पुलिस बिलासपुर

ढाई महीने पहले ही पद ग्रहण किए सिविल लाईन TI को आईजी ने फिर किया लाईन अटैच

बिलासपुर। थानों के औचक निरीक्षण पर निकले IG सिविल लाइन TI समेत तीन को किया लाईन अटैच, स्टाफ निराश

पिछले कुछ दिनों से ज़िले के पुलिस विभाग में ये चर्चा का विषय है कि आई जी रतनलाल डांगी के प्रस्तावित औचक निरीक्षण में क्या होगा।

औचक निरीक्षण की गाज आज सिविल लाईन थाने पर गिरी। घंटों तक आईजी ने सिविल लाईन थाना भवन के कोने कोने का निरीक्षण किया। लंबित मामलों की फाइलें चेक की गई।

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आईजी ने कहा कि थाने में कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं, मामलों की पेंडेन्सि ज़्यादा होने की बात भी आईजी ने कही। उन्होंने कहा कि थाने के कार्यों में TI का नियंत्रण नहीं है।

वीडियो मे सुनिए आईजी ने क्या कहा

तीन लोगों को तत्काल प्रभाव से लाईन अटैच कर दिया गया है जिसमें थाना प्रभारी सुरेंद्र स्वर्णकार, आरक्षक राहुल सिंह और सब इंस्पेक्टर रमेश पटेल शामिल हैं।

सब इंस्पेक्टर रमेश पटेल के नाम पर अभी संदेह बना हुआ है क्योंकि आईजी ने मनोज पटेल नाम के सब इंस्पेक्टर को लाइन अटैच करने की बात मीडिया से कही है लेकिन स्टाफ का कहना है कि शायद ग़लती से रमेश पटेल की जगह मनोज पटेल का नाम कह दिया गया होगा क्योंकि मनोज पटेल तो हाईकोर्ट गए हुए थे, पूछताछ रमेश पटेल से हुई है। इस नाम की स्पष्टता लिखित आदेश आने के बाद ही हो पाएगी।

पूरे ज़िले के पुलिस महकमे में आईजी के इस पहले औचक निरीक्षण ने खलबली मचा दी है। बिलासपुर के साथ साथ सरगुजा के पुलिसकर्मियों के भी कान खड़े हो गए होंगे क्योंकि आईजी रतनलाल डांगी के पास ही सरगुजा का भी प्रभार है।

आईजी ने कहा कि हर महीने किसी एक थाने का ऐसे ही औचक निरीक्षण किया जाएगा और अनियमितता पाने पर इसी तरह कठोर कारवाई की जाएगी।

दबी ज़ुबान में स्टाफ के लोगों का कहना है कि उन्हें इतनी कड़ी कारवाई की उम्मीद नहीं थी। ये बात गौर करने वाली है कि थाना प्रभारी सुरेंद्र स्वर्णकार ने लगभग 7 महीने तक लाईन अटैच रहने के बाद तकरीबन ढाई महीने पहले ही सिविल लाईन थाना प्रभारी के रूप में पदभार ग्रहण किया था। जिस सब इंस्पेक्टर को लाइन अटैच किया गया है उसने भी लगभग एक महीने पहले ही पदभार ग्रहण किया था।

स्टाफ ने कहा कि सिविल थाने में काम की अधिकता है स्वर्णकार के आने के बाद काम व्यवस्थित होना शुरू ही हुआ था, पिछले थानेदारों को भी तलब किया जाना चाहिए था क्योंकि उनके कार्यकाल में ही मामलों की पेंडेन्सि बढ़ चुकी थी व्यवस्था दुरुस्त करने की ज़िम्मेदारी तो उनकी भी थी।

हालांकि इस कारवाई को ग़लत किसी स्टाफ ने नहीं कहा सबने यह भी कहा कि आईजी साहब ने कारवाई की है तो कुछ सोचकर ही की होगी। अब चर्चा इस बात की भी है कि सिविल थाने का प्रभार किसे दिया जाएगा।

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