Tag : शाकिर अली

कला साहित्य एवं संस्कृति

? व्यक्तित्व . सतीश जायसवाल ,आत्मीयता का खुला गवाक्ष.-शाकिर अली ..

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नोटः दुनियां इन दिनों के अगस्त 2019 के अंक से आभार सहित . सतीशजी का दूसरा ठिकाना ‘ खुले में बैठा प्रजातंत्र ‘ यानी इंडियन...
कला साहित्य एवं संस्कृति

आलोचना का लोकधर्म : आलोचना की लोकदृष्टि – अजय चंन्द्रवंशी ,कवर्धा.

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कृति- आलोचना का लोकधर्म लेखक- शाकिर अली प्रकाशन- उद्भावना, गाजियाबाद अजय चन्द्रवंशी, कवर्धा (छ. ग.) मो. 9893728320...
कला साहित्य एवं संस्कृति

संदर्भ शाकिर अली : आलोचना का लोकधर्म : सतीश जायसवाल .

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सतीश जायसवाल इन दिनों एक प्रश्न कई तरह से सामने आ रहा है।वह प्रश्न यह कि क्या रचना-आलोचना को भी किन्हीं क्षेत्रीय परिधियों के भीतर...
कला साहित्य एवं संस्कृति

वह मेरा ” पहल समय “शाकिर अली का जीवन कथ्य .

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अभी कल ही शाकिर अली की तीसरी पुस्तक आलोचना का लोकधर्म , उद्भावना प्रकाशन.से छप कर आयी और अभी बीते इन दिनों मासिक पत्रिका में...
कला साहित्य एवं संस्कृति

“आधुनिक जीवन की विडंबना को दर्शाती कहानीयाँ ” पर पाठक मंच बिलासपुर में चर्चा .

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बिलासपुर 20 मई 2019 पाठक मंच बिलासपुर के  इंदु चौक ,जरहाभाठा बिलासपुर कश्यप कॉम्प्लेक्स में आयोजित “ब बाय” शीर्षक कृष्ण बिहारी कथाकार की कहानी संग्रह...
कला साहित्य एवं संस्कृति

समीक्षा ःःबचा  रह जायेगा बस्तर: बस्तर के जन जीवन की चिंता.: अजय चंन्द्रवंशी 

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27.04.2019 बस्तर अपने प्राकृतिक सौंदर्य, दुर्गम जंगलों और आदिम जनजातीय संस्कृति के लिए पिछली शताब्दी के पूर्वार्ध में मानवशास्त्रियो के आकर्षण का केंद्र रहा; और...
आदिवासी कला साहित्य एवं संस्कृति कविताएँ

सियाह हाशिये। ( स्व . मंटो से क्षमायाचना सहित ) शाकिर अली .

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27.04.2019 शाकिर अली जगदलपुर में 2004 से 2007 तक ग्रामीण बेंक में आडीटर के पद पर रहे ,अपने कार्यक्षेत्र में उन्हे  दक्षिण बस्तर के अंदरूनी ...
आदिवासी कला साहित्य एवं संस्कृति

बचा रह जायेगा बस्तर से : शाकिर अली की तीन लंबी कवितायें.

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पिछले सप्ताह से शाकिर अली जी की प्रकाशित कविता संग्रह बचा रह जायेगा बस्तर से क्रमश:  कवितायें पढ रहे हैं. उसी संग्रह मे उनकी लंबी...
आदिवासी कला साहित्य एवं संस्कृति

शाकिर अली की कवितायें : श्रंखला . 31 से 40 ःः बचा रह जायेगा बस्तर से ,लगातार …

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यही ठीक रहेगा ? 31 सारी पृथ्वी पर चप्पे-चप्पे पर बारूदी सुरंग बिछा देना चाहिए, ताकि शत्रुओं को आसानी से मारा जा सकें – मित्रों को...
आदिवासी कला साहित्य एवं संस्कृति राजनीति

शाकिर अली की दस कवितायें और …. “बचा रह जायेगा बस्तर ” से . 21 से 30 .

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हम पिछले  दो दिन से जनवादी कवि शाकिर  अली की कवितायें पढ रहे है. बीस कविताओं के बाद दस और कविता . उनके कविता संग्रह...