आंदोलन ट्रेंडिंग नीतियां मानव अधिकार राजकीय हिंसा राजनीति सांप्रदायिकता

NRC-CAA के खिलाफ वामपंथी पार्टियों का देशव्यापी प्रदर्शन 19 दिसम्बर को

NRC CAB CAA MCP

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) बनाने के खिलाफ वामपंथी पार्टियों ने 19 दिसम्बर को देशव्यापी विरोध कार्यवाही का आह्वान किया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा और भाकपा (माले)-लिबरेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न जिलों में संयुक्त रूप से प्रदर्शन, पुतला दहन, सभाओं के जरिये विरोध कार्यवाहियां आयोजित की जाएंगी।

जारी बयान में माकपा के संजय पराते, भाकपा के आरडीसीपी राव तथा भाकपा (माले) के बृजेन्द्र तिवारी ने मोदी-शाह की भाजपा सरकार के इस कदम को भारतीय संविधान और गणतंत्र की उन बुनियादी धर्मनिरपेक्ष-जनतांत्रिक प्रस्थापनाओं के ही खिलाफ बताया है, जो धर्म या क्षेत्र के आधार पर न नागरिकता तय करती है और न एक इंसान के रूप में उनसे कोई भेदभाव करती है। यह कानून समानता के अधिकार की गारंटी देने वाले अनुच्छेद-14 के भी खिलाफ है।

वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया है कि RSS नियंत्रित भाजपा सरकार भारत में हिटलर के उन कानूनों को लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसके जरिये उसने नस्लीय घृणा के आधार पर समूचे यहूदी नस्ल का सफाया करने की कोशिश की थी। धार्मिक घृणा पर आधारित नागरिकता विधेयक और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर इस देश में सांप्रदायिक विभाजन और सामाजिक तनाव को बढ़ाने का ही काम करेंगे, जो देश की एकता-अखंडता के लिए खतरनाक है और देश के बहुलतावादी चरित्र को नष्ट करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह कदम स्पष्ट रूप से मुस्लिमों को नागरिक-अधिकारों से वंचित करके हिन्दू राष्ट्र के गठन की आरएसएस की राजनैतिक परियोजना के अनुरूप है, जिसे हमारे देश की जनता और स्वाधीनता संग्राम के नायकों ने कभी स्वीकार नहीं किया है। 

इस संबंध में वाम नेताओं ने केंद्र द्वारा भाजपा-शासित राज्य सरकारों को यातना शिविर बनाने के निर्देश दिए जाने की भी तीखी आलोचना की है, जहां असम की तरह नागरिकता रजिस्टर से बाहर रह गए लोगों को नजरबंद बनाकर रखने की योजना बनाई गई है। इन वामपंथी पार्टियों ने कहा है कि नागरिकता के संबंध में इस सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों से साफ है कि वह इस देश की जनता पर धर्मनिरपेक्ष संविधान की जगह मनुस्मृति को लागू करना चाहती है और मानव समाज द्वारा अर्जित सभ्यता को 5000 साल पीछे की बाबा-आदम के जमाने में ढकेलना चाहती है। 

उन्होंने कहा कि देश के सामने जो अभूतपूर्व आर्थिक संकट खड़ा है, उससे आम जनता का ध्यान हटाने के लिए भी यह विभाजनकारी खेल खेला जा रहा है। वामपंथी पार्टियां देश के संविधान और उसके धर्मनिरपेक्ष-जनतांत्रिक स्वरूप और इस देश के बहुलतावादी चरित्र को बचाने के लिए सभी जनवादी ताकतों को साथ लाकर देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन विकसित करेगी और सांप्रदायिक घृणा की ताकतों को शिकस्त देगी।

वाम नेताओं ने 19 दिसम्बर के महत्व को भी रेखांकित किया है। इस दिन अशफाकउल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी की सजा दी थी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में और इसके धर्मनिरपेक्ष चरित्र के गठन में ‘फ़ांसीवीरों’ का योगदान था, न कि द्विराष्ट्र का सिद्धांत देने वाले और मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलने वाले ‘माफीवीरों’ का।

Related posts

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला से संजीव ख़ुदशाह की बातचीत. Dmaindiaonline

News Desk

मीडिया कर्मियों का शैला रसीद के साथ अशोभनीय व्यवहार मोबलिंचिंग के समान हमला.भारत टीवी और जी टीवी की बद्तमीजी .देखिये पूरा वीडियो.

News Desk

Saathi Sudha, we’re with you: 7 love letters to Sudha Bharadwaj from 7 young women lawyers  

News Desk