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छत्तीसगढ़ की HIV पॉज़िटिव बच्चियों के साथ मारपीट का मामला : कोर्ट ने कहा 4 हफ़्ते में जवाब दे सरकार

बिलासपुर। HIV पॉज़िटिव बच्चियों के लिए काम करने वाली छत्तीसगढ़ की एकमात्र संस्था के संचालकों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए ये बात कही कि बीते 17 अगस्त को महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों और पुलिस ने संस्था के अंदर ज़बरदस्ती गैरकानूनी तरीके से प्रवेश किया और सभी HIV पॉज़िटिव बच्चियों को अमानवीय तरीके से पीटते हुए जबरन वहां से ले गए।

शासन की इस गैरकानूनी कार्रवाई का विरोध करने वाले संस्था के कर्मचारियों के साथ भी मारपीट की गई। संस्था के संचालकों का आरोप है कि ये जेजे एक्ट और भारत के संविधान का खुला उल्लंघन है।

संस्था ने ये भी आरोप लगाया है कि महिला बाल विकास के अधिकारियों ने उनसे रिश्वत मांगी थी और रिश्वत न देने के कारण ही विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर ये गैरकानूनी कृत्य किया है।

25 सितंबर को संस्था के संचालक संजीव ठक्कर की तरफ़ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया है कि वो 4 हफ़्ते के भीतर इसका जवाब कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।

संस्था के संचालकों ने बताया कि 17 अगस्त को पुलिस और महिला बाल विभाग के अधिकारियों ने HIV पॉज़िटिव बच्चियों को लहूलुहान होते तक पीटा था, बच्चियों का बाल खींचकर वहां से लेजाया गया था, बच्चियों का ख़ून फर्श पर बिखरा पड़ा था।

संस्था के आसपास रहने वाले लोगों ने भी खुले मंच पर मीडिया के सामने ये बताया है कि पुलिस व कुछ अन्य लोग बच्चियों को मारते घसीटते हुए लेकर गए थे।

आपको बता दें कि संस्था में खुशी खुशी रह रही HIV पॉज़िटिव बच्चियां वहां रहकर स्कूल भी जाती थीं लेकिन जब से प्रशासन बच्चियों को अपने कब्जे में लिया है तब से उनकी पढ़ाई पूरी तरह बंद है।

ज़बरदस्ती लेजाए जाने के बाद बच्चियों ने ये भी शिकायत की है कि उन्हें कई दिनों तक विभाग वालों ने उन्हें दवाएं भी नहीं दी थीं जबकि HIV की दवा का एक डोज़ मिस कर देना भी सेहत के लिए घातक हो सकता है।

ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि इस मामले में आरोपी महिला बाल विकास विभाग की अधिकारी पार्वती वर्मा पर पहले भी रिश्वत मांगने के आरोप लग चुके हैं।

मानव अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने भी इस मामले में लिखित शिकायत की है कि घटना के दिन उनके साथ भी अमानीय व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस और महिला बाल विकास के अधिकारियों ने उनके साथ इस हद तक मारपीट की कि उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया।

उन्होंने बताया कि TI सनीप रात्रे और महिला बाल विकास के अधिकारी सुरेश सिंह ने उन्हें बुरी नीयत से छुआ और जबरन उनके कपड़े उतारने की कोशिश भी की।

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