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‘डॉ. इलीना सेन’ छत्तीसगढ़ की फूल भी और चिंगारी भी

डॉ इलीना सेन छत्तीसगढ़ के कई जनसंगठनों के साथ जुड़ी रहीं. इस प्रदेश के इतिहास में उनका एक विशेष स्थान है. इलीना का 9 अगस्त 2020 को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया था. PUCL छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मज़दूर कार्यकर्ता समिति), शहीद अस्पताल, जन स्वास्थ्य सहयोग, गुरू घासीदास सेवादार संघ और छत्तीसगढ़ के समस्त सहमना जन संगठनो ने डॉ इलीना सेन को श्रद्धांजलि देते हुए एक पर्चा जारी किया है. 

इस पर्चे में कहा गया है कि “भले ही डॉ इलीना सेन अब हमारे बीच नहीं रही परन्तु उनकी गहरी सोच, अनंत ऊर्जा और मुस्कुराते हुए, कठिनाइयों को सहने की क्षमता से कई पीढियाँ प्रभावित हुई हैं जो उनके संघर्षों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

इलीना (‘Dr. Illina Sen’) हम सबके लिए एक प्रेरणास्रोत रही हैं. सन 1980-81 के दौर में वे दल्लीराजहरा आईं और शंकर गुहा नियोगी के साथ खदान श्रमिकों के आंदोलन में शामील हुईं.  इलीना माइंस में काम करने वाले हज़ारों महिला मजदूरों को पितृसत्ता के दमन और बुराइयों के बारे में बताती समझाती जिससे महिलाओं में चेतना का विकास हुआ. उन्होंने ने महिलाओं के बीच में लगातार काम किया और उनके समर्थन से दल्लीराजहरा में शराब बंदी के लिए महिलाओं का इतना शक्तिशाली संगठन बना कि वहाँ पर पूर्ण शराब बंदी करवाने में कामयाबी मिली. इस महिला संगठन को संचालित करने के लिए मोहल्ला, बस्ती कमिटी का निर्माण हुआ और उसमें भी उन्होंने एक अहम भूमिका निभाई.

सांस्कृतिक कार्यों में इलीना का विशेष रुझान था. दल्लीराजहरा में इलीना के प्रोत्साहन से स्वर्गीय फागुराम यादव द्वारा नवा अंजोर” नामक लोक कला मंच का गठन हुआ जिसमे वीरनारायण सिंह के जीवन के बारे में गीत और नाटक दिखाए जाते थे. उन्होंने डॉ बिनायक सेन के साथ रूपांतर” संस्था शुरू की, जहाँ महिला साथी चंद्रिका महाभारत तर्ज में जनगीत प्रस्तुत करती थीं, और उनके साथ पूरी सांसकृतिक टीम जनता के बीच छत्तीसगढ़ी बोली, संगीत, पोशाक में कार्यक्रम करती थी, जो बहुत लोकप्रिय हुए. इलीना छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रच बस गई थीं.

इलीना के अंदर संगठन में रह कर कठिनाइयों से जूझने की खूब क्षमता थी और वे कई छत्तीसगढ़ी संगठनों के करीब रहीं. हर संघर्ष में इलीना शामिल होती थीं. उनकी सादगी भी कमाल की थी. छत्तीसगढ़ी लुगरा पहनती थी, और हाथ मे अइठी रहती थी. दल्लीराजहरा में मजदूरों के शहीद अस्पताल” को खड़ा करने के लिये उन्होंने सभी किस्म के काम किए. उसके निर्माण में ईँटें ढोने से लेकर अस्पताल के डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम भी किया. इलीना छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के साथ भी बेहद नजदीकी रूप से जुड़ी हुई थीं. महिला मुक्ति मोर्चा गठन करने में इलीना जी ने पहल कदमी की जिसमे हजारों महिलाओं जुड़ीं. 1984 में नियोगी जी के नेतृत्व में राजनादगांव में बंगाल काटन मिल्स के मजदूर आंदोलन में भी उन्होंने महिलाओं को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई. डॉ विनायक सेन और इलीना सेन ने रूपान्तर के माध्यम से नगरी सिहावा में स्वास्थ्य और शिक्षा का काम काफी लंबे समय तक किया. रायपुर के बीरगाँव क्षेत्र में मज़दूरों के बच्चों के लिए शहीद स्कूल को शुरू करने में भी उनका हाथ था.

इलीना पीयूसीएल की भी सदस्य थीं और बस्तर में सरकार द्वारा चलाए गए सलवा जुडूम अभियान की तीव्र आलोचक रहीं. उन्होंने सलवा जुडूम की आड़ मे महिलाओं पर हो रही हिंसा को उजागर करने के उद्देश्य से ऑल इंडिया फैक्ट फाइंडिंग का आयोजन किया था. जन स्वास्थ्य सहयोग छत्तीसगढ़ उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार के प्रति शोक संवेदना प्रगट करती है. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य और महिला अधिकारों के संघर्ष में निर्णायक परिणाम हासिल करने में उनका महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने मध्य भारत के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के मुद्दों पर जोर दिया. गुरुघासी दास सेवादार संघ के साथियों ने उनके निधन पर उनके योगदान को याद करते हुए शोक संवेदना प्रकट की है.

सन् 2007 में जब उनके पति और पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ बिनायक सेन को माओवादियों के मददगार होने को झूठे केस में फंसाया गया, तो उन्होंने ही उनकी रिहाई के लिये देश-विदेश में अभियान खड़ा किया जिसके माध्यम से सलवा जुडूम और जन सुरक्षा कानून जैसे दमनकारी कानूनों का भी प्रतिरोध हुआ. उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में भी कई वर्ष पढ़ाया और फिर मुम्बई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में महिला अध्ययन केंद्र में भी शोधकार्य किया.

छत्तीसगढ़ के सामजिक संगठनों ने जारी बयान में कहा है कि “उनका गुज़र जाना छत्तीसगढ़ की जनता और विभिन्न जनसंगठनों के लिए अपूर्णीय क्षति है. उनको भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए और उनसे प्रेरणा लेते हुए हम सत्य और न्याय के लिये जनसंघर्षों को और भी तेज़ करने का संकल्प करते हैं.”

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