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बस्तर में लोकतंत्र कैसे कायम होगा. देश में लोकतंत्र के रक्षक कहां हैं ? न्याय रक्षक कहां हैं? सविधान रक्षक कहां हैं? सोनी सोरी


बस्तर में लोकतंत्र कैसे कायम होगा. देश में लोकतंत्र के रक्षक  कहां हैं ? न्याय रक्षक  कहां हैं? सविधान रक्षक  कहां हैं? सोनी सोरी 






कल की घटना पर आज जब हम सुबह पालनार गाँव के बजार पारा पहुचे तो कई चीजे देखने को मीली, पालनार के CRP केम्प कमाडेन्ट अरवीन्द , पुलिस विभाग से S.D.O.P. मिर्जा बेग, कुआकोण्ड़ा के थानेदार शरद चंद्रा मौजूद थे. पालनार ग्रामीणों की माग थी कि S.T.F. के जवानों के खिलाफ कार्यवाही हो प्रथम सुचना रिफोर्ट दर्ज हो . ग्रामीणों की भीड देख पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों से इतना मीठा- मीठा बात किया कि वे ग्रामीणों का दुख समज गये पर बात कुछ और थी असल में ये अधिकारी मामले को दबाने आये थे. 

जिन ग्रामीणों को पालनार S.T.F. (टास्क फोर्स) ने मारा था उन ग्रामीणों को डाक्टरी जाच के लिए रामदेव सोरी, राजू सोरी, मिटकू, संजू, को कुआकोण्ड़ा भेज दिये . और जो ग्रामीण धरना व बंद के आहवन में बैठे थे उनको अपने-अपने घर वापस भेज दिये. डाक्टरी जाच के बाद जब हम कुआकोण्ड़ा थाना रिपोर्ट दर्ज करने पहुचे तो थानेदार ने पहले रिपोर्ट दर्ज करने से इंन्कार किया और कहां कि जो लोग मार खाये हैं वे अपना बयान दर्ज करवाये तब हम जाच करेगे अगर STF के जवान दोषी पाये गये तब हम रिपोर्ट दर्ज करेगे.थानेदार का यह भी कहना था की सरकारी विभाग के उपर प्रथम रिपोर्ट दर्ज करने से पहले विभाग के उच्च अधिकारी से उनुमती लेनी होती हैं, और कानून में भी लिखा है . 

हम आदिवासीयों का कहना हैं कि ऐसा कौन सा कानून हैं जिसमें सरकारी विभाग के ऊफर FIR नहीं होना चाहिए आखिर क्यों? हम मान लेते है कि नहीं होना चाहिए. पर सोनी सोढ़ी भी तो एक सरकारी विभाग में कार्यरत थी फिर उनके साथ इतना बड़ा हादसा और प्रताड़ना क्यों हुआ और 8 FIR भी हुए? उनके विभाग में भी जाच होना था फिर वे अगर दोषी पायी जाती तब उन पर मुकदमा चलाना था? लेकिन पुलिसिया गुड्डाराज में व भारत देश के लोकतंत्र में पुलिस आदिवासीयों के शाररीक, मानसिक , बलात्कार, और हत्या करेगी फिर जांच होगी दोषी पाये गये तो FIR होगी.

 दोषी नहीं पाये जाने पर भारत देश उस अपराधी को राष्ट्रीय पुरूषकार से सम्मान करेगी. उस अधिकारी के खिलाफ सबुत मिल भी गया तब भी भारत सरकार उसे राष्ट्रपती पुरूषकार से सम्मान करेगी उदाहरण अंकित गर्ग . अरे देश के न्याय रंचको कुछ तो शर्म करो हम आदिवासी अनपढ़ व अल्पसंख्या में है तो क्या हुआ हम भी इसी देश के स्थाई निवासी है. 

हमे भी न्याय मिलने का समान अधिकार हैं. कानून सबके लिए बराबर हैं फिर आदीवासीयों के साथ वर्गीकरण क्यों? अगर STF के जवानों ने कानून का उल्लंगन किया है तो उन पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए? STF के जवान गैर आदीवासी नही हैं वे भी छत्तीसगंढ़ राज्य के निवासी है. इस घटना से ये भी अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि STF के आदिवासी जवान आदीवासी ग्रामीणों को ही मारे हैं. यह पुलिस प्रशासन की शाजिस भी हो सकती हैं,

 क्यों कि छत्तीसगंढ़ के मुख्यमंत्री रंमन सिह, बस्तर आई. जी. एस.आर.पी कल्लूरी, केन्द्र में ग्रह मंत्रालय भी चाहता हैं कि सलवा जूडूम भाग 2 की शुरूआत हो.12/9/15 की घटना से यह लगता हैं कि पुलिस प्रशासन ने STF के जवानों को खुद पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को मारने के लिए भेजा था.क्या भारत सरकार से न्याय मागने के लिए आदिवासीयों को हथियार का सहारा लेना पढ़ेगा ? भारत देश दुनिया में यह बताता हैं कि इस देश में लोकतंत्र हैं . देश के महान बुद्धीजिवी वर्ग हमें बताये की छत्तीसगंढ़ राज्य भारत से अलग हैं या इसी देश का हिस्सा हैं. STF,CRPF, बस्तर संभाग कि पुलिस प्रशासन लोकतंत्र और कानून को नहीं मानेगे तो बस्तर में लोकतंत्र कैसे कायम होगा. देश में लोकतंत्र के रंचक कहां हैं? न्याय रक्षक  कहां हैं? सविधान रक्षक  कहां हैं?

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