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परसा कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय जनसुनवाई में प्रभावित ग्रामीणों ने किया विरोध .

राजस्थान राज्य विधुत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित परसा कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय जनसुनवाई में प्रभावित ग्रामीणों ने किया विरोध ।

समर्थन जुटाने अन्य गांव से ग्रामीणों को पेसा देकर गाड़ियों में लाया गया।

29.10.2017

आलोक शुक्ला की रिपोर्ट 

 

ग्राम बासन, तहसील उदयपुर में आयोजित पर्यावरणीय लोकसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने लोकसुनवाई में समर्थन जुटाने करोड़ो रूपये खर्च किया। लोकसुनवाई का विरोध जताते हुए ग्राम घटबर्रा के जयनंदन सिंह पोर्ते ने कहा कि कंपनी ने जो पर्यावरणीय रिपोर्ट बनाई हैं वह फर्जी हैं ।परियोजना के कोर जोन में महत्वपूर्ण वनस्पति, वन्यप्राणीयों की जानकारी को छुपाया गया हैं। जनपद सदस्य बलसाय ने कहा कि राजस्थान राज्य विधुत उत्पादन निगम लिमिटेड और अडानी कंपनी आदिवासियों को ठग रही हैं। यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची में शामिल हैं जहाँ आदिवासियों के हको का संरक्षण का दायित्व प्रशासन के पास हैं परंतु यहाँ का प्रशासन इसके विपरीत कार्य कर रहा हैं।

 

अडानी कंपनी के दवाब में ही यह लोकसुनवाई परियोजना क्षेत्र से बाहर ग्राम बासन में आयोजित की गई हैं जिससे प्रभावित ग्रामीण शामिल ही न हो सके। आलोक शुक्ला ने कहा कि यह लोकसुनवाई अवैध और नियम विरुद्ध आयोजित की जा रही हैं । हसदेव अरण्य जैसे समृद्ध वन क्षेत्र में किसी भी नई खनन परियोजना को अनुमति देना सम्पूर्ण पर्यावरण के लिए घातक होगा। इस खनन के क्षेत्र में 4 प्रोटेक्टेड फारेस्ट हैं जो बहुत ही सघन और जैव विविधता से परिपूर्ण हैं। परियोजना प्रस्तावक द्वारा कई महत्वपूर्ण जानकारियों को छुपाया गया हैं जैसे परियोजना क्षेत्र में हाथी की उपस्थिति सिर्फ 2013 तक दिखाई गई हैं जबकि 2014, 2015 में भी हाथी रहा हैं । उमेश्वर सिंह अर्मो ने कहा कि अडानी कंपनी न सिर्फ पर्यावरण बल्कि आदिवासियों की संस्कृति का विनाश कर रही हैं।

कुमार गिरीश ने कहा कि सभी नदिया और जल स्रोत का उद्गम पहाड़ो से होता है और हम इसी प्रकार इस तथाकथित विकास के नाम पर पहाड़ो और जंगलो को उजाड़ते जाएंगे तो पानी और भोजन का गंभीर संकट होगा। इस परियोजना को निरस्त किया जाए।

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आलोक शुक्ला की रिपोर्ट जन सुनवाई स्थल से 

 

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