अभिव्यक्ति किसान आंदोलन छत्तीसगढ़ नीतियां रायपुर वंचित समूह शासकीय दमन

26 जून को “कृषि बचाओ लोकतंत्र बचाओ दिवस” व सिलगेर मामले में जाँच की मांग : छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन

रायपुर। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के देशव्यापी आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े सभी घटक संगठन भी 26 जून को “कृषि बचाओ, लोकतंत्र बचाओ” दिवस मनाएंगे तथा किसान विरोधी तीनों कानूनों की वापसी की मांग को लेकर गांव-गांव में प्रदर्शन आयोजित करेंगे। इस दिन किसान आंदोलन राज्य सरकार से सिलगेर गोली कांड की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने और चार आदिवासियों की मौतों के लिए प्रथम दृष्ट्या जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर उदाहरणीय दंड दिए जाने की भी मांग करेगा।

आज यहां जारी एक बयान में छग किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, संजय पराते आदि ने बताया कि किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के साथ ही देश का किसान आंदोलन सभी फसलों और सभी किसानों के लिए लाभकारी समर्थन मूल्य की कानूनन गारंटी की भी मांग कर रहा है। हाल ही में मोदी सरकार द्वारा खरीफ फसलों के लिए घोषित समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखाधड़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि सी-2 लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने के स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के आधार पर किसानों को मक्का के लिए 611 रुपये तथा रामतिल के लिए 2732 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्पष्ट करने के लिए एक चार्ट भी जारी किया है, जिसमें विभिन्न फसलों के सी-2 लागत मूल्य के बारे में जानकारी दी है और घोषित समर्थन मूल्य पर किसानों को होने वाले नुकसान को दर्शाया गया है।

उल्लेखनीय है कि 26 जून को देशव्यापी किसान आंदोलन के 7 माह पूरे होने जा रहे है। इसी के साथ देश में आपातकाल लगाकर नागरिकों के बुनियादी मौलिक अधिकार छीने जाने की 42वीं वर्षगांठ भी है। किसान नेताओं ने कहा है कि इस समय देश में अघोषित आपातकाल जारी है और संविधान के प्रावधानों और कानून के राज को पैरों तले कुचला जा रहा है। सांसदों की मांग के बावजूद राज्यसभा में बिना मतदान कराए किसान विरोधी कानूनों को पारित करने की घोषणा करना तथा किसान आंदोलन के समर्थकों व कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे गढ़ने से यह साफ है कि अब देश में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई भी सबको मिलकर लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से जुड़ा संकट आज लोकतंत्र के दमन से पैदा संकट का एक रूप बन गया है।

किसान आंदोलन के नेताओं ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए 26 जून को गांव-गांव में मोदी सरकार की कृषि विरोधी, लोकतंत्र विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे तथा सक्षम अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे। इस दिन छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन प्रगतिशील किसान संगठन व अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपेगा।

(छत्तीसगढ़ किसान आन्दोलन की ओर से सुदेश टीकम, संजय पराते, आलोक शुक्ला, रमाकांत बंजारे, नंदकुमार कश्यप, आनंद मिश्रा, दीपक साहू, जिला किसान संघ (राजनांदगांव), छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (कोरबा, सरगुजा), किसान संघर्ष समिति (कुरूद), आदिवासी महासभा (बस्तर), दलित-आदिवासी मजदूर संगठन (रायगढ़), दलित-आदिवासी मंच (सोनाखान), भारत जन आन्दोलन, गाँव गणराज्य अभियान (सरगुजा), आदिवासी जन वन अधिकार मंच (कांकेर), पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति (बंगोली, रायपुर), उद्योग प्रभावित किसान संघ (बलौदाबाजार), रिछारिया केम्पेन, आदिवासी एकता महासभा (आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच), छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान सभा, छत्तीसगढ़ किसान महासभा, परलकोट किसान कल्याण संघ, अखिल भारतीय किसान-खेत मजदूर संगठन, वनाधिकार संघर्ष समिति (धमतरी), आंचलिक किसान संघ (सरिया) आदि संगठनों की ओर से जारी संयुक्त विज्ञप्ति)

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