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छत्तीसगढ़ कृषि विभाग में निरिक्षकों की आड़ लेकर पदोन्नति में किया जा रहा जुगाड़ ?

छत्तीसगढ़ कृषि विभाग में निरिक्षकों की आड़ लेकर पदोन्नति में किया जा रहा है जुगाड़ ?

छत्तीसगढ़। प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ से संबद्ध ग्रामीड़ कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने छत्तीसगढ़ कृषि विभाग के आला अधिकारियों पर पदोन्नति के नाम पर भारी धांधली और तिकड़म करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संघ के सदस्यों ने इस बारे मे जानकारी साझा की है।

कृषि विभाग के मैदानी अमले का मूल कार्य

संघ के सदस्यों ने बताया कि कृषि विभाग के मैदानी अमले का मूल कार्य कृषकों के बीच उन्नत कृषि तकनीकि का प्रचार प्रसार और उनकी तकनीकि समस्याओं को अनुसंधान केन्द्रो तक पहुंचाकर उनका समाधान कराना है। इसके अन्तर्गत भूमि की तैयारी से लेकर उपज का सुरक्षित भंडारण तक का कार्य आता है। इसके अतिरिक्त राज्य
शासन द्वारा समय-समय पर सौंपे गये दायित्वों का निर्वहन भी किया जाता है।

उपरोक्त कार्य के सफल संपादन हेतु मैदानी स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी इनके कार्य का पर्यवेक्षण हेतु प्रति 06 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी
के उपर एक कृषि विकास अधिकारी एवं विकास खण्ड स्तर पर प्रमुख वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी की पदस्थापना है।

अनुविभाग स्तर से राजपत्रित श्रेणी के अधिकारियों की पदस्थापना यथा अनुविभागीय कृषि अधिकारी (सहायक संचालक कृषि) जिला स्तर पर उप संचालक कृषि, संभाग स्तर पर संयुक्त संचालक कृषि एवं संचालनालय स्तर पर
अपर संचालक कृषि अधिकारियों की पदस्थापना है।

सीधी भर्ती और पदोन्नति

वर्तमान में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पदों पर 100% (शत प्रतिशत), वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के पदों पर 10% एवं सहायक संचालक कृषि के 50% पदों पर सीधी भरती की जाती है शेष सभी पद पदोन्नति द्वारा
भरे जाते है। कृषि विकास अधिकारी के 85 पद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की प्रथम पदोन्नति द्वारा भरे जाते है। पदोन्नति हेतु समस्त कृषि अधिकारियों के लिए छ.ग. लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 लागू है।

कितने पद हैं स्वीकृत?

विभागीय पद संरचना के अनुसार मैदानी स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 3797, कृषि विकास अधिकारी के 850 एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के लगभग 400 पद स्वीकृत हैं।

मैदानी स्तर की प्रथम पंक्ति पर कार्यरत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की संख्या और उनकी पदोन्नति के लिए स्वीकृत पदों की आनुपातिक संख्या काफी कम होने की वजह से लगभग 27-30 वर्षों की सेवा के उपरांत ही
प्रथम पदोन्नति मिल पाती है, जबकि सहायक संचालक के पद नियुक्ति प्राप्त राजपत्रित श्रेणी के अधिकारी अपनी 25-30 साल से अधिक की सेवा के दौरान अनिवार्यतः तीन पदोन्नतिया प्राप्त कर लेते हैं।

समय समय पर छ.ग. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ द्वारा ए.डी.ओ. के पद बढ़ाये जाने की मांग विभाग के समक्ष रखी गई किन्तु विभाग द्वारा इसे ठंडे बस्ते में डालकर मात्र चंद अपनों को लाभान्वित करने की नियत से निरिक्षक की आड़ लेकर पदोन्नति में जुगाड की व्यवस्था करने 04 दिसम्बर 2018 को विभागीय भरती नियम में अविधिक संशोधन कर वर्षों से कार्यरत पात्र वरिष्ठ
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की पदोन्नति का रास्ता बंद कर दिया गया। इस संशोधन एवं इसके आधार पर की जाने वाली पदोन्नतियों का संघ द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

विगत दिनों 26 दिसम्बर 2020 से 12 जनवरी 2021 तक राजधानी रायपुर में कर्मचारी संघ का 18 दिवसीय धरना प्रदर्शन निरंतर चलता रहा. संचालक कृषि द्वारा इस संबंध में माननीय छ.ग. उच्च न्यायालय में दायर याचिका के निराकरण तक पदोन्नति प्रक्रिया स्थगित रखे जाने का आश्वासन देने पर उक्त धरना प्रदर्शन स्थगित किया गया था।

विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर संघ के आंदोलन समाप्ति के पश्चात् गुपचुप तरीके से मात्र 235 कृषि स्नातक शैक्षणिक योग्यताधारी सेवा में अस्थाई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की डी.पी.सी. का आयोजन कर पदोन्नति सूची जारी करने प्रयासरत है जिससे सेवा में स्थाई वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के विधिक अधिकारों का हनन होगा जो कि छ.ग. लोकसेवा पदोन्नति नियम 2003 के विपरीत होगा।

कृषि विभाग के अधिकारी अपने गुनाह पर परदा
डालते हुये उर्वरक / बीज / कीटनाशी औषधी निरीक्षकों की आपूर्ति करना प्रचारित कर रहे है यदि ऐसा ही था तो इनके द्वारा निरिक्षक हेतु पूर्ण योग्यताधारी पात्र वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को भी इस डी.पी.सी में शामिल क्यों नहीं किया गया। विवादित संशोधन 04 दिसम्बर 2018 के पश्चात् लगभग 200 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पात्रता के बावजूद बिना पदोन्नत हुये सेवा निवृत्त हो चुके हैं, वहीं 33-34 वर्ष सेवा दे चुके
को पदोन्नति से वंचित कर मात्र 10-12 वर्षीय सेवा के अस्थाई कर्मचारियों को पदोन्नति देने का कुप्रयास किया जा रहा है।

कृषि विभाग के सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों, छ.ग. शासन के विभागीय मंत्री प्रदेश के विधायक गण, जन प्रतिनिधियों के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश
अध्यक्ष मोहन मरकाम के संज्ञान में लाये जाने पर उनके द्वारा राज्य शासन को कार्यवाही हेतु लिखा गया है, किन्तु कृषि विभाग के जवाबदार अधिकारी जांच कार्यवाही को ठंड बस्ते में डाल निरीक्षक की आड़ लेकर पदोन्नति में अपना जुगाड़ करने में लिप्त हैं। ऐसा लगता है पिछली सरकार का एजेण्डा लागू करवाना ही इनका एक मात्र उद्देश्य है।

संघ इस विज्ञप्ति के माध्यम से यह मांग की है कि 04 दिसम्बर 2016 का विवादित संशोधन निरस्त कर पदोन्नति में प्रचलित छ.ग. लोक सेवा पदोन्नति नियम का पालन कराया जाये उक्त विवादित संशोधन के तारतम्य में की जा रही समस्त कार्यवाही स्थगित रखी जावे. अन्यथा
इसके खिलाफ चल रहे असंतोष आंदोलन को उम्र किया जायेगा।

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