़ के किसान भी हैं आंदोलन में शामिल

तीनों कृषि कानून वापस लेने और एम एस पी गारंटी कानून बनाने की मांग को लेकर जारी है विरोध

दिल्ली। केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी बताते हुए किसानों का विरोध अध्यादेश लाए जाने के समय से ही जारी है जो कानून बनने के बाद और भी व्यापक होते गया है। इस कानून का विरोध किसानों ने छत्तीसगढ़ में भी लगातार जारी रखा है। बता दें कि छततीसगढ़ से किसानों का एक जत्था दिल्ली सीमा पर जारी किसान आंदोलन के समर्थन में 7 जनवरी को दिल्ली पहुचा था जिसने 26 जनवरी की ट्रेक्टर परेड में भी हिस्सा लिया था। इसके बाद पुनः 9 फरवरी को अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तथा छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही, ज्ञानी बलजिंदर सिंह, प्रेमदास के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के किसानों का जत्था सिंघू बॉर्डर पहुचा है। आंदोलन स्थल पर छत्तीसगढ़ के किसान भी टेंट लगाकर राह रहे हैं।

दिल्ली सीमा पर मौजूद छत्तीसगढ़ के किसानों का कहना है कि ये आंदोलन देशभर के किसानों का आंदोलन है। उक्त आशय की जानकारी देते हुए तेजराम विद्रोही ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उनके अधीन मीडिया घरानों द्वारा लगातार यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि कानून किसान हितैषी है और इसका विरोध केवल हरियाणा व पंजाब के कुछ किसान संगठन कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि इस कॉरपोरेट परस्त कानून के खिलाफ जरूर पंजाब और हरियाणा के किसानों ने आवाज उठाई थी लेकिन अब ये देशव्यापी आंदोलन का बन चुका है। यह केवल किसानों का ही नहीं बल्कि आम जनता का आंदोलन बन चुका है। छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी मांग की है कि मोदी सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़कर तीनों कृषि कानून वापस लेते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून पारित करे, 26जनवरी को निर्दोष किसानों पर दर्ज प्रकरण निः शर्त वापस ले।

किसानों ने पुलवामा के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
पुलवामा के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते किसान

केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानून को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन के 82वें दिन 14 फरवरी को कैंडल मार्च निकालकर पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

छत्तीसगढ़ के किसान जो लगातर आंदोलन में शामिल हैं उन्होंने सिंघु बार्डर में आयोजित कैंडल मार्च में भाग लेकर पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव और छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पुलवामा घटना पर घृणित राजनीति कर वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हुए दूसरी बार सत्ता हासिल की है। यह अर्णब गोस्वामी के उस कथित वाट्स एप्प चैट से उजागर हो चुका है जिसे लेकर भाजपा और उनके अनुवांशिक संगठन मौन साधे हुए हैं। हद तो तब हो गई है जब केन्द्र सरकार पुलवामा हमले के जिम्मेदारों को गिरफ्तार करने के बजाय आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी लगाकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है।

जो किसान सारी दुनिया का पेट पालता है उन किसानों से पूछा जा रहा है कि आंदोलन में राशन की आपूर्ति कहां से हो रही है जो बेहद ही निंदनीय है। कैंडल मार्च में प्रेमदास, वशिष्ठ, नवज्योति, साहेब सिंह, अजेब सिंह, बलजीत आदि सम्मिलत रहे।

 

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