आदिवासी क्राईम छत्तीसगढ़ पुलिस भृष्टाचार महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

पंकज बेक कस्टोडियल डेथ: हत्या के आरोपी पुलिसकर्मी SP ऑफिस में पीड़िता को धमकाकर ले रहे मनमाना बयान

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर की रहने वाली आदिवासी महिला रानू बेक का कहना है के अंबिकापुर पुलिस ने उसके पति पंकज बेक को पुलिस स्टेशन के अंदर पीट पीट कर मार डाला। पुलिस इसे आत्महत्या कह रही है लेकिन रानू बेक ढेर सारे सबूत और पूरे विश्वास से यह कहती हैं कि उनके पति ने आत्महत्या नहीं की है उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर करके मारा गया हैl

घटना साल 2019 की है

28 साल का आदिवासी युवक पंकज बेक एक प्राइवेट कंपनी के साथ इंटरनेट और सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम करता थाl इस कंपनी में वह पिछले कई सालों से काम कर रहा था इस बीच उस पर कभी भी चोरी या पैसों के हेरफेर का इल्जाम नहीं लगा l

27 जून 2019 की शाम पंकज बेक कंपनी के ही एक कर्मचारी इमरान खान के साथ शहर के व्यवसाई तनवीर के घर पर सीसीटीवी कैमरा लगाने गया था अपना काम खत्म कर पंकज वापस घर लौट गया।

अगले दिन 28 जून को व्यवसायी तनवीर ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई की उनके घर सीसीटीवी कैमरा लगाने आए युवक पंकज और इमरान ने उनके घर की अलमारी से 13 लाख रुपए चुरा लिए हैं।

चोरी होने की पुष्टि हो सके, इस संबंध में व्यवसायी तनवीर ने किसी भी तरह के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए थे। मसलन अलमारी के उथल-पुथल होने की तस्वीरें, CCTV footage, कोई गवाह आदि।

शिकायतकर्ता व्यवसाई ही थाने में इंटेरोगेशन करते और पंकज को पीटते थे

एफ आई आर दर्ज होने के बाद पंकज, इमरान और उसके परिवार वालों का जीना मुश्किल कर दिया गया। पूछताछ के नाम पर पुलिस उन्हें आए दिन उठा लिया करती। नंगे बदन दिन दिन भर पंकज थाने में पड़ा रहता था। उसके साथ बेतहाशा मारपीट की जाती थी। थर्ड डिग्री टॉर्चर जिसके बारे में आपने फिल्मों में सुना होगा, पंकज उसे आए दिन झेल रहा था। अपनी पत्नी के साथ पंकज थाने की बातें साझा करने की कोशिश करता था। पंकज के बताए अनुसार थाने में सिर्फ पुलिस नहीं शिकायतकर्ता व्यवसाई तनवीर और उसके साथी भी उसे पीटते और सवाल पूछते थे।

जिस दिन पंकज को मार दिया गया

20 जुलाई 2019 को पुलिस वालों ने पंकज और इमरान से कहा के अपने और अपने घर वालों के बैंक डिटेल के साथ 21 जुलाई को थाने में हाजिर ओ जाएं।

खबरों की माने तो शुक्रवार 21 जुलाई 2020 को दिन से लेकर रात तक पारी बदल बदल कर पुलिस वालों ने दोनों को इतना मारा था कि दोनों के पैरों के तलुए रंग पोत देने सरीखे नीले पड़ गए थे। अगले दिन सुबह अंबिकापुर थाने के साइबर सेल के पास ढेर सारे घावों से भरी पंकज बेक की लाश मिली।

पुलिस ने कहा पंकज ने आत्महत्या की है लेकिन…

साइबर सेल के पास ही एक निजी अस्पताल के प्रांगण में पंकज की लाश बैठी हुई मिली ऊंची खिड़की पर लगे कूलर में पानी का एक प्लास्टिक पाइप फंसा हुआ था जिसका दूसरा सिरा फांसी के फंदे की तरह पंकज के गले में बंधा था। जिस स्थिति में लाश मिली वो आप तस्वीर में देख सकते हैं

जिस स्थिति में लाश मिली उसे देखकर सभी ने कहा कि ये आत्महत्या तो बिल्कुल नहीं लगती। लेकिन पुलिस ने कहा कि ये आत्महत्या है। याद रहे कि ये वही पुलिस वाले थे जिनकी कस्टडी में पंकज पिछले रोज दिन भर से पीटा जा रहा था।

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क्यों लगता है कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या है

  • जिस कूलर पर प्लास्टिक पाइप का फंदा बंधा था वह जमीन से 9 फीट ऊपर था। वहां तक पहुंचने के लिए कोई सीढ़ी या कोई दूसरा साधन मौजूद नहीं था। 
  • फंदे वाला पाइप कूलर में बंधा नहीं है सिर्फ फंसा हुआ है जिंदा व्यक्ति फांसी पर झूल जाए इतनी मजबूती नहीं लगती इस फंसे हुए पाईप की।
  • पूरे शरीर पर जगह-जगह गहरी चोट के निशान मिले हैं जो फांसी लगाने के हो ही नहीं सकते।
  • लाश जिस तरह सलीके से बैठी है वह खुद ही बहुत सारे सवालों का जवाब है।
  • भारत सम्मान समाचार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अपनी मर्जी से बनवाने और रिपोर्ट जारी करने में देर करने के लिए पुलिस ने डॉक्टरों पर बहुत दबाव बनाया था।
  • गिने चुने जो अखबार और पत्रकार इन तथ्यों को प्रकाशित कर रहे थे उन्हें लालच देकर या डरा कर चुप कराने की कोशिश की गई।

इस मामले की बारीकी से जांच करते हुए पत्रकार मनीष कुमार ने आज एक विडियो जारी किया है। देखिये मनीष कुमार की ख़ास रिपोर्ट

प्रथम दृष्टया हत्या का मामला

स्थानीय विपक्षी दल ने घटना के विरोध में चक्का जाम किया। पूर्व गृहमंत्री के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की गई। साक्षियों के बयान और घटनास्थल का मुआयना कर, जांच दल ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की उसमें प्रथम दृष्टया हत्या का मामला सामने आया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए दो बार RTI लगानी पड़ी

कानून कहता है कि मृतक के परिवार को उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तुरंत दी जानी चाहिए लेकिन पंकज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट उसकी विधवा पत्नी को 2 महीने तक नहीं दी गई। रोज धक्के खाती रानू बेक ने दो बार RTI लगाई तब कहीं जाकर उसे उसके पति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल पाई।

पीड़ित के पक्ष में बोलने वालों को दी जा रही धमकियां

पुलिसकर्मियों एवं उनके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया में पीड़ित के पक्ष में आवाज उठाने वाले पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को धमकी दी जाने लगी।

मृतक की पत्नी ने जिला कलेक्टर, प्रधानमंत्री, मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग आदि सभी जगहों पर मामले की लिखित शिकायत दर्ज करा कर निष्पक्ष जांच करने की मांग की है लेकिन कहीं से भी न उसे कोई जवाब मिला है ना कोई सहायता मिली है।

FIR के नाम पर खानापूर्ति

आईपीसी 306 व 34 के तहत लंबे संघर्ष के बाद पांच आरोपी पुलिसकर्मियों (विनीत दुबे, मनीष यादव, प्रियेश जॉन, लक्ष्मण राम व दीन दयाल सिंह) पर मात्र इस बात की FIR दर्ज की गई कि इन्होंने पंकज बेक को आत्महत्या के लिए उकसाया है। जबकि मृतक की विधवा के द्वारा लगातार शिकायत की जा रही है कि उसके पति ने आत्महत्या नहीं की है, उसकी हत्या हुई है और इस हत्या के मामले की जांच की जाए।

सवाल जिनसे पुलिस भाग रही है

खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले से जुड़े कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं यह प्रश्न पुलिस की आत्महत्या वाली कहानी को गलत साबित करने के लिए काफी लगते हैं –

  • पंकज बेक के पैरों और तलवे पर गहरी चोट के निशान मिले हैं। ऐसे घावों के रहते हुए किसी का चलना ही मुश्किल होगा तो फिर पंकज बेक पुलिस की हिरासत से भाग कैसे सकता है ?
  • पुलिस के अनुसार पंकज बेक ने चार दीवारें फांदी फिर आत्महत्या की। गौर करने की बात है कि इन चार दीवारों में से एक दीवार 12 फीट से भी ज्यादा ऊंची है जिसे तो कोई एथलीट भी आसानी से न फांद पाए तो घायल पैरों के साथ पंकज बेक उसके पार कैसे कर सकता था ?
  • मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच में उन गहरी चोटों का जिक्र आखिर क्यों नहीं किया जो मृतक के शरीर पर पाई गई थीं ?
  • मजिस्ट्रियल जांच में मुख्य आरोपी का बयान क्यों नहीं लिया गया ?
  • पंकज बेक आदिवासी था, उसकी पत्नी रानू बेक लगातार इस बात की मांग कर रही है के आरोपियों के विरुद्ध sc-st प्रताड़ना अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए पर ऐसा क्यों नहीं किया गया ?

हत्या के आरोपी मृतक की पत्नी से पूछताछ कैसे कर सकते हैं

विभागीय जांच बैठाकर आनन-फानन में पीड़िता रानू बेक एवं घटना के सह-पीड़ित इमरान एवं अन्य साक्षियों को सूरजपुर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के द्वारा अपने कार्यकाल दिनांक 16.07.2020 को बयान दर्ज कराने बुलाया गया था। लेकिन वहां पहले से ही पांचों आरोपी विनीत दुबे, मनीष यादव, प्रियेश जॉन, लक्ष्मण राम व दीन दयाल सिंह मौजूद थे। ये आरोपी पुलिसकर्मि खुद ही पीड़िता से सवाल पूछ रहे थे।

पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु मामले के आरोपी तत्कालीन टीआई विनीत दुबे द्वारा स्वयं प्रश्न-उत्तर डेटा ऑपरेटर को निर्देशित कर लिखवाया जा रहा था। पीड़ित पक्ष कुछ बोले तो उन्हें डांट-डपटकर और अभियोजन साक्षियों के बयान को काट-छाटकर अपनी इच्छानुसार बयान लिखवाकर भयभीत कर उनका हस्ताक्षर लिया गया।  जांच अधिकारी पूरे समय अपने अलग चैम्बर में बैठे हुए थे। आरोपियों को खुली छूट दे दी गई थी कि वे अपने मन मुताबिक़ पीड़ित पक्ष को डरा धमका कर बयान लिखवा लें। 

रानू बेक ने पूछताछ के दौरान डराए धमकाए जाने की इस धटना की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक सूरजपुर से की और आईजी सरगुजा रेंज को भी शिकायत कर मामले से अवगत कराया। 

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