किसान आंदोलन

बढ़ती किसान आत्महत्या की दर को देखते हुए बोनस तिहार पर तत्काल रोक लगे- छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ –

 

बढ़ती किसान आत्महत्या की दर को देखते हुए बोनस तिहार पर तत्काल रोक लगे, किसान संगठनों की 8 अक्टूबर को बैठक : छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

6.10.2017

प्रदेश में किसानों के द्वारा आत्महत्या करने का सिलसिला लगातार जारी है  ।  आज बलौदाबाजार जिला के तिल्दा थाना के अंतर्गत ग्राम सरारीडीह से एक और किसान श्री ढाल सिंग वर्मा ने कर्ज के बोझ से फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली ।   परिजनों के अनुसार उस पर 7 लाख रुपए का कर्ज था । उसने अपनी 1 एकड़ जमीन और साथ ही लीज पर लिए 7 एकड़ के खेत में धान की फसल लगाई थी जो अवर्षा के कारण बुरी तरह से बर्बाद हो गई ।  खेती से बर्बाद हो चुके 28 वर्षीय ढाल सिंह की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने 7 लाख का कर्ज  कैसे पूरा करें । इसी वजह से आज सुबह 7 बजे उस ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ।

 

इस तरह बोनस की घोषणा होने के पश्चात से गत 1 माह में अब तक प्रदेश में 6 किसान आत्महत्या कर चुके हैं । किसानों की लगातार हो रही आत्महत्या से स्पष्ट है कि किसानों को बोनस से किसी भी तरह की राहत नहीं मिली है । क्योंकि फसल सूखा की वजह से बर्बाद हो चुकी है और किसानों का कर्ज पहले से अधिक बढ़ चुका है । ऐसी स्थिति में राज्य सरकार किसानों की कर्जमाफी करें तो किसी तरह की राहत  मिल सकती है ।

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य रुपन चंद्राकर, पारसनाथ साहू, श्रवण चंद्राकर, द्वारिका साहू, डॉ संकेत ठाकुर, जागेश्वर चंद्राकर, पुरुषोत्तम चंद्राकर, तेजराम विद्रोही, शत्रुघन साहू,  उत्तम जायसवाल, अनिल सिंह, दुर्गा झा, रवि ताम्रकार आदि ने सरकार से मांग की है कि आत्महत्या किये किसानों के परिवारों को सरकार तत्काल आर्थिक मदद दे ।  उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार एवम उनके जनप्रतिनिधियों  की संवेदनहीनता किसान आत्महत्या के मामले में लगातार देखने में आ रही है । धरसींवा विधानसभा के ग्राम बेलटुकरी में विगत 1 अक्टूबर को आत्महत्या किये किशन धीवर के दसगात्र कार्यक्रम में इंसान महासंघ के प्रतिनिधियों के अलावा कल सैकड़ों किसान उपस्थित थे ।  लेकिन उसी गांव से गुजर कर ग्राम भड़हा जा रहे क्षेत्रीय विधायक देवजी पटेल ने किशन धीवर के परिजनों से भेंट करना भी मुनासिब नहीं समझा । इससे ग्राम बेलटुकरी के किसानों में गहरा आक्रोश देखने को मिला ।

 

भाजपा सरकार की किसानों के प्रति संवेदनहीनता की इसी वजह से उन्हें बोनस तिहार के नाम पर सरकारी खर्चे में भाजपा का प्रचार-प्रसार करने में कोई शर्म भी नहीं आ रही है । किसानों के घरों में भयानक सूखा की वजह से मातम है । बेहतर होता कि तमाम सरकारी आयोजनों पर रोक लगाई जाती और किसानों को कर्ज मुक्ति कर फौरी तौर पर राहत उपलब्ध कराई जाती ।

किसान संगठनों की बैठक 8 अक्टूबर को

अपनी समस्याओं के लेकर आंदोलनरत किसानों को गिरफ्तार करने का सिलसिला भी विगत 15 दिनों से चल रहा है । किसान आंदोलन को दमन पूर्वक कुचलने की सरकारी चाल भी नाकाम हो चुकी है । इसी संदर्भ में प्रदेश के दो दर्जन से अधिक किसान संगठन रविवार 8 अक्टूबर को चन्द्राकर छात्रावास में बैठकर आगामी रणनीति तय करेंगे

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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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