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JMI DU AMU में पुलिस बर्बरता के खिलाफ़ वर्धा हिन्दी विश्वविद्यालय के क्षत्रों ने किया प्रदर्शन

वर्धा। महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के छात्र-छात्राओं ने जामिया, डी.यू, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में NRC और CAA के विरोध में आंदोलनरत छात्र-छात्राओं पर बर्बर पुलिसिया हमले के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च और प्रतिरोध सभा का किया आयोजन।   

मार्च की शुरुआत में क्षात्र आकांक्षा त्यागी ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। गाँधी हिल्स से शुरू होकर क्षत्रों ने मुंशी प्रेमचंद्र तिराहे तक पैदल शांतिपूर्ण मार्च किया। यहां सभा की शुरुआत में क्षात्र चंदन सरोज ने कहा कि सरकार CAA और NRC की आड़ में पूरे देश का धार्मिक ध्रुवीकरण करना चाहती है, भारत में नागरिकता के नाम पर अनाप-शनाप कानून पास कर पूरे देश के सौहार्द्र को विखण्डित करना चाहती है ताकि अपनी 6 साल की विफलता को छिपा सके। भारत की सांस्कृतिक विरासत को छेड़ना, धार्मिक अलगाव पैदा करना, विश्वविद्यालयों को निशाना बनाना और विद्यार्थियों को कुचला जाना बेहद निंदनीय कार्य है। इस कुकर्म पर सरकार को सार्वजनिक तौर पर देश से माफी मांगना चाहिए। संविधान ने हमें धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है, इस स्थिति में सरकार धर्म के आधार पर नागरिकता कैसे तय कर सकती है!

इस प्रतिरोध सभा में शोधार्थी पलाश किशन ने अपने वक्तव्य में कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिसिया जुल्म के खिलाफ देशभर के क्षत्रों को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। पलाश ने बताया कि कैसे नागरिकता संशोधन बिल पूरे देश को धर्म के आधार पर बांट रहा है। मौजूदा सरकार के प्रति विरोध दर्ज करते हुए उन्होंने भारत के सभी नागरिकों को एकजुट होकर सत्ता के निर्णय के खिलाफ विरोध दर्ज करने का आह्वान किया। सभा में गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत के संविधान को न मानकर देश को अपने अनुसार चलाने के प्रयत्नों और एक बड़े जन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का भी आरोप भी लगाया गया।

विश्विद्यालय के स्नातक के छात्र चेतन वर्मा ने अपनी बात रखते हुए एनआरसी और सीएए को समझाते हुए कहा कि पहले सरकार असम में एनआरसी लाई और उसमें 19 लाख लोगों को गैर भारतीय बता दिया लेकिन सरकार ने जब देखा कि इसमें तो अधिक मात्रा में उसके ही वॉटर (हिन्दू) बाहर हो रहे हैं तो अपने वोटबैंक को बचाने के चक्कर में वो नागरिकता संशोधन कानून ले आई। चेतन ने डिटेंशन कैम्पों के मौजूदा हालात से लोगों का परिचय कराया और देश की बिगड़ती व्यवस्था पर कई आँकड़े भी पेश किए। 

थियेटर के परास्नातक छात्र केशव कुमार ने अपनी बात रखी और कहा कि सरकार पूरी तरह से विरोध के स्वर को दबाना चाहती है। उन्होंने भाजपा के स्टूडेंट्स संगठन पर सवाल करते हुए कहा कि वो लोग जो विवेकानंद को मानते हैं उन्हें विवेकानंद के शिकागो के वक्तव्य को पढ़ने की जरूरत है। हिन्दी के छात्र कुलदीप ने भारत की गिरती साख पर अपनी बात रखी। पत्रकारिता के छात्र रियाज ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालयों में असंवैधानिक तरीके से किए गए बर्बर खून-खराबे की निंदा की और सरकार के कृत्य के विरोध के साथ देश मे शांति बहाली की अपील की। क्षात्र पलाश किशन ने दुष्यन्त कुमार की कविता “हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए” पढ़ी और इस प्रतिरोध सभा का समापन किया।

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