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तांदुला जलाशय में 23 साल में सबसे कम पानी; नहीं मिलेगा रवी फसल के लिए किसानों को पानी .

 


The hitwada chhattisgarh

12.10.2017

तांदुला जलाशय जो कि तीन जिलों – बालोद,दुर्ग, और बेमेतरा की जीवन रेखा है, पिछले 23 वर्षों के अपने न्यूनतम जल स्तर पर पहुंच है। इस समय उसमे मात्र 39.57% पानी बचा है। रिजर्वायर में मात्र 22.3 फ़ीट पानी शेष है।इसमें से प्रतिदिन 2000 क्यूसेक पानी सिंचाई हेतु छोड़ा जाता है.

जलसंसाधन विभाग केअनुसार जब 2009-10 में लगभग सूखे की स्थिति थी तब भी तांदुला जलशय में 45% से अधिक पानी था।पर इस बार 92 मिलीमीटर वर्षा के बावजूद पानी बहुत थोड़ा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार गर्मी में पानी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही छोड़ा जाता है। दिसंबर से अप्रैल के बीच 2 बार तीनों ज़िलों के 1176 तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा जाता है। इसलिए इस बार रबी फसल के लिए पानी नही छोड़ा जा सकेगा। लेकिन इस बाबत अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नाही हुई है।गोंदली जलाशय में भी मात्र 23 फ़ीट पानी बचा है। खपरी जलाशय ने आज तक के अपना सबसे निम्न स्तर छुआ है – 5.37%। पूरी संभावना है कि गर्मी में यह जलाशय पूरा ही सूखा पड़ जायेगा। परंतु पूरी कोशिश की जाएगी कि उसे दूसरे जलाशयों से भरा जाए।

फिलहाल खपरी जलाशय से भी 100 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। खरखरा जलाशय में भी 15 वर्षों में सबसे निचला स्तर 69.55% चल रहा है।

खरखरा जलाशय की क्षमता 5000 MCFT है। कार्यपालन यंत्री श्रीकांत अग्रवाल ने कहा कि दुर्ग ज़िले में अल्प वर्षा हुई है। बालोद में यही परिस्थिति है।उन्होंने कहा कि यदि पानी का उपयोग समझदारी से किया जाए तो कोई समस्या नही होगी।

उन्होंने कहा कि तांदुला जलाश्य का 33% पानी सुरिक्षत रखा जाएगा।अनुमान अनुसार 15 अप्रैल तक 30 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी सूख जाएगा।.
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The hitwada chhattisgarh

12.10.2017

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