अदालत छत्तीसगढ़ मानव अधिकार विज्ञप्ति

वकीलों को आर्थिक मदद दो : छत्तीसगढ़ बार कौंसिल ने दी आंदोलन की चेतावनी

रायपुर। बार कौंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ ने कोरोना महामारी और लॉक डाउन के चलते पिछले छह माह से न्यायालय बंद होने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे अधिवक्ताओं को आर्थिक मदद करने और उनके कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपयों के कार्पस फंड (समग्र निधि) की स्थापना करने की मांग राज्य शासन से की है। बार कौंसिल ने चेतावनी दी है कि यदि कौंसिल की मांग पर ध्यान नही दिया गया, तो पूरे प्रदेश के अधिवक्ता आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

छत्तीसगढ़ बार कौंसिल के अध्यक्ष प्रभाकर सिंह चंदेल द्वारा इस संबंध में एक खुला पत्र मुख्यमंत्री और विधि मंत्री को लिखा गया है। इस पत्र की कॉपी उन्होंने मीडिया के लिए जारी की है। अपने पत्र में अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जीवन यापन का संकट पैदा होने का जिक्र करते हुए उन्होंने मांग की है कि वर्ष 2010 के बाद कौंसिल में पंजीकृत सभी अधिवक्ताओं को मार्च 2020 से 10000 रुपये प्रति माह तथा इसके पूर्व पंजीकृत क्रीमी लेयर में न आने वाले सभी अधिवक्ताओं को 15000 रुपये प्रति माह के हिसाब से आर्थिक मदद दी जाए, कोरोना का शिकार होने पर उन्हें मुफ्त चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक अधिवक्ता-परिवारों का 50 लाख रुपये का बीमा कराया जाए।

अपने पत्र में कौंसिल अध्यक्ष चंदेल ने इस बात का उल्लेख किया है कि न्यासी समिति में राज्य सरकार के प्रतिनिधि होने के नाते अधिवक्ताओं के हित एवं कल्याण की देखरेख करने की जिम्मेदारी सरकार की है। लेकिन इस ओर बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद भी राज्य सरकार उदासीन है। ऐसी स्थिति में अधिवक्ताओं के सामने आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता।

चंदेल ने बताया कि अधिवक्ताओं को आर्थिक मदद करने के लिए आंध्रप्रदेश शासन द्वारा 100 करोड़ रुपये, दिल्ली सरकार द्वारा 50 करोड़ और तेलंगाना सरकार द्वारा 25 करोड़ रुपये संबंधित राज्यों की बार कौंसिल को आबंटित किए गए हैं। इसी प्रकार, केरल सरकार ने उपार्जित न्याय शुल्क के 1% का प्रावधान अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए किया है। उन्होंने अपने पत्र में अपेक्षा की है कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी तरह तत्काल कदम उठाएगी। इसी के साथ सरकार को बार कौंसिल ने सुझाव दिया है कि 200 करोड़ रुपयों की प्रारंभिक राशि से एक समग्र निधि की स्थापना की जाए, जिसके ब्याज से अधिवक्ताओं को आवासीय एवं व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है।

Related posts

बिलासपुर : मनोरोग चिकित्सक के खिलाफ उसी विभाग में कार्यरत महिला डाक्टर ने लगाये गंभीर यौन प्रताड़ना के आरोप. पुलिस और अन्य अधिकारियों को भेजी शिकायत.

News Desk

एबीवीपी_द्वारा_जेएनयू_परिसर_में_भयानक_पैमाने_पर_हिंसा – साईं बालाजी ,अध्यक्ष जेएनयू

News Desk

हम किसी भी कीमत पर अभ्यारण्य से बाहर नही जाना चाहते _बारनवापारा अभ्यारण्य के 24 गांव के ग्रामीण –

News Desk