आदिवासी मानव अधिकार राजकीय हिंसा

कोयंदे बांझ नहीं है – नवल शर्मा

कोयंदे बांझ नहीं है ——-
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अधनंगे को ,
घर से घसीट कर – कहीं जंगल में ,
रची गयी मुठभेड़ में – मारडाला .

‘ पोडियम भीमा ‘ का लिंग काट
मुतमैयन है मुंसिफ़े आला
नक्सली पैदा होने नहीं देंगे ।

‘ कोयंदे ‘ आयी है ,
न्याय की ड्योढ़ी पर
गोद में नवजात लेकर ,
मय सबूत .

मौत के रूतबे से कब रूका है –
नये आदमी का जनमना ।
*
नवल शर्मा
*
चित्र : मृत पोडियम भीमा की विधवा कोयंदे ।
भीमा का लिंग कटा शव पुलिस ने लौटाया , बस्तर के पीड़ित , उच्चन्यायालय – छत्तीसगढ़ में न्याय की गुहार ।)

 

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