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सिविल लाईन में चाकूबाज़ी, पहले घायल को मरने छोड़ दिया फिर उसे खोजती रही पुलिस

बिलासपुर। बताया जा रहा है कि तालापारा क्षेत्र की दो दुर्गा समितियों बजरंग युवा मंच और तृदेव युवा मंच के बीच विसर्जन में निकलने के दौरान गंभीर मारपीट हुई। विवाद बढ़कर चाकूबाज़ी तक जा पहुँचा।

घायल का नाम देव गुप्ता बताया जा रहा है। चाकू से हमला करने वाले का नाम राहुल गेमटे बताया जा रहा है। (इन दोनों नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है क्योंकि अधिकारियों को ख़ुद ही कोई जानकारी नहीं है तो वो पुष्टि कहां से करेंगे)

पेट में 5 सेंटीमीटर धँसा चाकू

सिम्स के मेडिकल स्टाफ ने बताया कि घायल देव गुप्ता के शरीर पर लगा घाव लगभग 5 सेंटीमीटर गहरा है जो गंभीर श्रेणि का जानलेवा घाव कहा जाएगा।

सिम्स स्टाफ ने ये भी बताया कि “घायल को उसके परिजन लेकर चले गए हैं। जब घायल को अस्पताल लाया गया और जब उसे वहाँ से दूसरी जगह रिफर किया गया तब तक कोई भी पुलिसकर्मी उसके साथ नहीं नज़र आया, परिजन उसे रायपुर ले गए हैं या कहीं और इस बारे में हमें कुछ नहीं पता”

इलाज के लिए भटकता रहा घायल

चाकूबाज़ी में घायल पक्ष थाने आया हुआ था लेकिन कोई भी ज़रूरी लिखा पढ़ी किए बिना ही सिविल लाईन पुलिस ने उन्हें अस्पताल जाने को कह दिया यहाँ तक कि उनके साथ किसी पुलिसकर्मी को भी अस्पताल नहीं भेजा गया।

रातभर घायल मरीज़ को लेकर परिजन अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। थाने से परिजन पहले उसे सिम्स ले गए, सिम्स से उसे अपोलो ले जाया गया, अपोलो से प्रथम अस्पताल लेजाया गया और प्रथम से श्रीराम केयर लेजाया गया, लेकिन कहीं सर्जन नहीं मिला तो कहीं बेड उपलब्ध नहीं हुआ।

इतने गंभीर मामले में सिविल लाईन पुलिस को ये तक नहीं मालूम है कि घायल प्रार्थी वर्तमान में कहां और किस हालत में है।

घायल को ढूढ़ते फिर रहे थे होनहार थानेदार

छत्तीसगढ़ के देहाती इलाकों में मज़ाक-मज़ाक में एक कहावत बोली जाती है “आ गे मरे मा मेछा उखाने”। कुछ ऐसा ही हाल इस मामले में सिविल लाईन पुलिस का नज़र आया।

जब घायल प्रार्थी ख़ुद थाने आया तब पुलिस ने बिना कोई ज़रूरी लिखा पढ़ी किए उसे जाने को कह दिया। बाद में सिविल लाईन के होनहार, काबिल, ज़िम्मेदार थानेदार श्रीमान शनिप रात्रे महोदय घायल को खोजने सिम्स पहुँचे थे लेकिन तबतक घायल वहाँ से जा चुका था।

जब घायल ख़ुद थाने आया हुआ था तब थाने से TI समेट सभी ज़िम्मेदार अधिकारी नदारद थे।

आपराधिक तत्वों पर सिविल लाईन पुलिस का कोई कंट्रोल नहीं

चकूबाज़ी की इस गंभीर घटना ने सिविल लाईन पुलिस की लचर व्यवस्था की पोल खोल दी है। पूरे सिविल लाईन थानाक्षेत्र में गंभीर अपराधों की बाढ़ आ गई है। आपराधिक तत्व यहाँ खुल्ले सांड की तरह घूमते हैं और घटनाओं को अंजाम देते हैं। आपराधिक तत्वों और नशेड़ियों पर सिविल लाईन पुलिस का ज़रा भी कंट्रोल नहीं रह गया है। थानाक्षेत्र में कानून व्यवस्था का बेड़ागर्क हो चुका है।

समाचार लिखे जाने तक(रात 3 बजकर 7 मिनट) घायल इलाज के लिए भटक रहा है और आरिपियों के खिलाफ़ अब FIR भी दर्ज नहीं की गई है।

यदि सिविल लाईन पुलिस थोड़ी सी संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल की FIR लिखकर नियम मुताबिक ख़ुद उसे अस्पताल लेजाती तो शायद अब तक उसका इलाज शुरू हो चुका होता लेकिन बीती कई घटनाओं को देखते हुए ऐसा लगता है कि सिविल लाईन पुलिस और संवेदनशीलता का आपस में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।

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