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आज साम्राज्यवाद व पूंजीवाद पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ हेै इससे हमें एक-एक कर निपटना होगा.

आज साम्राज्यवाद व पूंजीवाद पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ हेै इससे हमें एक-एक कर निपटना होगा.

अक्टूबर क्रान्ति  के 100वर्ष और मेहनतकश वर्ग के सामने चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी.
अक्टूबर क्रांति  के 100वर्ष और मेहनतकश वर्ग के सामने चुनौतियां.

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रायपुर, 6 अक्टूबर 2017।

डाॅ. पुर्णेन्दू घोष स्मृति रक्षा समिति रायपुर द्वारा अक्टूबर क्रंाति के 100वर्ष और मेहनतकश वर्ग के सामने चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी का आयोज  एम सी ए प्रोग्राम संेटर रायपुर में किया गया।

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि सीपीआई (एमएल) रेडस्टार के महासचिव काॅ. के.एन. रामचन्द्रन थे। कार्यक्रम की अध्यक्ष्यता प्रख्यात साहित्यकार लेखक व प्रगतिशील लेखक संघ के संरक्षक प्रभाकर चौौबे ने की। इस अवसर पर सीपीआई (एमएल) रेडस्टार के राज्य सचिव काॅ. सौरा यादव, क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के राष्ट्रीय संयोजक व विकल्प अवाम का घोषणापत्र के संपादक तुहिन, प्रख्यात जनगायिका व कसम की सदस्य बिपाशा राव ने बात रखी। जाति उन्मूलन आंदोलन के अखिल भारतीय कार्यकारी संयोजक संजीव खुदशाह, कसम के रतन गोंडाने, अशोक गांगुली, रंगकर्मी मो. निसार, जाति उन्मूलन आंदोलन की अंजू मेश्राम व अ.भा. क्रांतिकारी महिला संगठन की दीपा ने भी अपनी बात कही।

कार्यक्रम का उद्देश्य रूस की अक्टूबर क्रंाति के 100वर्ष पूरे होने पर देश के मेहनतकश वर्ग के सामने व्याप्त चुनौतियों का सामना करने हेतु जनमत तैयार करना था। इस अवसर पर बंगाल के भांगर जन आंदोलन में समर्थन देने जा रहे वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता काॅ. के.एन. रामचंद्रन की पुलिस द्वारा अवैधानिक कस्टडी व तीन दिन बाद रिहाई के लिए नागरिक अभिनंदन किया गया एवं 1944-50 के ऐतिहासिक तेभागा किसान आंदोलन के महान क्रांतिकारी व बिलासपुर निवासी डाॅ. पुर्णेन्दू घोष को स्मरण करते हुए उनकी याद में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी गई। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनसंगठनों, प्रबुद्धजन, पत्रकारगण, छात्र/छात्राएं, टेªड यूनियन व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रख्यात जनगायिका बिपाशा राव ने जनगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन तुहिन व आभार अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के तेजराम विद्रोही ने किया।

इस अवसर पर वक्तव्य रखते हुए काॅ. के.एन. रामचंद्रन ने कहा कि यह वर्ष पूरी दुनिया के मजदूर वर्ग और उत्पीड़ित जनता के लिए महोत्सव का वर्ष है। आज से 100 वर्ष पहले नवम्बर 1917 को रूस के मजदूर वर्ग ने दुनिया में पहली बार मजदूर-किसान राज की स्थापना कर इतिहास रचा था। पूरी दुनिया में पूंजीवाद व साम्राज्यवाद के खिलाफ समाजवाद की नई व्यवस्था गढ़ी गई। रूसी क्रांति पहले विश्वयुद्ध के दौर में हुई थी जब साम्राज्यवादी लुटेरे, उपनिवेशों का बंटवारा करने के लिए एक दूसरे के खिलाफ गलाकाटू संघर्ष में फंसे थे।

लेनिन के नेतृत्व में वहां के मजदूरों, किसानों व आमजन ने शांति, रोटी और जनवाद तथा सारी सत्ता सोवियतों जनपरिषद के हाथ हो के नारे के साथ सर्वहारा क्रांति करते हुए निरंकुश जारशाही को उखाड़ फेंका और मेहनतकशों का शासन स्थापित किया। इससे दुनियाभर के पूंजीवादियों में दहशत फैल गई, मगर रूस के मजदूरों किसानों ने बताया कि जनवाद वास्तव में कैसा होता है। दुनिया को पहली बार पता चला कि पूंजीवाद किस तरह से धोखा देता है। क्रांति के बाद रूस, सोवियत संघ बना वहां पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था की सारी नीतियों को उलट दिया गया और जमींदारों से जमीन छीनकर मेहनत करने वाले किसानों को दी गई, कारखानों पर मजदूरों का अधिकार स्थापित हुआ।

उन्होंने बताया कि अक्टूूबर क्रांति के बाद पूरी दुनिया ने सोचा समाजवाद की पूर्वी हवा साम्राज्यवाद कोे परास्त कर देगा लेकिन आज वो पूरा नहीं हो सका। सत्ताधारियों ने साम्राज्यवाद को समझने में गलती की जिसका परिणाम है कि आज यह बहुत बड़ी समस्या बन गया है। समाजवादी प्रभाव खत्म करने के लिए धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दिया गया और बाजार पर कब्जे के लिए पूरी दुनिया को युद्ध के रास्ते पर आगे बढाया गया। हमारे देश में न तो शासक वर्ग की स्थिति इससे भिन्न है और न ही मजदूर वर्ग की। नई आर्थिक नीति के कारण जनता का जीना दुभर हो गया है।

अमेरिका के नेतृत्व में साम्राज्यवादियों द्वारा मजदूरों, किसानों व आमजनों के जनवादी, आर्थिक व सामाजिक अधिकारों को निष्ठुरता से छीना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से भी अधिक समय से संघ समर्थित धुर दक्षिणपंथी सरकार आने के बाद इस तरह की घटनाओं में असाधारण वृद्धि देखी जा रही हेै। लोगोें के खान-पान, रहन-सहन, पहनावे आदि पर रोक लगाने एवं भारत के इतिहास व संस्कृति के विकृतिकरण व सांप्रदायिकरण का कुत्सित प्रयास लगातार जारी है। जनता के मुख्य मुद्दे रोटी, कपड़ा और मकान से ध्यान हटाकर लोगों को धर्म, जाति व क्षेत्रियता के आधार पर बांटा जा रहा है। हमें महान अक्टूबर क्रांति से, विश्व व देश के तमाम क्रांतिकारी आंदोलनों से सीख लेकर सभी संघर्षशील वामपंथी और जनवादी ताकतों तथा दलितों, आदिवासियों एवं महिलाओं समेत सभी उत्पीड़ित वर्गों व तबकों को एक साथ लेकर ऐसे जनविकल्प का निर्माण करना होगा जो सबके लिए रोजी, रोटी और जनवाद सुनिश्चित कर सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभाकर चैबे ने कहा कि बाह्य परिवर्तन हमारी अन्तःचेतना को प्रभावित करता है। हमने सांस्कृतिक, राजनैतिक शिक्षा नही दी केवल आर्थिक लड़ाई लड़ी और केवल आर्थिक मुद्दों को ही तव्वजो दिया। सामंतवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी लेकिन सामंतवाद जिंदा रहा और आज वही वर्ग साम्राज्यवादियों, पूंजीवादियों के साथ सत्ता में है।

यह वर्ग जनमानस को भ्रमित कर केवल अपने फायदे के बारे में सोचता है, सभी संसाधनों पर पूरी तरह से इनका कब्जा है। अमीरी गरीबी की खाई इतनी बढ़ती जा रही है कि गरीब रोटी कपड़ा के लिए तरस रहा है और अमीर महल बना रहे हैं। आज साम्राज्यवाद व पूंजीवाद पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ हेै इससे हमें एक-एक कर निपटना होगा। हम सब एक बराबर हंै का भाव सभी में होना चाहिए, लोंगो में चेतना जागृत करना होगा कि समाज में सभी बराबर हैं। इस अवसर पर उन्होंने ’’कौन मिलाइस हमर चाउर में गोटी’’ कविता प्रस्तुत की।

काॅ. सौरा यादव ने कहा कि साम्राज्यवाद आज की परिस्थिति में कोई विकल्प नहीं है हमें मजदूरों किसानो दलितों अल्पसंख्यकों व तमाम प्रगतिशील लोगों के साथ मिलकर इस पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने एवं समाजवाद की स्थापना हेतु एक जुट होना होगा।

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