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वनग्रामों के पुनर्वास में करोड़ों का भ्रष्टाचार

वनग्रामों के पुनर्वास में करोड़ों का भ्रष्टाचार
अफसरों ने मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर करोड़ों रुपए का अवचार किया है। इस मामले की सुनवाई लोक आयोग में भी चल रही है
. बारनवापारा वन्य जीव अभयारण्य के वनग्रामों के पुनर्वास में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। किसान-मजदूर संघ के संयोजक ललित चंद्रनाहू ने लाटादादर सहित चार अन्य गांवों में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। उनका कहना है कि अफसरों ने मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर करोड़ों रुपए का अवचार किया है। इस मामले की सुनवाई लोक आयोग में भी चल रही है।
किसान नेता ललित चंद्रनाहू ने बताया कि इन गांवों की पुनर्वास प्रक्रिया में आवास, सड़क, पेयजल, स्कूल का निर्माण और खेतों को विकसित किया जाना था। वनमंडालिधारी एसएसडी बडगैया और अधीक्षक बारनवापारा ने गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य कराया। ग्रामीणों ने 2013 में ही इसकी शिकायत तात्कालीक प्रधान मुख्य वन संरक्षक धीरेंद्र शर्मा से की थी। वहां से कोई कार्रवाई नहीं होने पर वन विभाग के प्रमुख सचिव से मामले की शिकायत हुई। उनके निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) ने आरोपी अधिकारियों को ही जांच का जिम्मा सौंप दिया था।
ग्रामीणों को सौंपी घर की चाभी
इधर लोक सुराज अभियान के दौरान गुरुवार को लाटादादर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लाटादादर और भावा में बनी दो पुनर्वास कॉलोनियों के घर की चाभी ग्रामीणों को सौंपी। इन कॉलोनियों में 266 परिवारों को मकान आवंटित हुए हैं। इस दौरान उन्होंने महासमुंद जिले के लिए 157 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री परम्परागत खुमरी पहनाकर और हल भेंटकर अभिनंदन किया।

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