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महिला सम्बन्धी अपराधों में हद दर्ज़े का असंवेदनशील व्यवहार करने के लिए बदनाम है शहर के सरकंडा थाने की पुलिस, पढ़िए क्या है ताज़ा मामला

बलात्कारियों, अपराधियों, गुण्डे-बदमाशों के लिए ये ख़बर खुशखबरी की तरह है और यदि आप सीधे-शरीफ़ व्यक्ति हैं, आपकी कोई बेटी है, बहन है, पत्नी है तो ये ख़बर आपके लिए दुखद है और यदि आप ख़ुद एक महिला हैं तब तो हम आपकी मुश्किलों का सिर्फ़ अंदाज़ा ही मात्र लगा सकते हैं.

बिलासपुर. महिला सम्बन्धी अपराधों में घोर लापरवाही बरतने और हद दर्ज़े का असंवेदनशील व्यवहार करने  के लिए बदनाम है शहर के सरकंडा थाने की पुलिस. वैसे बाकी थानों का रिकॉर्ड भी कोई बहुत अच्छा नहीं है लेकिन ताज़ा घटना सरकंडा थाने की है.

घटना इस प्रकार है

सरकंडा की रहने वाली  आशा सिंह(बदला हुआ नाम) इंजीनियरिंग की क्षात्रा हैं. कुछ समय पहले इनके साथ बलात्कार की गंभीर घटना हुई थी. उस मामले की सुनवाई फिलहाल कोर्ट में चल रही है. मामला दर्ज होने के बाद से ही पीड़ित अहिला और उसकी माँ पर केस वापस लेने के लिए आरोपी पक्ष की तरफ़ से डरा धमका कर दबाव बनाया जाता रहा है.

बीते कल याने 16 मई 2021 की दोपहर तकरीबन दो बजे आशा अपने घर के बाहर अपनी पाली हुई गाय को खाना खिला रही थीं. इसी दौरान सत्येन्द्र सिंह राठौर नाम के युवक से उसकी किसी बात पर कहासुनी हो गई. सत्येन्द्र नाम का ये युवक पीड़ित महिला के साथ हुए बलात्कार के आरोपी का दोस्त है. सत्येन्द्र ने फोन करके और भी लोगों को वहां बुला लिया. लगभग 8 से 10 लोगों ने घर में घुसकर आशा और उसकी माँ को डंडों, पत्थरों, लात-घूंसों से बहुत पीटा. आशा के पूरे शरीर पर चोट आई, कपड़ों पर खून के बड़े बड़े धब्बे दिख रहे थे.

एक घंटे बाद आई 112

पीड़ित परिवार ने मदद के लिए 112  में फोन किया. लगभग एक घंटे से भी ज़्यादा समय के बाद 112 आई. पीड़ित की माँ ने बताया कि जब वो सरकंडा थाने पहुचीं तो थाना प्रभारी जे पी गुप्ता थाने में ही मौजूद थे. मारपीट करने वाले लोग भी पहले से ही थाने में थे. बेटी खून से लथपथ थी लेकिन फिर भी थाना प्रभारी ने उनसे बात तक नहीं की और वहां से चले गए.

पीड़ित के साथ पुलिस का बुरा बर्ताव

मीडिया से बात करते हुए आशा और उसकी माँ ने बताया कि

पुलिस वाले उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहे थे. उन्होंने हमारे बताने के अनुसार रिपोर्ट नहीं लिखी उलटे मुझे ही धमकाने लगे कि जाओ जिसके पास जाके शिकायत करनी है कर दो

पीड़ित लड़की के चरित्र पर भी कुछ पुलिस वालों ने सवाल उठाए.

महिलाओं पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों पर पुलिस ने ज़रूरी धाराएं नहीं लगाईं और केवल 294, 506, 323, 34 साधारण मारपीट की धरा लगाकर मुचलके पर छोड़ दिया.

शहर के सामजिक कार्यकर्ताओं ने जब ट्विट करके IG SP के संज्ञान में मामला लाया तब कहीं जाकर सरकंडा  पुलिस पीड़ित का बयान लेने को तैयार हुई.

लेकिन भई सरकंडा पुलिस तो सरकंडा पुलिस है काहे का नियम और कौन सा कानून.

दूसरे दिन याने आज पुलिस वाले महिला के घर पहुच गए, कहा चलो बयान दर्ज कराओ. महिला ने निवेदन किया कि चोट बहुत आई है, पूरे शरीर में दर्द है, थाने जाना मुश्किल होगा आप यहीं बयान लिख लीजिए. लड़की की मर्ज़ी के खिलाफ़ पुलिस लड़की को थाने ले आई.

आज भी पुलिस की मनमानी चलती रही

समाचार लिखे जाने तक पीड़ित माँ बेटी थाने में मौजूद थे. लड़की की माँ ने फोन पर हमें बताया कि

“मुझे ज़बरदस्ती थाने से बाहर भेज दिया गया है बेटी अन्दर है. बयान नोट करने वाली महिला पुलिसकर्मी आज भी हमारे बताने के अनुसार बयान नहीं लिख रही हैं”

जान के ख़तरे की आशंका जताते हुए पीड़ित परिवार ने मौखिक आग्रह करके पुलिस से सुरक्षा मांगी है. हलांकि इस बात की उम्मीद कम ही है कि पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैय्या करवाएगी.

कुछ सवाल
  • “112” जिसका काम है तुरंत पहुचकर मदद करना वो एक घंटे बाद क्यूं पहुंची ? पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों के साथ शायद थाने में सेटलमेन्ट चल रहा होगा इसलिए देर हुई
  • जब पीड़ित लड़की कह रही है कि मारपीट करने वाला युवक उसके साथ बलात्कार करने वाले का दोस्त है और हमें डराने के लिए ये सब किया गया है तो सरकंडा पुलिस ने इसे साधारण मारपीट का मामला क्यों बना दिया?
  • पीड़ित महिला के चरित्र पर सवाल उठाने का अधिकार पुलिस को कब से मिल गया ? क्या सरकंडा पुलिस को जज की तरह फैसले सुनाने का भी अधिकार है ?

एक सवाल ये भी है कि क्या सरकंडा थाने के पुलिसकर्मियों की नज़र में ज़िले के आला अधिकारियों जैसे IG SP की कोई इज्ज़त नहीं है ? जो वो पीड़ितों को ये कहकर धमकाते रहते हैं कि “जाओ जिससे शिकायत करनी है कर दो यहाँ तो ऐसे ही होगा”

ज़िले के आला पुलिस अधिकारियों को इस ओर ज़रूर ध्यान देना चाहिए आख़िर ये उनकी इज्ज़त और बेईज्ज़ती का मामला है.

भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे असुरक्षित बेश बनाने में सरकंडा थाने के पुलिसकर्मियों की तरह मानसिकता रखने वालों का बहुत बड़ा योगदान है.

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