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क्राइम ब्रांच का सामाजिक कार्यकर्ताओ के लिए स्तेमाल बेहद खतरनाक सन्देश है लोकतंत्र के लिए .

 

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में 1973 से सामाजिक और राजनैतिक आंदोलन में सक्रिय रहा हूँ आपातकाल को भी देखा है ,कई बार गिरफ्तारऔर रिहा हुआ हूँ, मध्यप्रदेश हो या छत्तीसगढ़ ,सभी जगह राजनैतिक और सामाजिक आंदोलन में गिरफ्तारियों की सामान्य प्रक्रिया यही है की स्थानीय थाने की कार्यवाही पर ही घर से या धरना स्थल से गिरफ्तारी होती रही हैं वह भी सम्मानजनक तरीके से.

ऐसा ही अभी तक होता रहा जो जायज़ भी लगता है.

लेकिन ….लेकिन …..

अब यह बीते दिन की बात हो गई हैं , अब क्राइम ब्रांच दो लोग प्रमुख नेताओं के घर के बाहर पेहरा लगा देते है , घर से बाहर निकलेते ही पीछा करेंगे एक गाड़ी आपके पीछे चलेगी ,और धरना स्थल से बहुत पहले आपकी गाड़ी के सामने अपनी गाड़ी क्रास में खडीकर देंगे और छपट्टा मार शैली में गाडी के चारो गेट पर कब्ज़ा कर लेंगे और गाड़ी की चाबी छीन ली जाएगी . और अपनी गाड़ी में जबरन बिठा लिया जायेगा.
और सीधे जेल .
कई लोगो को रास्ते मे कोई निजी काम करते हए तो किसी को इसे ही किसी और तरीके से .

गिरफ्तार होने में किसी को कोई आपत्ति भी नही है, यह तो आंदोलन में होता ही है, लेकिन यह तरिका और क्राइम ब्रांच का स्तेमाल
लोकतंत्र के लिये खतरनाक संकेत हैं.

यह सब में इसलिये भी लिख रहा हूं ,क्योकि अरविंद नेताम ,आनंद मिश्रा,आलोक शुक्ला और मुझे ठीक ऐसे ही गिरफ्तार
किया गया.

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