क्राईम छत्तीसगढ़ पुलिस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट्स बिलासपुर

आरोपित ने पुलिस के सामने खाया ज़हर, पूरी रात परिजनों को नहीं दी गई जानकारी

बिलासपुर पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। खूब चर्चा में रहे सरकारी आवास घोटाला मामले के आरोपित मुंगेली निवासी विजय साहू को गिरफ़्तर करने के लिए शुक्रवार 6 मई की रात बिलासपुर के सिविल लाईन थाने की पुलिस उसके घर पहुँची थी। आरोपित के पिता ने बताया कि रात लगभग 12 बजे घर के पिछले और अगले दरवाज़े पर कुछ लोग टॉर्च जलाकर घर के अंदर देखने की कोशिश कर रहे थे। बाहर निकालकर देखा तो वहाँ सात पुलिसकर्मी मौजूद थे। पिता ने बताया कि सात पुलिसवाले रात बारह बजे उनके घर आए और बेटे विजय साहू को आवास घोटाला मामले में पकड़कर बिलासपुर ले गए। 

यहाँ तक तो सब ठीक था लेकिन अगले दिन सुबह पुलिस ने परिवार को फोन करके बताया कि विजय साहू ने ज़हर खा लिया है और बिलासपुर के वेगस अस्पताल में भर्ती है। 

विजय साहू की पत्नी कहती हैं कि उन्हें नहीं लगता कि उनके पति ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश करेंगे। 

आरोपित विजय साहू की पत्नी

विजय साहू के पिता का कहना है कि उन्हें पुलिस की बात पर भरोसा नहीं है।

 

आरोपित विजय साहू के पिता

पुलिस ही दे रही कई तरह के बयान

इस पूरे मामले में पुलिस का संदिग्ध व्यवहार ही उसपर सवाल खड़े कर रहा है। विजय साहू को गिरफ्तार करने मुंगेली गई टीम में शामिल एक पॉलिसकर्मि ने घटना का विवरण पूछने पर बताया कि विजय साहू ने पुलिस के पकड़ने से पहले ही ज़हर खा लिया था। लेकिन थाना स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि पकड़कर गाड़ी में बिठाने के बाद विजय साहू ने ज़हर खाया। 

दो पॉलिकार्मियों ने एक ही घटना के दो अलग अलग तथ्य बताए। ज़ाहिर है कि दोनो में से कोई एक झूठ बोल रहा है। प्रश्न ये नहीं कि झूठ कौन बोल रहा है, प्रश्न ये है कि झूठ क्यों बोला जा रहा है। आख़िर क्या छुपाने की कोशिश कर रही है पुलिस??? 

मुंगेली अस्पताल में भर्ती होने की सूचना परिवार को क्यों नहीं दी

पुलिस ने बताया कि विजय साहू की तबियत बिगड़ती देख रात में ही उसे मुंगेली के अस्पताल में भर्ती करवाया गया वहां उसे 4 बोतल ड्रिप चढ़ाई गई। जब उसका पेट साफ़ हो गया और तबियत नॉर्मल हो गई तब उसे बिलासपुर के वेगस अस्पताल लाया गया। लेकिन परिवार ने मीडिया को बताया कि विजय साहू के द्वारा ज़हर खा लेने, उसे मुंगेली अस्पताल में भर्ती किए जाने, चार बोतल ड्रिप चढ़ने आदि किसी भी बात की जानकारी पुलिस ने परिवार को नहीं दी। 

परिवार ने बताया कि दूसरे दिन सुबह पुलिस ने उन्हे फोन पर कहा कि विजय साहू बिलासपुर के वेगस अस्पताल में भर्ती है और सीरियस है रात में मुंगेली अस्पताल में भर्ती करवाने की बात पुलिस ने उन्हें नहीं बताई थी। 

रातभर क्या मैनेज करने में लगी रही पुलिस??? 

इतना तो सभी जानते हैं कि चार बोतल ड्रिप चुटकियों में नहीं चढ़ जाती, धीरे-धीरे एक-एक बून्द शरीर में जाने में समय लगता है। इतने पर्याप्त समय में पुलिस द्वारा परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई??? रातभर क्या मैनेज करने में लगी रही पुलिस??? 

7 पुलिसकर्मियों के बीच बैठे विजय ने ज़हर कैसे खा लिया? 

सात पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सबकी नज़रों से बचकर एक आरोपित ने ज़हर खा लिया। इसका मतलब ये कि किसी ने भी पकड़े गए आरोपित की तलाशी नहीं ली थी। कहीं उसने कोई हथियार छुपा रखा होता और किसी पॉलिकार्मि को घायल कर देता तब क्या होता? आख़िर पुलिस इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है। 

मीडिया को बयान देने से क्यों बचा रहे हैं आला अधिकारी? 

पुलिस की इस गंभीर लापरवाही और संदेहभरे मामले की जानकारी के लिए मीडिया ने सिविल लाईन थाने से संबंधित शहरी क्षेत्र दो आला अधिकारियों से बात की तो दोनों ने ही कोई बयान देने से इनकार कर दिया। एक अधिकारी ने कहा कि बड़े साहब से बाईट ले लो, बड़े साहब ने कहा मैं तो कुछ दिन के प्रभार में हूं फलाने से ही बाईट लेलो। 

हर छोटी बात पर प्रेसवार्ता करने वाली बिलासपुर पुलिस इस गंभीर लापरवाही भरे मामले में मीडिया से दूर क्यों भाग रही है??? अस्पताल में भर्ती विजय साहू के पास भी एक पॉलिकार्मि तैनात है जो मीडिया को उससे दूर रखे हुए है। 

अगर पुलिस की कोई ग़लती नहीं है तो इतनी पर्दादारी किसलिए??? 

आपको बता दें कि ज़िले की एसपी अभी अवकाश पर हैं और उनकी जगह एडिशनल एसपी उमेश कश्यप एसपी के प्रभार मे हैं।

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