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भूविस्थापितों के धरने में माकपा नेता ने कहा: विस्थापन और रोजगार के मुद्दे पर लड़ाई एक राजनैतिक संघर्ष

कुसमुंडा। पूरे देश में आजादी के बाद से अब तक विकास परियोजनाओं के नाम पर दस करोड़ से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया गया है और अपने पुनर्वास और रोजगार के लिए आज भी वे भटक रहे हैं। सरकार की नीतियां गरीबों की आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों को उनसे छीन रही है। यही कारण है कि कुछ लोग मालामाल हो रहे हैं और अधिकांश जिंदा रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए विस्थापन के खिलाफ और रोजगार के लिए संघर्ष इस देश में चल रहे व्यापक राजनैतिक संघर्ष का एक हिस्सा है और इन सरकारों की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों को बदलकर ही इसे जीता जा सकता है।

उक्त बातें आज यहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव संजय पराते ने एसईसीएल कुसमुंडा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के सामने रोजगार एकता संघ के बेनर तले भूविस्थापित किसानों के एक धरने को संबोधित करते हुए कही।

उल्लेखनीय है कि लंबित रोजगार की मांग पर कुसमुंडा क्षेत्र में 12 घंटे खदान जाम करने के बाद एसईसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष दस से ज्यादा गांवों के किसान धरने पर बैठ गए हैं। इस आंदोलन के समर्थन में माकपा और छत्तीसगढ़ किसान सभा भी मैदान में उतर गई है। प्रबंधन ने पात्र लोगों को रोजगार देने के लिए एक माह का समय मांगा है और विस्थापन प्रभावित किसान भी मांग पूरी न होने पर एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

माकपा नेता ने अपने संबोधन में कहा कि राजधानी में आदिवासियों को नचाने वाली सरकार गांवों में किसानों को रोजगार और पुनर्वास के नाम पर नचा रही है और जो एसईसीएल पर्यावरण को बर्बाद करने, विस्थापितों को रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा न देने के लिए बदनाम है, उसे कोल इंडिया पुरस्कृत कर रहा है। इससे ज्यादा हास्यास्पद बात और कुछ नहीं हो सकती। लेकिन यहां के लोगों का साझा संघर्ष अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से लड़ेगा। धरना प्रदर्शन के दूसरे दिन प्रमुख रूप से राधेश्याम, दामोदर, रेशम, पुरषोत्तम, बलराम कश्यप, मोहनलाल, दीनानाथ, सनत कुमार, विजय, सोहरिक, पंकज, रामकुमार, कृष्ण कुमार, हरियल के साथ माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, किसान सभा के जिलाध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर,जय कौशिक, संजय यादव उपस्थित थे।

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