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छत्तीसगढ़ से किसानों का जत्था दिल्ली रवाना, किसान आंदोलन में होंगे शामिल

कोरबा। किसान विरोधी कानूनों की वापसी की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के साथ छत्तीसगढ़ के किसानों की एकजुटता व्यक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ किसान सभा का एक जत्था आज कोरबा जिला के किसान सभा अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर की अगुआई में रवाना हुआ। बांकीमोंगरा क्षेत्र के ग्रामीणों ने जबर्दस्त नारेबाजी के साथ किसान सभा का “हंसिया, हथौड़ा अंकित लाल झंडा” दिखाकर इस जत्थे को रवाना किया। इस जत्थे के कल दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यदि अगले कुछ दिनों में इन कानूनों को मोदी सरकार वापस लेने का फैसला नहीं करती, तो अन्य जिलों से भी किसानों के जत्थे भेजे जाने की योजना बनाई गई है। राजनांदगांव जिला किसान संघ सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के अन्य घटक संगठन भी अपने जत्थे दिल्ली भेज रहे हैं। ये जत्थे दिल्ली की सीमाओं पर अनिश्चितकाल के लिए धरने पर बैठे लाखों किसानों के विशाल समुद्र की बूंद बनेंगे।

उन्होंने बताया कि यह जत्था किसान संगठनों के साझे मोर्चे छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन और छत्तीसगढ़ किसान सभा व आदिवासी एकता महासभा द्वारा इस कानून के खिलाफ प्रदेश के गांव-गांव में चलाए जा रहे अभियान-आंदोलन की जानकारी देगा और अन्य राज्यों में चलाए जा रहे आंदोलन के स्वरूपों और इसके अनुभवों से शिक्षित होगा और छत्तीसगढ़ में भी इस आंदोलन को और तेज करने के लिए इसका उपयोग करेगा।

किसान सभा नेताओं ने इस देशव्यापी किसान आंदोलन के खिलाफ प्रांत और धर्म के आधार पर सांप्रदायिक और राजनैतिक दुष्प्रचार करने की संघ-भाजपा की कोशिशों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस देश के किसानों की न कोई जाति है, न धर्म। वे केवल मेहनतकश वर्ग के हैं और अपनी मेहनत का अधिकार सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में चाहते हैं। इसके लिए मोदी सरकार को कानून बनाना चाहिए, न कि मंडियों का निजीकरण करने, खाद्यान्न की असीमित जमाखोरी की छूट देने और ठेका खेती के जरिये गरीब किसानों को बर्बाद करने का कानून। इन किसान और कृषि विरोधी कानूनों का इस देश की मेहनतकश जनता डटकर मुकाबला करेगी।

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