क्राईम छत्तीसगढ़ पुलिस बिलासपुर

न्यायधानी के बड़े खाईवाल राजधानी से चला रहे सट्टा, ये महज़ संयोग है या कोई पुराना गुणा-गणित ?

बिलासपुर। जैसे ही देश में आईपीएल के क्रिकेट मैच शुरू होते हैं वैसे ही सट्टे का अवैध करोबार गर्म हो जाता है। कुछ महीनों पहले तक बिलासपुर में भी सट्टे का ये अवैध कारोबार खुलेआम चलता था लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा के पदभार ग्रहण करने के बाद से सट्टे पर काफ़ि हद तक लगाम लगाई जा चुकी है। सटोरिए या तो अपना काम बन्द कर चुके हैं या तो शहर से बाहर भाग रहे हैं।

लेकिन गुण-गणित-सेटिंग के साथ बिलासपुर में सट्टा चलाने वाले बड़े खाईवाल और सटोरिए अब राजधानी रायपुर में बैठकर इस अवैध काम को अंजाम दे रहे हैं।

सूत्रों की माने तो बिलासपुर के बड़े खाईवालों ने राजधानी को अपना गढ़ बना लिया है और वहाँ से ही अपने गुर्गों के माध्यम से सट्टे के अवैध कारोबार का संचालन कर रहे हैं।इन अवैध गतिविधियों की जानकारी शायद राजधानी पुलिस को भी होगी लेकिन अब तक इनपर कोई ठोस कारवाई नहीं की जा सकी है।

इस बात को महज़ एक संयोग कहने का जी नहीं चाह रहा कि राजधानी के वर्तमान पुलिस अधीक्षक जब बिलासपुर में पदस्थ थे तब यहां जुआँ, सट्टा, नशे और कबाड़ का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था अब सूत्रों का कहना है कि जब वे राजधानी में हैं तो बिलासपुर के कुछ बड़े खाईवाल रायपुर में किराए का मकान लेकर रह रहे हैं और यहीं से पूरे प्रदेश में सट्टा खिलाकर मोटी काली कमाई कर रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि राजधानी में अभी खानापूर्ति और प्रसाद के लड्डू बढ़वाने वाली कारवाईयां की जा रही हैं। जब कि बड़े खाईवालों पर अब तक कोई भी कार्यवाही नही की गई है। राजधानी का पुरानीबस्ती थानाक्षेत्र, बुद्धेश्वर चौक से भाठागाँव चौक तक का इलाका, मौधापार का कुछ इलाका ये कुछ ऐसी जगहे हैं जहाँ सट्टे का अवैध कारोबार अधिक होने की बात कही जाती है। नए पुलिस अधीक्षक के आने के बाद ऐसे इलाकों की संख्या बढ़ने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

खैर अब देखने वाली बात ये है कि राजधानी पुलिस बड़े खाईवालों पर कब अपना शिकंजा कसने में सफल होती है।

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