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अरपा को टेम्स या चौपाटी न बनाये ,अरपा को अरपा रहने दें. अरपा जीवन यात्रा कल लमेर पहुची ..मिल रहा है भारी जन समर्थन .

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12 अगस्त 17 लमेर से

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7 अगस्त से निकली अरपा जीवन यात्रा, मंगला से लोखंडी ,तुरकाडीह ,निरतु से होती हुई आज लमेर गाँव पहुची .यात्रा में भारी उत्साह है ग्रामीणों का बडा जनसमर्थन मिल रहा है .लोग आ रहे है तरह तरह के फलदार पोधे लगा रहे है ,अरपा के किनारे बीज छिडक रहे है ,शाम को चौपाल या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बैठकर कह सुन रहे है और लोक कलाकार झड़ी राम साहू जी का चिकारा सुन रहे हैं ,गाँव से ही ढपली ,ढोलक और हारमोनियम आ जाती है और बड़ा आनंद का माहोल बन जाता है
और हाँ बिलासपुर के सस्कृंतकर्मी अजय बाटवे की बांसुरी लगातार यात्रा में मधुर गीत छेड रही है .

जब हम लोग लमेर पहुचे तब ट्रेक्टर से फलदार पोधे उतरने में लगे थे इस यात्रा की पहल करने वाले प्रथमेश मिश्रा , और अजय बाटवे , ग्रामीण पोधों को ले जा रहे थे ,प्रथमेश बता रहे थे कि सुबह अरपा के किनारे बबूल , सुबबूल और बड के बीज छिडकने के लिये बडी संख्या में लोग शामिल थे . यात्रा का रूटीन बताते हुए उन्होंने कहा की सुबह बीज छिडकाव ,दोपहर और शाम की पोधे लगाना और रात को कहीं बैठकर अरपा स्रोतों की सुरक्षा , जंगल को बचाने और पोधारोपण की बातें करना और उनकी सुनना ,यही प्रमुख कार्य है .

कल यह यात्रा निरतू में थी तो वहां के छेदी बरेठ की कहानी बताते हुयें उन्होंने कहा की बरेठ जी जीवट व्यक्ति है ,वे हर साल गाँव और नदी किनारे पोधे लगाते है और पेड बनने तक उसकी रक्षा भी करते है ,वे उन पोधों को लगातार पानी दे रहे है और बड़े होने तक कटीली झाडझकड से उसकी रक्षा मे रहते है . बरेठ जी ने अभी तक करीब पचास पेड खड़े कर दिये ,और तो और रोज सुबह प्रभात फेरी भी निकाल रहे है .इस यात्रा में वे बढचढ कर शामिल भी है .
शाम करीब 7 बजे गाँव में ही दिघ्र्स्कर बाडे के सामने परछी में गाँव के लोग जुड़े ,आज के मुख्य वक्ता नन्द कश्यप ने अपने सम्बोधन में कहा की अरपा को टेम्स या चौपाटी बनने से रोकिये . उन्होंने कहा कि पेड़ों पर बहुत रिसर्च हुआ है और यह पाया कि पेड़ों का अपना समाज होता है जहाँ वे एक दुसरे के साथ सामजस्य बिठाकर काम करते है ,कोई भी वृक्ष आयसोलेशन में नही पनप सकता ,आपने देखा होगा की वन में पोधा अपने आप तेजी से बढने लगता है लेकिन वही पोधा हमारे घरो में ठीक से नही बढता ,किसी भी वृक्ष को काटकर पेड लगाना उसका वुक्लप विकल्प नही हो सकता. नदिया रहेगी वन रहेंगे तब ही हमारी सभ्यता जीवित है.

प्रथमेश मिश्रा ने यात्रा के उद्देश्य को समझाया और कहा की हम सब की जिम्मेदारी भी है कि अरपा बची रहे ,इसके लिए हमे उसके आसपास पोधे लगाना और उसकी रक्षा करना जरुरी है .॥
सालिगराम कैवर्त ने कहा कि हमारे जल स्रोत सूख रहे है,पहले हमारी खेती कुंओ के भरोसे हो जाती थी लेकिन अब बहुत मुश्किल हो गई है .हमारा जीवन अरपा पर ही निर्भर था अब जैसे जैसे अरपा में पानी कम हो रहा है हमारा जीवन संकट में पडता जा रहा है .
बैठक के पहले झडीराम जी ने चिकारा से गीत सुना कर समाँ बांध दिया अजय बाटवे की मुरली के बाद अगले दिन के कर्यक्रम की रूपरेख रखी गई .
बिलासपुर से नन्द कश्यप , नीलोतपल शुक्ला , प्रियंका शुक्ला , दीपान्शु और लाखन सिंह शामिल रहे .
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