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CBI बनाम CBI : क्या CBI बन गई है दलालों का अड्डा ?

24.10.2018

CBI के special director राकेश अस्थाना के खिलाफ उन्हीं की संस्था CBI ने मुईन क़ुरैशी दलाली के मामले में FIR दर्ज की है। क्या मोदी सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों की नियुक्ति के लिये CBI की निष्पक्षता दाव पर लगा रही है ? सवाल उठा रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.
आलोक वर्मा की अधिकांश नौकरी दिल्ली पुलिस की है और उन पर सार्वजनिक तौर पर तो भ्रष्टाचार के आरोप छोड़िये, दिल्ली पुलिस सूत्रों की माने तो विभाग के अंदर भी कभी कोई भ्रष्टाचार की हल्की चर्चा भी सुनने को नहीं मिली। जबकि राकेश अस्थाना पर तो गुजरात में बड़ोदा और सूरत में तैनाती के दौरान स्टर्लिंग बॉयोटेक मामले में सैंकड़ों करोड़ के भ्रष्टाचार से लेकर अब तक कम से कम आधा दर्जन मामलों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं और उन मामलों में जांच चल रही है। और तो छोड़िये राकेश अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने में भी मोदी जी ने सारे नियमों की धज्जियाँ उड़ाई थी और सीबीआई डायरेक्टर के लिखित विरोध को भी दरकिनार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि जिस आदमी के खिलाफ सीबीआई में ही गंभीर मामले में जांच चल रही है, उसका प्रमोशन तो छोड़िये उसकी सीबीआई में पोस्टिंग भी नहीं होनी चाहिये।

https://www.youtube.com/watch?v=E8i69oXG7nk&feature=youtu.be

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