कला साहित्य एवं संस्कृति

झारखंड सरकार के द्वारा किसी भी किताब को अपने राजनैतिक हितसाधन के लिए प्रतिबंधित किये जाने की घोर निंदा करते हैं .

मध्यप्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ
और जनवादी लेखक संघ , मध्यप्रदेश
का संयुक्त बयान

निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन
चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले

झारखंड सरकार ने अंग्रेजी के कथाकार सोभेन्द्र शेखर हंसदा के कहानी संग्रह ” आदिवासी विल नॉट डांस ” को अपने एक आदेश से प्रतिबंधित कर दिया है ।

तानाशाही की अपनी सनक में किसी भी सरकारी तंत्र के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने की ऐसी कोई भी कोशिश असंवैधानिक है । और इसीलिए यह निंदनीय और असहनीय भी है ।

अपने राजनैतिक तुष्टिकरण के लिए हमारे देश की सरकारें पहले भी ऐसे कदम उठाती रही हैं । तमिलनाडु में ठीक ऐसा ही उदाहरण अभी पिछले ही दिनों में घटित हुआ है । लेकिन हर बार इसी देश की न्यायपालिका ने ऐसे प्रतिबंधों को उलट भी दिया है । हमें विश्वास है कि लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हमारी न्यायपालिका हमेशा खड़ी रहेगी ।

लेकिन यह बात बेहद कष्टकर है कि हमारे देश में न्यायपालिका के सुस्थापित निर्णयों के बावजूद लेखकों को अब आये दिन अपनी सुपरिभाषित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए न्यायिक संघर्ष भी करना पड़ रहा है ।

हम झारखंड सरकार के द्वारा किसी भी किताब को अपने राजनैतिक हितसाधन के लिए प्रतिबंधित किये जाने की घोर निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि वह प्रतिबंध के इस आदेश को तत्काल निरस्त करे । हम, इस महादेश की सभी भाषाओं के सभी लेखक , अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए हर तरह के जायज प्रतिरोध और संघर्ष का उद्घोष करते हुए फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की इन पंक्तियों को पूरी आस्था के साथ दोहराते हैं :-

यूं ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उनकी रस्म नई है , न अपनी रीत नई
यूं ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग के फूल
न उनकी हार नई है , न अपनी जीत नई

राजेन्द्र शर्मा , अध्यक्ष प्रलेस, मध्यप्रदेश
राजेश जोशी, अध्यक्ष जलेस मध्यप्रदेश

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