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LIC रायपुर: बीमा कर्मचारियों ने निजीकरण के ख़िलाफ़ LIC के स्थापना दिवस को हिफ़ाज़त दिवस का नाम देकर बनाई मानव श्रृंखला

एलआईसी के स्थापना दिवस पर बीमा कर्मचारियों ने बनाई मानव शृंखला। रायपुर डिविजन इंश्योरेंस एम्पलाईज यूनियन का प्रदर्शन।

एक सितंबर को भारतीय जीवन बीमा निगम के 64 वे स्थापना दिवस के अवसर पर बीमा कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने इस दिवस को एलआईसी के हिफाज़त दिवस के रूप में मनाया तथा सायंकाल 5 बजे राजधानी रायपुर के पंडरी स्थित मण्डल कार्यालय के समक्ष मानव शृंखला का निर्माण किया। इस अवसर पर शाखा इकाई 2, शाखा इकाई cab, समूह बीमा इकाई तथा मण्डल कार्यालय के कर्मचारी एवं अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इसके अलावा पूरे प्रदेश के सभी बीमा कार्यालयों के सम्मुख भी मानव शृंखला का निर्माण किया गया ।

मानव श्रृंखला में शामिल लोग एलआईसी तथा देश के सार्वजनिक उद्योगों की रक्षा से संबन्धित तख्तियों एवं बैनर के साथ इनकी हिफाज़त तथा इन्हे मजबूत बनाने की मांग कर रहे थे।

एक सितंबर 1956 में भारतीय जीवन बीमा निगम का जन्म हुआ था। LIC का जन्म ही 245 निजी बीमा कंपनियों की तिकड़म के चलते जनता की बचत की रक्षा के लिए हुआ था। कर्मचारियों ने कहा कि आज फिर सरकार उसी तिकड़म को बढ़ावा दे रही है जो कि इसके राष्ट्रीयकरण के उद्देश्यों के ही विपरीत है।

मात्र 5 करोड़ की पूंजी से बना यह उद्योग 2019-2020 की स्थिति में 32 लाख करोड़ की संपत्ति का निर्माण कर चुका है और इतना ही नहीं इस 5 करोड़ के लाभांश के रूप में अब तक सरकार को 26005 करोड़ का भुगतान कर चुका है। इस कोरोना संकट के दौर में जब अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है तब LIC शानदार उपलब्धियों के कीर्तिमान गढ़ रही है। देश के किसी भी उद्योग को बचाने का सवाल हो, शेयर मार्केट के भूचाल को सम्हालने का सवाल हो या फिर पंच वर्षीय योजनाओं में योगदान का सवाल हो LIC हमेशा अग्रणी भूमिका निभा कर सरकार के लिए संकट मोचक का काम करती रही है।
ये प्रगति तब है जब एलआईसी 23 निजी बीमा कंपनियों से प्रतिस्पर्धा कर रही है तथा 49 प्रतिशत एफ़डीआई की सीमा थोप दी गई है।

कोविड महामारी विश्व में अपना रौद्र रूप दिखा रही है और ऐसी महामारी के दौरान सरकार एक ओर तो पूंजी के संकट से जूझ रही है और दूसरी ओर देश के नवरत्न, महारत्न, तथा मुनाफ़ादेह सार्वजनिक उद्योगों को नीलाम करने की मुहिम पर चलते हुए देश की संपत्ति को औने पौने दामों पर मित्र पूँजीपतियों के हवाले करने की कवायद कर रही है। होना तो ये चाहिए कि देश के लिए संपत्ति का निर्माण करने वाले सार्वजनिक उद्योगों को और अधिक सशक्त एवं मजबूत बनाया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था में इनके योगदान को सुनिश्चित करते हुए राष्ट्र निर्माण तथा गरीब जनता के उत्थान के कार्य लगातार जारी रहें।

महासचिव सुरेन्द्र शर्मा ने ने कहा कि इस संकट के दौरान सरकारी अस्पताल, पुलिस, डाक्टर , सफाई कर्मी सहित सरकारी क्षेत्र ही भरपूर योगदान दे रही है। अतः आज आवश्यकता इनके सुदृढीकरण की है न की विनिवेशी करण की। सभा को सीज़ेडआईईए के महासचिव धर्मराज महापात्र ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्रथम श्रेणी अधिकारी एसोशिएशन के महासचिव एच के गढ़पाल तथा अध्यक्ष धनंजय पांडे साथ ही विकास अधिकारी संघ के महासचिव बी वी एस राजकुमार भी उपस्थित थे।

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