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वसूली में लगे अपोलो अस्पताल ने ली महिला की जान या गूंगे बहरे बने बैठे विधायक और CMHO ने ?

बिलासपुर. बीते कल अपोलो अस्पताल बिलासपुर में एक महिला की मौत हो गई.पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. बच्चेदानी में ऑपरेशन की बात कहकर मरीज़ को कोविड वार्ड में डाल दिया गया. मौत के बाद बताया कि कोरोना भी था.

कोरोना महामारी के इस दौर में एक तरफ़ डॉक्टरी पेशे के वे लोग हैं जो सेवा कर रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ़ इसी पेशे से जुड़े वे लोग भी हैं जो वसूली का धंधा कर रहे हैं.

शहर के लोगों से सुना है कि ऐसे ही एक वसूलीबाज़ संस्थान का नाम है अपोलो अस्पताल. बीते कल यानी 12 मई को 34 साल की तस्लीम बेगम की अपोलो अस्पताल के अन्दर मौत हो गई. मीडिया से बात करते हुए तस्लीम के शौहर ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की मनमानी और बेशर्मी भरे रवैये की जो बाते बताई वो हैरान करने वाली थीं.

तस्लीम के शौहर मोहम्मद इमरान ने बताया कि पिछले महीने की 22 तारीख़ को पेट में दर्द और हलकी ब्लीडिंग होने के कारण उन्होंने तस्लीम को अपोलो अस्पताल में भारती कराया था. जाँच के बाद डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है बच्चेदानी का ऑपरेशन करना होगा, कोई लाख सवा लाख का खर्च आएगा.

डॉक्टर ने तस्लीम के शौहर को एक हिदायत ये भी दी कि आप मरीज़ से मिलने मत आइयेगा कोरोना का समय है इन्फैक्शन का खतरा है.

26 तारीख़ को इमरान को बताया गया कि उनकी पत्नी का ऑपरेशन हो गया है एक दो दिन में उन्हें डिस्चार्ज कर देंगे. दिन बीतते गए पर तस्लीम को डिस्चार्ज नहीं किया गया. इमरान रोज़ अस्पताल के चक्कर लगा रहे थे कि कोई तो उन्हें कुछ जानकारी दे कि उनकी पत्नी की तबीयत अब कैसी है?  रिपोर्ट्स क्या कहतीं हैं? आखिर किस चीज़ का इलाज चल रहा है?

कोई उनसे मिलने या बात करने के लिए तैयार नहीं था एक दिन अचानक  इमरान को बताया गया कि आपका बिल 11 लाख़ रूपए हो गया है तुरन्त पैसे जमा करो वर्ना इलाज बंद कर देंगे.

CMHO साहब अपनी मौज में मस्त हैं कोई मरता है तो मरे

मिडिल क्लास फैमिली के लिए अस्पताल का 11 लाख रूपए का बिल हिमालय सर पर उठा लेने के समान होता है.  इमरान ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिलना चाहा उन्होंने समय नहीं दिया तो एक लेटर में पूरी बात लिख दी कि उसे पढ़कर शायद वो समय दे दें. लेकिन अधिकारी तो अधिकारी हैं कोई मरता है तो मरे इनकी बाला से!

मदद के लिए एक लेटर कलेक्टर ऑफ़िस में दिया गया. मार्किंग कर के वो लेटर CMHO साहब को भिजवा दिया गया पर फिर भी  मुख्या चिकित्सा अधिकारी महोदय ने कोई कार्रवाई नहीं की.

विधायक शैलेश पण्डे ने भी मिलने से मना कर दिया

जब कहीं से मदद नहीं मिली तो पीड़ित परिवार ने अपने चुने हुए प्रतिनिधि  विधायक महोदय श्री शैलेश पण्डे जी को फ़ोन किया. लेकिन श्रीमान जनता के सेवक जी ने जनता से मिलने के लिए ही मना कर दिया. कहते हैं जनता को टरकाने की कला जिसने सीख ली वो बड़ा नेता बनता है…भैया जी भी बनेंगे लगता है.

परिवार को बताया ही नहीं कि मरीज़ को कोरोना भी है

18 दिन अस्पताल में भारती रहने के बाद कल तस्लीम की मौत हो गई. अपोलो अस्पताल की बड़ी अजीब दादागिरी रही कि उन्होंने मरीज़ के परिवार को इतने दिनों तक न तो मरीज़ से मिलने दिया, न ही ये बताया कि आखिर उसकी मौत हुई किस बीमारी हुई है?

मरीज़ के मर जाने के बाद परिवार को बताता गया कि उसका कोरोना का भी इलाज चल रहा था और वो बहुत सीरियस थी.

पहले कहा गया कि बच्चेदानी का ऑपरेशन करना है घबराने की बात नहीं है, अब कह रहे हैं कि कोरोना था कंडीशन सेरियास थी.

भई कोरोना था तो ऑपरेशन क्यों किया?

क्या ओपरेशन के बाद कोरोना हुआ? इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

अगर कोरोना हो भी गया था तो परिवार को बताया क्यों नहीं गया?

कहा मीडियावालों का अस्पताल में आना मना है

इस पूरे वाकये की जानकारी परिवार ने मीडिया को दी. जब मीडिया के लोग अपोलो अस्पताल परिवार से मिलने पहुचे तो मीडिया को अन्दर आने से रोक दिया गया. अपोलो अस्पताल ऐसा कौन सा ग़लत काम कर रहा है जो अस्पताल मीडिया के आने से डरता है?

हमारे कैमरे के सामने ही परिवार डोक्टरों से पूरी सभ्यता के साथ सवाल पूछ रहा था और डॉक्टरों के पास कोई जवाब नहीं था. इस ख़बर में हम वो विडियो भी अपलोड कर रहे हैं जिसमें अपोलो के डॉक्टर उल-जुलूल सफाई देते दिख रहे हैं. विडियो थोडा लम्बा है लेकिन देख लीजियेगा.

 

अब सबसे अहम सवाल किसकी लापरवाही से गई जान

एक पीड़ित व्यक्ति जिसकी बीमार पत्नी को अपोलो अस्पताल ने एक तरह से बंधक बनाकर रख लिया था, उसपर 11 लाख रूपए का बिल ठोंक दिया था, पैसा न देने पर उसे इलाज बंद कर देने की धमकी दी जाती थी…तो वो अपोलो अस्पताल की इस दादागिरी की शिकायत करने CMHO साहब के पास या विधायक महोदय के पास नहीं जाएगा तो और कहाँ जाएगा?

अगर CMHO साहब और विधायक महोदय ने कोई कदम उठा लिया होता तो शायद आज तस्लीम जिंदा होतीं?

इस घटना के बाद ये सवाल तो करना बनता ही है कि…

वसूली में लगे अपोलो अस्पताल ने ली महिला की जान या गूंगे बहरे बने बैठे विधायक और CMHO ने ???

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