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मास्क कोरोना के वायरस को रोक सकता है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं ताज़ा शोध

जब जब हम सांस लेते हैं, बात करते हैं, खांसते या छींकते हैं तो हमारे अंदर मौजूद वायरस हवा में चला जाता है, हवा में मौजूद इस वायरस से बचने के लिए ही चहरे पर मास्क लगाने की सलाह दी जाती है। ऐसे शोध कार्यों को जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दुनिया मे जब जब महामारियां फैली हैं तब तब उनसे जुड़ी अफवाहें भी फैली हैं।

भारत में ऐसा मानने वाले भी बहुतायत में हैं कि “भाई हमें तो कोरोना होही नहीं सकता, हम बचपन से मिट्टी कीचड़ में खेले लोग हैं, ऐसे वायरस तो कितने आए कितने गए”

“रोज़ सुबह ये स्पेशल काढ़ा पीते हैं, आयरस-वायरस सब साफ़ हो जाता है”
“आप अल्कोहल से बाहर का वायरस मारते हो, हम दो पैग लगा के अंदर का वायरस मार लेते हैं”
ब्ला ब्ला ब्ला…

इस कोरोना काल में डॉक्टरों की एक बात बहुत ध्यान रखने वाली है कि “जब कभी बीमार पड़ें तो खुद डॉक्टर न बन जाएं डॉक्टर के पास आएं”

ऐसे ही कोरोना से बचने के लिए ख़ुद वैज्ञानिक न बनें वैज्ञानिकों के शोध में बताई सलाह ध्यान रखें।

कोविड-19 चूंकि बहुत नई बीमारी है इसलिए इससे बचने और इसका इलाज खोजने के लिए लगातार शोध कार्य चल रहे हैं। ऐसा ही एक शोध बीते दिनों रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल ने प्रकाशित किया है, ये शोध मास्क के कारगर होने न होने के बारे में है।

डाउन टू अर्थ में प्रकाशित खबर के अनुसार शोध कहता है कि कोरोना फैलाने वाली 99.9 फीसदी बड़ी बूंदों को मास्क रोक सकते हैं। यह जानकारी हाल ही में रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में छपे एक शोध में सामने आई है। शोधकर्ताओं के अनुसार मास्क बोलने, खांसने और छींकने से निकलने वाली 99.9 फीसदी बड़ी बूंदों को रोक सकते हैं। जिससे कोविड-19 के फैलने का खतरा घट जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यदि मास्क पहना है तो  2 मीटर की दूरी पर खांसने और छींकने से निकली बड़ी बूंदों के संपर्क में आने का खतरा 10,000 गुना तक कम हो जाता है। यदि दो लोगों के बीच की दूरी 50 सेंटीमीटर भी हो तो भी मास्क उसी तरह काम करता है।

खांसते या छींकते समय मुह में हाथ न रखने की बुरी आदत कर चलते हम लार की और छोटी हर तरह की बूंदे छोड़ते हैं। जमीन पर गिरने से पहले यह बड़ी बूंदें वायरस फैलाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। इसके विपरीत छोटी बूंदें लम्बे समय तक हवा में रह सकती हैं।

सभी मस्क पहनें तो नही होंगीं 400,000 मौतें

मास्क कितना महत्वपूर्ण है इसे इस बात से समझ सकते हैं कि इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमइ) के अनुसार यदि अमेरिका में हर कोई मास्क पहन ले तो चार महीनों में इस महामारी से 55,000 लोगों की जान बचाई जा सकती है। यदि इसे वैश्विक स्तर पर देखें तो मास्क पहनने से इन चार महीनों में 400,000 मौतों को रोका जा सकता है। गौरतलब है कि यह वायरस अब तक 17 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। वहीं अनुमान है कि आने वाले चार महीनों में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 25 से 29 लाख के बीच हो सकता है।

इस महीने की शुरुवात में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के लिए जारी गाइडलाइन्स में मास्क पहनने की सिफारिश की थी। यदि वेंटिलेशन की कमी और लोग ज्यादा हो तो डब्ल्यूएचओ ने इसे घर में भी पहनने की सलाह दी है। यह गाइडलाइन्स विशेष रूप से संक्रमण के सामुदायिक प्रसार वाले क्षेत्रों के लिए जारी की गई थी। मास्क वायरस को फैलने से रोकने के साथ-साथ पहनने वाले को भी बचाते हैं।

कपड़े के मास्क प्रभावी हैं या नहीं

सीडीसी के अनुसार कपड़े के बने मास्क भी संक्रमण को रोकने में प्रभावी होते हैं। यह ने केवल 20 से 30 माइक्रोन या उससे बड़ी बूंदों को रोक सकते हैं बल्कि साथ ही उससे छोटी बूंदें जिन्हें अक्सर एयरोसोल कहते हैं उन्हें भी रोक सकते हैं।

मास्क के साथ-साथ शारीरिक दूरी भी है जरुरी

एक अन्य शोध के अनुसार कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए मास्क के साथ-साथ शारीरिक दूरी भी बहुत जरुरी है। कपड़े से लेकर एन -95 तक हर मास्क संक्रमण युक्त अधिकांश बूंदों को रोक सकता है। लेकिन इसके बावजूद शारीरिक दूरी के बिना बीमारी के फैलने का खतरा बना रहता है।

मास्क पहनने के बावजूद 6 फीट से कम दूरी पर करीब 3.6 फीसदी बूंदे आगे जा सकती हैं। यदि संक्रमित व्यक्ति बार-बार खांसता या छींकता है तो यह मात्रा किसी को भी बीमार करने के लिए काफी है। गौरतलब है कि एक अकेली छींक में 20 करोड़ से ज्यादा वायरस युक्त कण हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें फैलाने वाला व्यक्ति कितना बीमार है।

अब तक 7.9 करोड़ लोग हो चके हैं कोरोना के शिकार

दुनिया भर में 7.9 करोड़ लोग अब तक कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इस वायरस से संक्रमित 17.4 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 5.5 करोड़ लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं। भारत की में अब तक कोरोना के 1,01,23,778 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 146,756 की मृत्यु हो चुकी है।

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