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गांधीवादी तरीके से करेंगे सत्याग्रह : मिनिमाता बस्ती बचाओ संघर्ष समिति तालापारा

महिलाएं अपना घर बचाना चाहती हैं और बड़े कांग्रेसी नेता उन्हें गाली देकर धमका रहे हैं, ऑडियो हुआ वायरल

बिलासपुर। कहने के लिए तो छत्तीसगढ़ के लोग बिलासपुर शहर को न्यायधानी कह देते हैं लेकिन यहां के राजनेता खुलेआम ग़रीबों के साथ अन्याय करते नजर आ रहे हैं। कोरोना और ठंड के मुश्किल समय में गरीबों का घर तोड़ने जैसा निंदनीय काम छत्तीसगढ़ की सरकार कर रही है।

मॉल के पीछे की झुग्गी बस्ती तोड़ने का नोटिस

मामला बिलासपुर नगर निगम के वार्ड नं 25 का है। शहर के बीच रामा मैग्नेटो मॉल के पीछे तालाब से लगी हुई ज़मीन पर सरकार द्वारा ही बसाई गई गरीबों की बस्ती है। मिनिमाता नगर, कबीर नगर और दूसरे नामों से यहां छोटे छोटे मोहल्ले हैं। यहां वो घर हैं जिनकी महिलाएं घरों में झाड़ू पोछा बर्तन खाना पकाने का काम करती हैं। मोहल्ले से लगी मुख्य सड़क पर शहर का मशहूर बड़ा सा साईं का मंदिर है। बस्ती के ही कुछ लोग वहां पर फूल माला नारियल अगरबत्ती का ठेला लगाते हैं। कोई हलवाई है, कोई ऑटो चलाता है, कोई दिहाड़ी मजदूर है। भीख मांगकर गुज़ारा करने वाले भी बहुत से लोगों का आसरा है ये बस्ती।

हर्षमंदर ने बसाई थी बस्ती दिया था 30 साल का पट्टा

ये लोग यहां दशकों से रह रहे हैं, कोई 25 साल तो कोई 50 साल से भी। सन 1997-98 में हर्षमंदर जब इस शहर के कमिश्नर थे तब उन्होंने “आशा” अभियान चलाकर राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत यहां के लोगों को व्यवस्थित बसाकर उन्हें 30 वर्षों का पट्टा दिया था। पट्टे के 30 वर्ष अभी पूरे भी नहीं हुए हैं और कांग्रेस सरकार ने इन घरों को तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया है। बस्ती के लोगों ने बताया कि यहां लगभग 2000 से ज़्यादा घर हैं। निगम के लोगों ने बस्तीवालों को चलते फिरते बस इतना बताया है कि 750 फ्लैट वाले घर बना कर लॉटरी सिस्टम से आबंटित किए जाएंगे। जिनको घर मिलेगा उन्हें 75000 रुपए शुल्क भी देना पड़ेगा।

ये कैसा झोल गणित है भाई

निगम का ये गणित तो हमारे भी समझ में नहीं आया कि यदि 2000 से ज़्यादा घरों को तोड़कर सिर्फ़ 750 मकान बनाए जाएंगे तो बाकी के 1250(या शायद उससे भी ज़्यादा) परिवारों का क्या होगा? क्या ये सारे परिवार सड़क पर बेसहारा छोड़ दिए जाएंगे?

सर से छत छिन जाने का ये डर बस्तीवालों की नींद उड़ाए हुए है। एक बूढ़ी अम्मा ने हमसे कहा कि “बेटा मैं इतने पैसे कहां से लाऊंगी”।

गरीबों से संवाद ही नहीं करना चाहती सरकार

सरकार की तरफ़ से बस्तीवालों के साथ संवाद ही नहीं किया जा रहा है। जबतक नए घर नहीं बन जाते तबतक ये हज़ारों लोग कहां रहेंगे, अस्थाई रूप से उन्हें बसाने को कोई व्यवस्था है भी या नहीं इस बारे में भी बस्ती वालों को कुछ नहीं बताया गया है। ज़ाहिर है ऐसी स्थिति में लोग अपने भविष्य के लिए चिंतित होंगे ही।

नेताजी ने कहा “तो क्या मैं अपना घर दे दूं तुम्हें”

महिलाओं ने बताया कि जब वे अपने इलाके के कांग्रेसी नेता के पास अपनी समस्या लेकर गईं तो नेताजी ने कहा कि “तो क्या मैं अपना घर तुम लोगों को दे दूं” नेताजी ने ये भी कहा कि चोरी करो, डाका डालो चाहे किसी का गला काटो लेकिन पैसे तो देने ही पड़ेंगे”। महिलाएं वहां से निराश लौट आईं।

तब बस्ती वालों ने विधायक महोदय से मदद मांगी। बस्ती वालों ने बताया कि अपने ही बताए समय से आधे घण्टे विलम्ब से आए विधायक महोदय ने भी उनकी बात नहीं सुनी, उल्टे वे बस्ती वालों के साथ बड़े ही रूखे ढंग से पेश आए।

महापौर ने बात सुनी दिया आश्वासन

अपने चुने नेताओं के इस बर्ताव से निराश सैकड़ों लोगों ने बीते 28 नवंबर को निगम भवन का घेराव कर दिया और महापौर महोदय से निवेदन किया कि वे उनकी मदद करें। नवनिर्मित महापौर रामशरण यादव लोगों के बीच आए, उनकी बात सुनी और आश्वासन दिया कि जो भी होगा बस्ती वालों की सहमति से और उनकी इच्छा के अनुसार ही होगा।

देखिए आश्वासन देते हुए महापौर का वीडियो

अन्याय के ख़िलाफ़ लोगों को सड़कों पर उतरता देख दूसरे दिन तालापारा इलाके के कांग्रेसी नेताजी (जिन्होंने मदद मांगने गई महिलाओं को वापस भेज दिया था) ने बस्ती में मुनादी करवाई कि “उनके घर के पीछे बने स्कूल में अमुक समय पर बैठक रखी गई है जिसमें वो और निगम आयुक्त मौजूद रहेंगे, सारे लोग वहां इकट्ठे होवें”।

महिलाओं को दी मां बहन की गालियां

बस्ती की महिलाओं ने उन नेताजी को फ़ोन किया और कहा कि “आपलोगों ने तो हमसे अच्छा बर्ताव नहीं किया था इसलिए हमें महापौर के पास जाना पड़ा। इस मीटिंग में यदि महापौर जी को नहीं बुलाया गया है तो हम भी नहीं आएंगे।” इसपर नेताजी ऐसे भड़के कि फ़ोन पर मां बहन की गालियां बकने लगे। वोट मांगते समय हांथ जोड़ने वाले नेताजी चुनाव जीतने के बाद मोहल्ले की महिलाओं को मां बहन की गालियां बकने लगे, ये देखकर हमें आश्चर्य भी हुआ और सत्ता के चरित्र पर दुख भी हुआ।

सरकार बनने के बाद नेताओं ने मारी पलटी

आपको बता दें कि साल 2017(भाजपा शासनकाल) में जब इस बस्ती को तोड़ने की योजना बन रही थी तब इन्हीं कांग्रेसी नेताओं ने उसका विरोध किया था और अब जब लोगों ने कांग्रेस की सरकार बनवा दी है तो देखिए कांग्रेस ने कैसी पलटी मारी है।

दरअसल हमारी सरकारों ने हमेशा ही ग़रीबों के साथ इतना अन्याय और छल किया है कि अब किसी को भी अधिकारियों और नेताओं की हवाहावाई बातों पर रत्तीभर भी यकीन नहीं है। गरीबों को परेशान करने के मामले में प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार और वर्तमान की कांग्रेस सरकार दोनों ही एक जैसी दमनकारी लग रही है। मदद मांग रही महिलाओं को गंदी गालियां देने वाले नेताओं पर कोई भरोसा करे भी तो आखिर कैसे।

अब गांधीवादी तरीके से करेंगे सत्याग्रह

बस्ती के लोगों ने मिलकर ये तय किया है कि अब वे अपने अधिकारों के लिए गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह करेंगे।

इन लोगों ने मिलकर अपनी एक समिति बनाई है “मिनिमाता बस्ती बचाओ संघर्ष समिति”। लोगों ने तक किया है कि अब से वो हर रोज़ तालाब किनारे पीपल झाड़ के नीचे इकट्ठे होकर सरकार द्वारा किए जा रहे इस दमन का विरोध करेंगे। बीते कल यहां जनगीत गए गए। लोगों ने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सावित्री बाई फुले, भगत सिंह आदि के संघर्ष का ज़िक्र किया।

“काला” फ़िल्म का किया जाएगा प्रदर्शन

घूसखोर नेताओं और लालची कॉरपोरेट्स के

द्वारा गरीबों की बस्ती उजाड़ दिए जाने वाली कहानी पर कुछ साल पहले रजनीकांत स्टारर एक फ़िल्म बनी थी “काला”। बस्ती वालों ने तय किया है कि आगामी 4 दिसंबर को पीपल झाड़ के नीचे इस फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा और इसी तरह कलात्मक तरीकों से बस्ती बचाने का ये सत्याग्रह जारी रखा जाएगा।

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