राजनीति

8 नवम्बर को विरोध दिवस के रूप में मनेगी नोटबंदी की बरसी : वाम दलों का आव्हान

26.10.2017

पिछली साल 8 नवम्बर को हुयी नोटबंदी की पहली बरसी पर इस 8 नवम्बर को देश भर में विरोध कार्यवाहियां की जायेंगी । देश के 6 वामपंथी दलों ने इसका आव्हान किया ।
नोटबंदी को लेकर उसी वक़्त वामदलों ने जो आशंका जताईं थी, वे अपने पूरे विनाशकारी असर के रूप में सामने आ गयी हैं । इसकी घोषणा करते समय जिन लक्ष्यों को हासिल करने का दावा किया गया था उनमे से किसी एक की दिशा में इंच पर आगे बढ़ना तो दूर रहा, परिस्थितियां पहले से ज्यादा बिगड़ी और खराब हुयी हैं:
● जितने भी नोट चलन में थे वे सबके सब बैंकों में वापस जमा हो गये हैं । न एक रूपये का काला धन बरामद हुआ, न एक भी अपराधी को पकड़ कर उसके खिलाफ कार्यवाही हुयी । उलटे सारे नोटों की वापसी से काले धन के साथ साथ नकली नोट भी असली कर दिये गये ।
● आतंकी कार्यवाहियां रुकने की बजाय बढ़ीं और आतंकी हमलों तथा उन हमलों में मारे जाने वाले सैनिकों, अर्धसैनिक बलों तथा नागरिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुयी ।
● भ्रष्टाचार रुकने की बजाय दोगुना हो गया ।
कुछ हासिल करने की बजाय इस नोट बंदी ने पूरे भारतीय समाज में तबाही अलग से मचा दी है :
■ कुल जीडीपी का एक तिहाई योगदान और कुल श्रमशक्ति के 60 फीसद को रोजगार देने वाले असंगठित क्षेत्र का भट्टा बैठ गया है।
■ मनरेगा में जबर्दस्त कटौतियों से ग्रामीण गरीबो का जीवन संकट में पड़ गया है।
● सार्वजनिक वितरण प्रणाली ठप्प हो गयी है। बचीखुची कसर राशन को आधार से जोड़ने की जिद ने पूरी कर दी, नतीजे में गरीब और वंचितों की जिंदगी असहनीय बन गयी है।
नोटबंदी सहित सरकार की दिवालिया आर्थिक नीतियों ने तीनों क्षेत्रों – मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और सर्विस सेक्टर को मंदी में धकेल दिया । नतीजे में बेरोजगारी और मुश्किलें बेतहाशा बढ़ी हैं । आबादी अनुपात में नौजवानों का विराट हिस्सा, जो हमारी ताकत बन सकता था, अनुपयोगी पड़ा है । युवा बेरोजगारी के चलते सामाजिक और आर्थिक रूप से असुरक्षित और मारा मारा घूम रहा है ।
खेती किसानी का संकट बेकाबू होकर उछाल मार रहा है । किसानों की आत्महत्यायें बढ़ती चली जा रही हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनयापन की कठिनाईयां बढ़ी हैं जो अब भुखमरी मौतों की खतरनाक स्थिति तक जा पहुँची हैं ।
अब यह साबित हो चुका है कि सरकार की नीतियां देसी विदेशी कारपोरेटों का मुनाफ़ा और आम जनता का शोषण बढ़ाने की हैं ।
8 नवम्बर को सरकार की आर्थिक नीतियों के विरुद्ध होने वाले विरोध दिवस की कार्यवाहियों के जरिये वाम दल मांग करेंगे कि :
★ मोदी सरकार 2014 के चुनाव घोषणापत्र में किसानों की कर्जमाफी, फसल खरीदी का मूल्य लागत से डेढ़ गुना, हर साल 2 करोड़ इस तरह भाजपा काल में 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वायदा पूरा करे ।
वामदलों ने देश भर की खराब होती हालत और लोगों पर हमलों , साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण तीखा होने, संसदीय लोकतन्त्र की संस्थाओं पर हमलों तथा जनता के लोकतांत्रिक एवं नागरिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों पर चिंता व्यक्त की है ।
जनता के सभी हिस्सों, लोकतांत्रिक तथा धर्मनिरपेक्ष सोच के सभी व्यक्तियों, दलों, संगठनों से अनुरोध है कि वे सरकार की नीतियों तथा जनता की तकलीफों के खिलाफ होने वाली कार्यवाहियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें ।
मध्यप्रदेश में की जाने वाली आंदोलनकारी कार्यवाहियों के निर्धारण के लिये वामदल एक दो दिन में अपनी बैठक करेंगे ।
आंदोलनों-अभियानों का समर्थन
वाम दलों ने 9-10-11 नवम्बर को संसद पर मजदूरों के महापड़ाव तथा 20 नवम्बर को किसानो द्वारा संसद के समक्ष लगाई जाने वाली किसान-संसद का समर्थन किया है ।

( बादल सरोज की पोस्ट )

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