मजदूर राजनीति

अभिव्यक्ति की आजादी पर नकेल कसने के खिलाफ संगठनों ने खोला मोर्चा.

*कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समक्ष दर्ज कराया आपत्ति*

*प्रशासन को दो टूक आगाह किया, प्रतिरोध के अधिकार पर बंदिश स्वीकार नहीं*

1 अगस्त 17 भिलाई 

30 जुलाई को सुपेला घड़ी चौक में धरना देने वाले कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा बलपूर्वक खदेड़ने और घरना देने से रोके जाने को जिले के अनेक संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की और विरोध प्रदर्शन की संवैधानिक अधिकार पर प्रशासन की बंदिश मानकर गंभीरता से लिया है, उल्लेखनीय है कि अब तक चली आ रही परम्पराओं का पालन करते हुए धरना देने के चार दिन पूर्व ही एसडीएम भिलाई को लिखित में सूचना दी गई थी, प्रशासन द्वारा धरना की अनुमति न दिये जाने की कोई पूर्व सूचना आयोजक संगठन को नहीं दी गई थी लिहाजा संगठन के कार्यकर्ता निर्धारित तिथि और समय पर धरना स्थल पहुंचे किंतु पुलिस द्वारा धरना शुरू होने से पहले ही संगठन के कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक खदेड़ दिया गया.

पुलिस की इस कार्यवाही से आक्रोशित अनेक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आज पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र मिश्रा और कलेक्टर उमेश अग्रवाल से भेंट करके घटना के प्रति अपनी आपत्ति दर्ज कराया और दो टूक कहा कि उनका संगठन इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर हमला मानता है जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए,

कलेक्टर ने जहां घटना की जांच कराकर निर्णय लेने की बात कही वहीं पुलिस अधीक्षक ने दो टूक जवाब दिया कि दुर्ग के मानस भवन क्षेत्र को छोड़कर जिले के किसी भी अन्य स्थानों पर धरना प्रदर्शन को कलेक्टर के आदेश से प्रतिबंध लगाया गया है अतः पुलिस द्वारा कलेक्टर के आदेश का पालन करते हुए किसी को भी अन्य स्थानों पर धरना प्रदर्शन नहीं करने दिया जायेगा.

संगठनों के संयुक्त मंच द्वारा कलेक्टर और एसपी को लिखित में आपत्ति दर्ज कराई गई है, प्रतिनिधि मंडल में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष राजकुमार गुप्त, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति के बंशी साहू, नव जनवादी लोक मंच के गोरखनाथ सिंह, लोकतांत्रिक इस्पात एवं इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन के सुरेंद्र मोहंती, लोईमू के आर एन यादव, एक्टू के जे पी नायर, प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ के उत्तरा, विमला, शिवेंद्र, जन आधारित पावर प्लांट मजदूर यूनियन के कलादास डहरिया और एस यू सी आई के आत्माराम साहू सहित बड़ी संख्या में मजदूर शामिल थे.

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