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EXCLUSIVE:फर्जी थी नुलकातोंग मुठभेड़, नक्सली बता कर पुलिस ने ली थी 15 आदिवासियों की जान. : तामेश्वर कुमार

ग्राउंड रिपोर्ट ,जनचौक 

, बुधवार , 22-08-2018

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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर/सुकमा। बीते 6 अगस्त को बस्तर संभाग के सुकमा जिले के अन्तर्गत कोंटा ब्लाक के नुलकातोंग में सुरक्षा बल के जवानों ने 15 कथित माओवादियों को मार गिराने का दावा किया था।घटनास्थल वाले गांवों में पहुंचने पर कुछ दूसरी ही तस्वीर सामने आ रही है। ग्रामीण इसे सिरे से खारिज कर फर्जी मुठभेड़ बता रहे हैं। जिसमें वो आम आदिवासी और निर्दोष ग्रामीणों को मारने की बात कह रहे हैं । 

नुलकातोंग कोंटा ब्लाक से 25 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए किसी भी प्रकार की सड़क नहीं है। जंगल के रास्ते नदी-नाले पार कर यहां पहुंचा जा सकता है। यह गांव प्रतिबंधित सलवा जुडूम का सताया हुआ गांव है। पूरे रास्ते नक्सलियों की मौजूदगी और वारदातें देखने को मिलती हैं। सड़क के रास्ते को नक्सलियों ने पेड़ काट कर रोक रखा है। बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल का नामोनिशान इस क्षेत्र में नहीं है। यहां तक इन क्षेत्रों के ग्रामीणों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड तक नहीं है। ग्रामीण वोट तक नहीं डालते हैं । नागरिक होने के सारे अधिकार छीन कर यहां आदिवासी ग्रामीणों को मार गिराया जा रहा है । 6 अगस्त को भी यही हुआ, 15 ग्रामीणों को नक्सल का तमगा लगा कर गोलियों से भून दिया गया। 

पुलिस मुठभेड़ का गवाह पेड़

आप को बता दें कि कोंटा ब्लाक के ग्राम गोमपाड़ से 6 ग्रामीण जिसमें सभी पुरुष थे। इनमें से एक के नाबालिग युवक होने की बात ग्रामीण कह रहे हैं। नुलकातोंग के 6 पुरुष थे। जिसमें से एक शादीशुदा है, बाकी 5 के नाबालिग होने की बात ग्रामीण कह रहे हैं। वेलपोच्चा, किन्दरपाड, ऐट्ठेगट्टा से एक-एक ग्रामीण पुरूष मौजूद थे। ये सभी गांव के ग्रामीण नुलकातोंग में खेत की लाड़ी ( झोपड़ी) में रुके हुए थे। गोमपाड़ के ग्रामीणों का नुलकातोंग आने का कारण ग्रामीण बताते हैं कि सुरक्षा बल डीआरजी, पुलिस के जवान लगातार 2 दिन से गोमपाड़ आ कर मार-पीट कर रहे थे। गोमपाड़ के ग्रामीण इसी डर के चलते भाग कर जंगल के रास्ते नुलकातोंग गांव आकर अपने रिश्तेदारों के यहां खाना खाकर खेत के झोपड़ी में सो गए। ऐसे ही वेलपोच्चा गांव के एक ग्रामीण का नुलकातोंग आने का कारण यह था कि यहां उनकी ससुराल है। किंदरपाट, ऐट्ठेगट्टा के दो ग्रामीण भी सुरक्षा बल के डर से गांव से आकर सब एक साथ उसी खेत की झोपड़ी में सोए हुए थे। दूधी बुधरी जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया वह सुबह रुके ग्रामीणों को पानी पहुंचाने गई थी। लेकिन पुलिस 6 अगस्त की सुबह 6 बजे लगभग पहुंची और अंधाधुंध फ़ायरिंग करना शुरू कर दिया। 

नुलकातोंग गांव की महिलाएं

गोमपाड़ के ग्रामीण बताते हैं कि 5 अगस्त को सुरक्षा बलों  के दहशत से लगभग 12 ग्रामीण जंगल की ओर निकल कर भाग गए थे। जिसमें गांव वाले नुलकातोंग में जाकर रूके हुए थे। गोमपाड़ में सुरक्षा बलों  के द्वारा नक्सली बता कर मारे गए ग्रामीणों में सोयम सीता, माडवी देवा, कडती हड़मा, सोयम चंद्रा, माडवी नंदा, कडती आयता हैं। वहीं वहां मौजूद 6 ग्रामीण फ़ायरिंग के दौरान जान बचा कर भागने में सफल रहे। 

गोमपाड़ के ग्रामीण सुक्का जो उस दिन घटना स्थल पर मौजूद थे और उस दिन उनका बेटा कडती आयाता मारा गया। कडती आयाता अभी 12 से 13 साल का था जो कोंटा पोटा कैबिन स्कूल में पड़ता था। अभी सुक्का घायल अवस्था में हैं। बताते हैं कि पुलिस आते ही फ़ायरिंग शुरू कर दी। सुक्का बताते हैं कि गोमपाड़ के ग्रामीण सोयम चंद्रा जो कि गोमपाड़ के वार्ड पंच हैं उसने हाथ उठाते हुए कहा कि मैं गोमपाड़ का सरपंच हूं गोली मत चलाओ लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और लगातार फ़ायरिंग करती रही और सोयम चंद्रा मारा गया। झोपड़ी में मौजूद सभी ग्रामीण इधर उधर भागने लगे। कई ग्रामीण सुबह का समय होने के चलते पास के नाले में फ्रेश होने गए थे, 15 ग्रामीण पुलिस की गोली का शिकार हो गए और अपनी जान गंवा बैठे।

आधे ग्रामीण जंगल की ओर भाग गए। सुक्का के घुटने के नीचे गोली छूते हुए निकली है, जिससे वह लहूलुहान अवस्था में भागने लगे, सुरक्षा बलों के जवान उनके खून के निशान को देखते हुए पीछा करते रहे, सुक्का बताते हैं कि घायल हालात में उसने एक पानी से भरा नाला पार किया जिससे खून के निशान हट गए और सुक्का बच गए।

नुलकातोंग के चश्मदीद ग्रामीण कहते हैं कि सोयम चंद्रा को पहले गोली मारी गयी फिर फावड़ा से उसके सिर को कुचला गया। घटनास्थल पर सिर का हिस्सा भी गिरा हुआ है । पुलिस ने जब इन लाशों को पेश किया तो इनका शरीर पूरी तरह पॉलीथिन से बांध दिया गया था। 

मुठभेड़ में मारे गए दो नाबालिग की फोटो

नुलकातोंग गांव से भी 6 ग्रामीण मारे गए हैं, जिसमें से ग्रामीण 5 लोगों को नाबालिग बता रहे हैं । “नुलकातोंग गांव की मुचाकी सुकड़ी कहती हैं 2006-07 में सलवा जुडूम के समय उनके पति को सलवा जुडूम वालों ने गोली मार दिया था। अभी उनके बेटे मुचाकी मुक्का को सुरक्षा बल ने गोली मार दिया है।” उनके घर में अब कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है। नुलकातोंग में मारे गए ग्रामीणों में सोढ़ी प्रभु, मड़कम लखमा, ताती हुंगा, मुचाकी हिड़मा, मुचाकी देवा, मुचाकी मुक्का मारे गए। ताती हुंगा शादीशुदा हैं और बाकी 5 नाबालिग हैं। सुरक्षा बल ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया जिसमें से आंदा, लखमा को छोड़ दिया गया। दूधी बुधरी और मड़कम देवा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है । दूधी बुधरी को भी गोली लगी हुई है और घायल अवस्था में  हैं। बहरहाल आंदा, लखमा भी गांव में मौजूद नहीं थे डर के चलते गांव छोड़ कर जा चुके थे।

मुठभेड़ में मारे गए नाबालिग का दस्तावेज

नुलकातोंग की महिलाओं ने बताया कि पुलिस के फ़ायरिंग की आवाज सुनकर महिलाएं घटना स्थल की ओर भाग कर गई तो सारी महिलाओं को बंदूक के बट से मारा गया। एक गर्भवती महिला ने बताया कि उसको पुलिस ने बेहरमी से पीटा है तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ मार-पीट किया है। आप को बता दें कि-

जिला सुरक्षा बल (DRG)और पुलिस द्वारा ऑपरेशन मानसून के नाम से 15 कथित माओवादी मारने का दावा करती है। 16 हथियारों के बरामदी का भी दावा करती है, जिसमें से मड़कम देवा को 5 लाख का ईनामी कथित नक्सली भी बता रही है, जिसे गिरफ्तार किया गया है। लेकिन ग्रामीण इसे फर्जी बता रहे हैं। आस-पास लगभग 10 से भी ज्यादा गांवो में सुरक्षा बलों का दहशत-ख़ौफ़ के बीच ग्रामीण जी रहे हैं। सुरक्षा बलों के गस्त में आने के खबर से ही ग्रामीण गांव छोड़ कर भाग जाते हैं।

गोमपाड़ का एक युवक कहता है कि पुलिस कहती है हमारे पास हथियार था! हमारे पास कहां से हथियार रहेगा? किसान, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों, महिलाओं सब को मार रही है। खेती बाड़ी करते रहते हैं सुरक्षा बलों को पूछ के सीधा रास्ता जाना चाहिए न, हमें मारते क्यों हैं ? नुलकातोंद में हमारे गांव के लोगों को मार दिए। 

पूरे मामले को लेकर सोनी सोरी कहती हैं कि इस समय जिला सुरक्षा बल वही है जो सलवा जुडूम के समय SPO थे जो आत्मसमर्पित नक्सली भी हैं। सोनी आगे कहती हैं कि आदिवासियों को मारने के लिए ही आदिवासियों को हथियार पकड़ाया जा रहा है। आस-पास के गांव में पुरुषों की संख्या ही घट गई है। 

सुकमा जिले के नुलकातोंग गांव की तस्वीर

आप को बता दें कि फर्जी मुठभेड़ कर आदिवासियों को मारने की गतिविधियां 2005 -06 में सलवा जुडूम के समय से ही निरंतर जारी हैं। सुकमा जिले के अधिकतर गांव इसकी चपेट में हैं जिसके कारण लगातार आदिवासियों को मारने की खबरें सुर्खियों में हैं। 

2009 से गोमपाड़ सुर्खियों में है। सुरक्षा बल लगातार इस गांव के लोगों को फर्जी मुठभेड़ में मारते रहते हैं। हाल ही में मड़कम हिड़मे को बलात्कार कर गोली मार दिया गया था जिसकी सुनवाई न्यायालय में लंबित है। ऐसे ही मछली पकड़ रही रामे को भी गोली मार दी गयी थी। इन सब घटनाओं से ग्रामीण बेहद हताश और ख़ौफ़ की जिंदगी जी रहे हैं । 

सुरक्षा बलों ने गांव से पुरुषों को खदेड़ दिया

नुलकातोंग  गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। गांव में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही बचे हैं । महिलाओं ने बताया कि सुरक्षा बलों ने गांव में आकर सारे पुरुषों को यह कह कर खदेड़ दिया है कि आज रात इस गांव में फ़ायरिंग होने वाली है रहोगे तो मारे जाओगे! सारे ग्रामीण गांव से भाग कर पास में स्थित गांव दुर्मा चले गए थे। महिलाओं ने यह भी बताया कि गांववासियों का चावल, दाल भी सुरक्षा बल के जवान उठा ले गए । 

पुलिस नहीं चाहती कि पत्रकार-मानवाधिकार कार्यकर्ता घटना स्थल जाएं

नुलकातोंग गांव स्थित घटना स्थल पर जाने से अनेक पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है । सोनी कहती हैं कि मैं 17 अगस्त को घटना स्थल जाने के लिए निकली थी, रास्ते में पुलिस ने जबरिया मुझसे पूछताछ की। जानबूझ कर रास्ते जाम करने की कोशिश करती है। जहां कहीं जाओ पुलिस पीछे-पीछे जाती है। घटना स्थल के लिए निकले पत्रकार आकाश पोयाम कहते हैं कि इस क्षेत्र में पत्रकार बताना सबसे बड़ी मूर्खता है। आपके पीछे सारे पुलिस, इंटेलिजेन्स को लगा दिया जाता है । हर संभव कोशिश की जाती है कि वह पहुंच न पाए।

वहीं, मुठभेड़ को चुनौती देने वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की गई है। जिस पर पहली सुनवाई 13 अगस्त को हुई है। सिविल लिबर्टी कमेटी के नारायण राव ने मामले में याचिका दायर की है। सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ करेगी। वहीं इस मामले में पुलिस के आला अधिकारियों से जब सवाल पूछे गए उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया। 

               (नुलकातोंग से लौट कर ….तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट)

 

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