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इन बाबाओ़ को प्रवचन पंडाल तक रखिये

इन बाबाओ़  को प्रवचन पंडाल तक रखिये ,इन्हें विधानसभाओं या लोकसभा से दूर रखिये .
***
अजीब है हमारा देश
चर्चा इसपर नहीं हो रही कि एक धार्मिक संत विधानसभा में प्रवचन कैसे दे सकता है .
नंगा शब्द बुरा लगता होगा ,इसका पर्यावाची शब्द जरूर होंगे है लेकिन मतलब उन सबके एक ही है ,
और उन्होंने कहा भी क्या ?
धर्म पति और राजनीति पत्नी होना चाहिए ,और हां पत्नी पर पति का नियंत्रण होना चाहिए.
अब उनके इसी वक्तव्य का विश्लेषण कर लेते है,तकनीकी रूप से.
बहुधर्मी देश में निश्चित ही पति की भूमिका में सिर्फ जैन धर्म तो होगा नही.
तो राजनीति किस धर्म को अपना पति माने .
इस्लाम के कानून से देश चलना चाहिए ?
हिन्दू धर्म या सिखी ,ईसाई या भगवान बुध्द की शिक्षायें  उनका मार्ग दिखाये या फिर पांचों पति कि भूमिका अदा करेंगे.
आप हंस रहे है
ये बाबा लोग एसे ही उलजलूल बिना सोचे समझे कुछ भी बोलते रहते है .
इनसे कोई  पूछने से रहा कि यदि धर्म का नियंत्रण हो गया संविधान बेचारा कहां जायेगा.
यह बताने की जरूरत नहीं है कि  सभी धर्म समान नहीं होते  ,यदि एसा होता तो सनातन धर्म के  पैरलल भगवान महावीर जैन धर्म नही चलाते और न बौध्द ,न इस्लाम आता और न ईसाईयत .
थोडी देर को मानलेते है कि राजनीति का नियंत्रण इस्लाम का हो जाये और यह देश इस्लामिक घोषित हो जाये,
वो सभी धर्म के डंडे झंडे समेटने को कह दे तो ?
यदि हिन्दू राष्ट्र  बन जायें , सारे जैनियों और बौधिस्टों  की घर वापसी शुरु कर दे तो ?
उन्होंने आज यह भी कहा कि एक हजार साल बाद धर्म सड जाता है ,
अब
हिन्दू ,इस्लाम, ईसाइयत ,बौध्द हो या जैनी  सब सडे हुये धर्म हुये ,तो अब राजनीति किसे अपना पति माने .
इन सडे हुये धर्म को ?
बहस तो यही होना थी कि इन बाबाओ़  को प्रवचन पंडाल तक रखिये ,इन्हें विधानसभाओं या लोकसभा से दूर रखिये .
यह बडा अनर्थ   कर देंगे.

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