क्राईम छत्तीसगढ़ बिलासपुर भृष्टाचार राजनीति

लगभग एक करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी का घपला, नमांतरण पंजी में फ़र्ज़ी हस्ताक्षर समेत पटवारी कौशल यादव पर लगे हैं कई गंभीर आरोप राजस्व मंत्री समेत पूरा प्रशासनिक अमला क्यूँ है खामोश ?

बिलासपुर। ज़मीन संबंधी फ़र्ज़ीवाड़ों के लिए कई आरोप झेल रहे पटवारी कौशल यादव का एक और कारनामा सामने आया है। दरसल इसी महीने अधिवक्ता प्रकाशसिंह ने बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष लिखित आवेदन देकर पटवारी कौशल यादव द्वारा किए गए काले कारनामों को उजागर किया है।

कूटरचना कर बनाए जाली दस्तावेज़?


आवेदक ने बताया कि उसके द्वारा नामान्तरण पंजी ग्राम मोपक प.ह.न.29 तहसील व ज़िला बिलासपुर छ.ग. वर्ष 2019-20 का अवलोकन कर नामान्तरण पंजी क्रमांक 829 से 839 की नकल निकालकर जाँच की गई तो पाया गया कि पंजी क्रमांक 834, 835 और 836 के खण्ड 12 नामान्तरण प्रमाणिकरण आदेश में तत्कालीन तहसीलदार एवम् मोपका के प्रभारी नारायण गवेल के नहीं बल्कि किसी अज्ञात वक्ति के हस्ताक्षर हैं जिसमें न तो कोई पद मुद्रा (सील) है न ही कोई नाम।


आपको बता दें कि इस दौरान कौशल यादव ही मोपका के पटवारी थे। पटवारी के आधीन रहने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज़ नामान्तरण पंजी में तहसीलदार की जगह किसी अन्य के हस्ताक्षर होना पटवारी द्वारा कार्य के दौरान हुई गंभीर त्रुटि की श्रेणि में आता है। आवेदक ने इसे दस्तावेज़ो में कूटरचना या जाली पेपर बनाने जैसा गंभीर अपराध बताया है।

कलेक्टर की अनुमति के बिना पट्टे की भूमि का नामान्तरण कैसे?


नामान्तरण पंजी वर्ष 2019-20 क्रमांक 834, 835, 836 खसरा नम्बर 992/9 में क्रमशः रकबा 10.10 एकड़, रकबा 0.56 एकड़, रकबा 0.55 एकड़ बिक्री की हुई भूमि नामान्तरण के संबंध में है। आवेदक ने बताया कि ये भूमि शासकीय पट्टे से प्राप्त भूमि है जिसे कलेक्टर की अनुमति के बिना ही बेच दिया गया है और क्रेता के पक्ष में अवैधानिक तरीके से नामान्तरण करने के लिए पटवारी कौशल यादव के द्वारा अज्ञात व्यक्ति से हस्ताक्षर कर नामान्तरण कर दिया गया है जो अपराध की श्रेणि में आता है

शासन को लाखों के राजस्व का लगाया चूना

खसरा नंबर 992/9 कुल रकबा 04 एकड़(1.619 हेक्टेयर) भूमि शासकीय पट्टे से प्राप्त भूमि का आवासीय उपयोग में व्यपवर्तन किया गया। परंतु उक्त भूमि का विक्रय करते समय पंजियन के दौरान ये जानकारी छिपा ली गई और डायवर्सन शाखा से मिलीभगत कर नामान्तरण करवा लिया गया जिससे शासन को लाखों रुपयों के राजस्व की हानि हुई।

लगभग एक करोड़ की स्टांप ड्यूटी का घालमेल


कुल चार एकड़ (1, 74,240 वर्गफुट) शासकीय पट्टे से प्राप्त भूमि को कलेक्टर की अनुमति के बिना ही डाइवर्टेड कर कृषि भूमि बना दिया गया। डाइवर्टेड भूमि के पंजीयन के समय स्टांप शुल्क, उपकर एवम् ब्लॉक मूल्य का निर्धारण वर्गफुट के हिसाब से तय किया जाता है इस प्रकार उपरोक्त दर्शित भूमि का मोपका के न्यूनतम शासकीय मूल्य 600 रुपये वर्गफुट के हिसाब से 10,45,44,000 रुपये बनते हैं जिसका स्टांप शुल्क लगभग 10% के हिसाब से 1,04,54,400 दिया जाना चाहिए था लेकिन उक्त डाइवर्टेड भूमि को कपटपूर्वक कृषिभूमि बताकर कुल पंजियन और स्टांप शुल्क केवल 11,50,510 रुपये ही दिया गया। आवेदक ने बताया कि इस प्रकार पटवारी कौशल यादव द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी की घपलेबाज़ी की गई है।

प्रथमदृष्ट्या आरोपी पटवारी पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई

जिस नामान्तरण पंजी को आधार बनाकर इतने सारे घपले घोटालों को उजागर करने की कोशिश की गई है, प्रमाणित है कि वो नामान्तरण पंजी पटवारी कौशल यादव के ही अधिकार में थी आवेदक ने तमाम आरोप भी उसी पर लगाए हैं लेकिन फिर भी जाँच प्रक्रिया के दौरान पटवारी कौशल यादव पर अबतक कोई दंडात्मक या प्रतिबंधात्मक कारवाई नहीं की गई है जबकि एक अन्य अधिकारी को केवल संदेह के आधार पर पद से हटा दिया गया है।

कलेक्टर महोदय ने अबतक आरोपित पटवारी को पद से नहीं हटाया है। बात समझ से परे है कि आख़िर उसपर इतनी महरबानी क्यों की जा रही है। क्या इस मामले में किसी बड़ी राजनीतिक हस्ती का हस्तक्षेप है जो आरोपित पटवारी को बचा रहा है??

ऐसा लग रहा है कि प्रदेशभर में भेंट मुलाकात कर रहे मुख्यमंत्री महोदय के अलावा सारा सिस्टम भृष्ट हो चुका है।

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