किसान आंदोलन

कभी बेंक नहीं गए लेकिन किसान हो गए फर्जी तरीके से कर्ज़दार ,

पत्रिका दिनांक 7.7.17 से
जहाँ एक तरफ देश में किसान बेंक के क़र्ज़ से से परेशान है ,औरबढे हुए समर्थन मूल्य की मांग कर रहे है या कह रहे है कि हमारे उत्पादन का उचित मूल्य दिया जाये , इसी सब को लेकर किसान आन्दोलनरत है ,कही किसान आत्महत्या कर रहे है तो कही किसान भूख मर रहे है,
लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ओटेबंद गाँव में अलग ही कहानी हैं .
पत्रिका में छापी खबर के अनुसार बेमेतरा जिले में किसान क्रेडिट कार्ड के नाम पर किये फर्जी वाडे से ग्राम ओटेबंद के प्रभावित किसानो की नींद उड गई हैं .क़र्ज़ वसूली के नोटिस से डरे कई किसानो के घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला .किसान एक दुसरे की समझाकर दिन काट रहे है , वही दूसरी तरफ फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद प्रशाशन राजस्व रिकार्ड खोजने में लगा हैं .
ग्राम कोदवा के छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बेंक में ग्राम ओटेबंद के किसानो पर निकाले गए क़र्ज़ का मामला बेमेतरा थाने में दर्ज किया गए तब उसकी चर्चा शुरू हुई . पूरे प्रकरण में गाँव के लोग कभी बेंक नहीं गए और न कभी किसी कागजात पर हस्ताक्षर ही किया .सबसे बड़ी बात यह भी है की उनमे से कुछ लोग नाबालिग है और कुछ लोग खाने कमाने गाँव से बहार गए थे वे गाँव में थे ही नहीं , कई लोगो के पास तो जमीन ही नहीं है ,लेकिन फिर सभी कर्ज़दार हो गए .

जमींन ही नहीं तो कैसे लेंगे क़र्ज़ .

गाँव के लाला राम साहू ,बेदराम साहू ,कोमल साहू ,लखन साहू शिव सिंह , इंद्र वर्मा ,ने बताया की उनके पास जमीन ही नहीं है ,तो क़र्ज़ के लिया कैसे बेंक जायेंगे.किसान लखन वर्मा ने बताया की उनके दो बेटों शिव सिंह वर्मा और इंद्र वर्मा के नाम क़र्ज़ बताया गया है जबकि खेम्लाला नाबालिग है ,उन्होंने कहा की हमारी ततीन पीढ़ी कर्ज़दार बता दी गई ,ऐसे किसानो को भी कर्जदार बनाया गया है जो खाने कमाने बहार चले गए हैं .
ग्रामीणों ने बताया की क़र्ज़ की बात सुनकर कई घरो में चूल्हा तक नहीं जला .
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