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छत्तीसगढ़ को तत्काल अकालग्रस्त घोषित किया जाये, शासकीय आयोजनों पर रोक लगे, बोनस की चार वर्ष राशि को सूखा राहत के साथ समायोजित किया जाये : छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

रायपुर 13.8.17

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के राज्य संयोजक मण्डल की बैठक में सूखा की स्थिति एवम किसानों के आंदोलन की समीक्षा की गई .

आज की बैठक में प्रदेश के विभिन क्षेत्रों और संगठनों से उपस्थित किसान नेताओं ने बताया कि छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण सूखा पड़ गया है । प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये राज्य संयोजक मण्डल सदस्यों रमाकान्त बंजारे राजनांदगांव, गिरधर मढ़रिया दुर्ग, पुरुषोत्तम चन्द्राकर धमतरी, तेजराम विद्रोही गरियाबंद, आलोक शुक्ल अंबिकापुर, द्वारिका साहू, आरंग, रूपन चन्द्राकर नया रायपुर, पप्पू कोसरे, लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर, पारसनाथ साहू, वीरेंद्र पांडे, डॉ संकेत ठाकुर मदन साहू, पुष्पा परते, देवेंद्र यदु, ने जानकारी दी कि उनकेे क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण खेती की स्थिति  गम्भीर हो गई है । धान के साथ साथ सोयाबीन, उड़द, अरहर की भी खेती कम वर्षा के कारण बर्बाद हो गईहै । दुर्ग जिले में बोरवेल भी सूखने लगे है तो राजनांन्दगाव में किसान अपने खेतों को मवेशी चराने के लिये छोड़ने लगे है ।  गांव के बुजुर्गों का कहना है कि भयंकर अकाल की ऐसी स्थिति सन 1965 के बाद इस वर्ष पहली बार देखने को मिल रहीहै ।

किसान महासंघ का निर्णय

अकाल की भयावह स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करते हुए राहत कार्य प्रारम्भ किया जाये जिसमे कृषि को मनरेगा में शामिल करते हुए किसानों और मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जाये ।

समस्त शासकीय आयोजनों रमन सिंह के 5000 दिन, राज्योत्सव, उद्घाटन, महोत्सव, मेला आदि पर रोक लगायी जाये ।

किसानों के चार वर्ष के धान का बोनस के रु 300 प्रति क्विंटल को 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से रु 4500 प्रति एकड़ तय करते हुए इस वर्ष किसानों को रु 18000 प्रति एकड़ बोनस राशि को सूखा राहत के तहत उपलब्ध कराई जाये ।

भयंकर सूखा के चलते किसानों की समस्याओं और समाधान पर चर्चा के लिये विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र इसी माह आयोजित किया जाये।

किसान महासंघ ने तय किया है कि बोनस, कर्ज माफी, मुफ्त बिजली, लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य आदि मांगो को लेकर विधायकों का घेराव जारी रहेगा । अगस्त माह में बोनस बइठका के माध्यम से घेराव और विधायकों – सांसदों को गांव नहीं घुसने देने  ,कि निर्णय लिया गया

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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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