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GGU: संघी VC वापस जाओ के लगे नारे, NSUI ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

गुरुघासीदास सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी बिलासपुर के छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी कैम्पस में घुसकर ABVP के गुण्डों ने छात्रों को बुरी तरह पीटा और होने वाले छात्रसंघ चुनाव में नामांकन न दाखिल करने की धमकी दी. Abvp द्वारा यूनिवर्सिटि के अंदर छत्रों को मारने और गाली गलौच करने का वीडियो भी सामने आया है। cgbasket को इससे जुड़ी कुछ आडिओ रिकॉर्डिंग भी प्राप्त हुई हैं।

https://youtu.be/0ibEOnEvwVs

GGU की ही एक छत्र ने बताया कि इन हमलावारों ने उसका पीछा और उसपर एसिड फेंकने की धमकी दी। छत्र ने घटना की जानकारी प्रशासन को लिखित मे दी है।

GGU के छात्र सचिन ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव के सारे नामांकन जमा हो जाने के बाद 2 से 3 दिनों के भीतर उन नामों की स्क्रूटनी होती है यदि कोई नामांकन गलत भरा गया हो तो उसे निरस्त कर उम्मीदवारों की फाइनल सूची जारी कि जाती है। 17 जनवरी को सूची जारी होनी थी अमूमन शाम 7-8 बजे तक ये काम पूरा हो जाता है। पर 17 तारीख को रात 2 बजे तक छात्र सूची के आ जाने का इंतज़ार करते रहे। रात 2 बजे कहा गया कि सूचि कल आएगी।

दूसरे दिन सुबह छत्रों को जानकारी मिली कि सूची जारी नहीं की गई है बल्कि चुनाव ही रीशेड्यूल कर दिया गया है।

स्टूडेंट काउंसिल एक्ट के तहत एडमिशन प्रक्रिया के बाद 45 दिनों के भीतर चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जानी चाहिए। और जिस दिन चुनाव शेड्यूल जारी होता है उसके 10 दिन के भीतर चुनाव हो जाना चाहिए। GGU  में 15 जनवरी को चुनाव शेड्यूल जारी हुआ था । इस हिसाब से 25 जनवरी तक चुनाव हो जाने थे। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 तारीख़ को दुबारा चुनाव शेड्यूल जारी कर दिया। सचिन ने बताया कि चुनाव रेशेड्यूल करना स्टूडेंट काउंसिल के नियमों के खिलाफ है।

GGU प्रशासन ने बताया कि नामांकन फॉर्म कि गिनती मे गड़बड़ी हो जाने की वजह से चुनाव दोबारा कराए जा रहे हैं।

छात्रसंघ चुनाव मे दो तरह के नामांकन फॉर्म भरे जाते हैं

एक होता है नोमिनेटेड नॉमिनेशन फॉर्म। इसमे स्पोर्ट्स या एक्स्ट्रा कैरीकुलम एक्टिविटी जे जुड़े छात्र नामांकन भरते हैं। इन नामांकनों का कोई प्रस्तावक नहीं होता। इनके लिए वोटिंग भी नहीं होती।

और दूसरा होता है इलेक्टेड नॉमिनेशन फॉर्म। इसके तहत नामांकन भरने वालों के दो प्रस्तावक होते हैं। अलग अलग पदों के लिए फॉर्म भरे जाते हैं और दूसरे छात्र इन्हें वोट देकर जिताते या हराते हैं।

ये दोनों फॉर्म दिखने मे अलग होते हैं, इनमें अंतर किया जा सकता है। GGU प्रशासन ने कहा कि ये दोनों फॉर्म आपस मे मिक्स हो गए हैं इस कारण इन्हें गिना नहीं जा सका इसीलिए चुनाव रेशेड्यूल किए जा रहे हैं। छत्रों ने आरोप लगाया है कि काउंटिंग में गड़बड़ी का बहाना बनाकर जानबूझकर चुनाव रद्द किया गया है।

नियमतः काउंटिंग मे गड़बड़ी होने पर मुख्य चुनाव अधिकारी इलेक्शन अरजेंट का नोटिस जारी करता है। परंतु यहाँ चुनाव रेशेड्यूल का नोटिस जारी किया गया। छत्रों ने इसका विरोध किया और आरोप लगाया कि ये लिंगदोह कमेटी की अनुशंसाओं के अनुसार बने स्टूडेंट काउंसिल एक्ट के खिलाफ है।

आगे की घटनाओं के पहले लिंगदोह कमेटी के बारे मे भी थोड़ा जान लेते हैं

पूरे देश में छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए लिंगदोह समिति की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। केरल के एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिए थे कि देश भर की शिक्षण संस्थाओं में छात्रसंघ चुनावों के बारे में दिशा-निर्देश तय करने के बाबत अपनी राय दें। न्यायालय ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जे.एम. लिंगदोह की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के निर्देश दिए थे। कमेटी ने मई 2006 में अपनी रिपोर्ट दे दी थी।

छात्रसंघ चुनाव के बारे में लिंगदोह कमेटी की प्रमुख सिफारिशें :-

उम्मीदवार की उपस्थिति न्यूनतम 75 फीसदी हो। न्यूनतम अंक प्रतिशत भी तय हो तथा वह नियमित विद्यार्थी हो।

प्रत्याशी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नह हो।

प्रत्याशी का चुनाव खर्च 5 हजार से ज्यादा न हो।

परिणाम की घोषणा के दो सप्ताह के भीतर उम्मीदवार खर्च के ब्योरे की अपनी ऑडिटेड रिपोर्ट विश्वविद्यालय/कॉलेज प्रशासन को सौंपेगा।

प्रत्याशी ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा, जो धर्म, जाति, समुदाय, भाषाई आधारित समूहों या अन्य समूहों के बीच वैमनस्यता और तनाव बढ़ाने वाला हो।

जाति और समुदाय के आधार पर वोट की अपील नहीं की जाएगी।

उम्मीदवार किसी दूसरे प्रत्याशी के निजी जीवन से सम्बन्धित पहलुओं पर आलोचना न करे। उसकी नीतियों की आलोचना की जा सकती है।

उम्मीदवार वोटरों को लुभाने के लिए रिश्वत या कोई अन्य प्रलोभन, धमकी नहीं देगा। किसी भी तरह का भ्रष्ट आचरण नहीं करेगा।

छात्रसंघ चुनाव के दौरान प्रिंटेड प्रचार सामग्री काम नहीं ली जाएगी। विश्वविद्यालय/कॉलेज की ओर से चिह्नित स्थानों पर सिर्फ हस्त निर्मित प्रचार सामग्री ही लगाई जा सकेगी।

विश्वविद्यालय/कॉलेज कैम्पस के बाहर कोई प्रचार गतिविधि जैसे जुलूस, मीटिंग नहीं किए जा सकेंगे।

कोई भी प्रत्याशी किसी भी उद्देश्य से विवि/कॉलेज की किसी भी सम्पत्ति को विरूपित नहीं करेगा।

चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले छात्र व प्रत्याशी को चुनाव से वंचित किया जा सकता है।

चुनाव प्रचार के लिए 10 दिन से अधिक का समय नहीं होगा।

किसी छात्र को दुबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा, चाहे जीते या हारे।

चुनाव प्रचार में वाहन, जानवर या लाउड स्पीकर का प्रयोग प्रतिबंधित है।

चुनाव सम्बन्धी शिकायतों के निपटारे के लिए हर विवि/कॉलेज में एक ग्रिवेन्स कमेटी बनाई जाएगी, जो आचार संहिता उल्लंघन के मामलों की सुनवाई कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगी।

अब GGU  की घटनाओं पर वापस लौटते हैं

लिंगदोह कमेटी की सिफ़ारिशों के अनुसार  चुनाव प्रचार में वाहन, जानवर या लाउड स्पीकर का प्रयोग प्रतिबंधित है, वोट के लिए लालच देना या धमकाना भी प्रतिबंधित है। लेकिन इन नियमों का खुल्ला उल्लंघन GGU  मे हुआ। छत्रों ने बताया कि JOIN  ABVP  लिखी गाडियाँ (कार) परिसर मे लगातार लगभग 5 दिनों तक आती रहीं। विश्वविद्यालय के छत्रों ने इसका विरोध भी किया और प्रशासन से मांग की के बाहरी लोगों का प्रवेश बन्द किया जाए। पर हमेशा की तरह वीसी अंजिला गुप्ता ने छत्रों से मिलने से ही इंकार कर दिया।

बाहरी लोगों को मिल रही इस शह का असर ये हुआ कि 23 जनवरी की दोपहर UTD  कैंपस में ABVP  समर्थित संघर्ष पैनल के अध्यक्ष अमन(विश्वविद्यालय के छात्र) और 5 अन्य पदाधिकारियों(बाहरी लोग) ने ब्रदरहुड पैनल के छात्र सचिन गुप्ता, जो चुनाव मे प्रत्याशी भी हैं, के साथ मारपीट की और नामांकन के पर्चे फाड़े। कुछ अन्य छत्रों के साथ भी मारपीट हुई जिसका वीडियो भी सामने आया है। 

ये मारपीट होती रही और VC  महोदया के कानों मे जूं तक न रेंगी। न उन्होने पुलिस को बुलाया न परिसर में मौजूद गार्ड्स को कार्रवाई के निर्देश दिए। और ऐसा करके उन्होने अपने ऊपर लगे “संघ समर्थक” के आरोपों को पुख्ता कर दिया।

UTD कैंपस मे हुई इस मारपीट की घटना का छत्रों ने विरोध किया और VC महोदया से मांग की के वे मारपीट मे शामिल गुंडों के खिलाफ़ FIR दर्ज कराएं। परंतु VC  ने छत्रों से मिलना ही ज़रूरी नहीं समझा FIR कराना तो दूर की बात है। मजबूरन छत्रों ने खुद ही जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई।

छात्रों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ़ दो FIR दर्ज कराई गई हैं। छात्र सचिन गुप्ता द्वारा दर्ज FIR में ABVP  के सन्नी केसरी, रौनक केसरी, लोकेश केसरी, बिका सोनकर, अमन कुमार और मोरध्वज पैकरा पर जुर्म दर्ज हुआ है। दूसरी FIR छात्र अभिषेक शर्मा ने दर्ज कराई है। अभिषेक चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र हैं, वो अपने भाई को छोडने GGU आए हुआ था। इस FIR  में यशवर्धन, सन्नी केसरी, रौनक केसरी, लोकेश केसरी, बिका सोनकर, अमन कुमार और मोरध्वज पैकरा आरोपी हैं।  

पुलिस ने जब cctv  फुटेज निकालने की बात की तो पता चला कि विश्वविद्यालय के अधिकांश cctv कैमरे खराब हैं। मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश करने वाले छात्रों के मोबाइल फोन गुंडों के द्वारा तोड़ दिए जाने की बात भी काही जा रही है। लगभग चार छात्र ज़ख्मी हुए और कई घंटों तक ये हंगामा चलता रहा। हालांकि कुछ छात्रों ने चुपके से मोबाइल पर मारपीट के वीडियो रेकॉर्ड कर लिए। मारपीट करने वालों की पहचान इस विडियो के ज़रिये की जा सकती है।

यदि VC महोदया कोई कदम उठा लेतीं तो कैंपस मे घुस आए लोगों को उसी समय आसानी से रोका और पकड़ा जा सकता था। परंतु सबकुछ चुपचाप होने दिया गया। विश्वविद्यालय के एक सुरक्षागार्ड ने कहा “हम किसी को रोकते तो हमारी नौकरी चली जाती”।

आपको बता दें कि गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के छत्रों ने हमसे कहा कि VC अंजिला गुप्ता RSS  की मानसिकता से प्रभावित हैं और विश्वविद्यालय के अंदर RSS की विचारधारा को फैलाने वाले कार्य करती रहती हैं। छत्रों ने ये भी जानकारी दी कि बहुत सी समस्याओं के लिए छत्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन दिए हैं। परंतु VC  महोदया न कभी छत्रों से मिलती हैं न उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई कदम उठाती हैं।

छत्रों ने ये भी कहा कि विश्वविद्यालय में संघ से जुड़े लोगों को वक्ताओं के रूप में बुलाकर उनके भाषण कराए जाते हैं। छत्रों मे वैज्ञानिक चेतना जगाने के बजाए धार्मिक कहानियों को इतिहास की तरह पेश किया जाता है।

NSUI और कॉंग्रेस के पदाधिकारियों ने किया घेराव, लगाए सांघी VC  वापस जाओ के नारे

28 जनवरी की दोपहर NSUI और कॉंग्रेस के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का घेराव किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। विश्वविद्यालय मे हो रही भर्ती प्रक्रिया की गड़बड़ियों और अन्य घोटालों की जांच की मांग इस ज्ञापन मे की गई है। जमकर नारेबाजी की गई। आरएसएस मुर्दाबाद और सांघी VC वापस जाओ के नारे लगाए गए। जानकारी मिली कि बगैर किसी को प्रभारी नियुक्त किए VC महोदया कैंपस से नदारद हैं।

अधिवक्ता प्रियंका शुक्ल ने छात्रों का किया समर्थन

छात्रों के इस आंदोलन का समर्थन करने के लिए मानव अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला भी वहाँ मौजूद थीं।

https://youtu.be/5sYh_ML7K_g

अपने वक्तव्य में उन्होने कहा कि “इस मनमानी के खिलाफ़ छात्रों को अब वैचारिक आंदोलन करने की ज़रूरत है। वे देश के इतिहास के बारे मे जानें, झूता इतिहास परोसने वालों को जवाब दें, स्वतन्त्रता आंदोलन के नायकों को पढ़ें, छात्र जीवन मे उनके संघर्षों को जाने और आज विश्वविद्यालय में हो रहे घपले घोटाले और अनियमितताओं के खिलाफ़ निडर होकर शांतिपूर्ण आंदोलन करें”

इस प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री अटल श्रीवास्तव, ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी, महेंद्र व भावेन्द्र गंगोत्री, रवीद्र सिघ, nsui के आकाश शर्मा, लक्कि मिश्रा आदि छात्र नेता उपस्थित थे।

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