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बस्तर का सच – निर्दोष आदिवासी बने पुलिस के लिए सॉफ्ट टार्गेट — आमआदमी पार्टी

बस्तर का सच – निर्दोष आदिवासी बने पुलिस के लिए सॉफ्ट टार्गेट
आमआदमी पार्टी 
प्रेस विज्ञप्ति 
आम आदमी पार्टी बस्तर का सच जनता के सामने लाने के लिए कृतसंकल्प है। छ्त्तीसगढ़ की रमन सरकार के तमाम दावों के विपरीत बस्तर में शांति बहाल नहीं हुई है, उल्टे निर्दोष आदिवासी की समस्याएं बढ़ी हैं। आदिवासी एक ओर जहाँ नक्सलियों द्वारा सताया गया है, तो दूसरी ओर पुलिस और सुरक्षा बल भी उसे सॉफ्ट टार्गेट की तरह उपयोग में ला रहे हैं। जब जब सरकार जनता को संदेश देना चाहती है की बस्तर में सरकार का नियंत्रण है, तब तब किसी निर्दोष आदिवासी को या तो जेल भेजा जाता है, या उसे गोली मारकर नक्सली घोषित कर दिया जाता है। आज की पत्रकार वार्ता में “आप” नेत्री सोनी सोढ़ी के साथ में आयता, रवि और हिडमे अपनी बात रखने के लिए बस्तर से आए हैं।
आयता को आम आदमी पार्टी पहले ही मीडिया के सामने प्रस्तुत कर चुकी है, और पुलिस महानिदेशक (छ्ग) को ज्ञापन दे चुकी है। सुकमा के रहने वाले आयता पारा कल्लूरी का दबाव था की आयता नक्सली बनाकर सरेंडर करे। आयता ने जब बस्तर आई जी कल्लूरी के दबाव के आगे झुकने से मना कर दिया, तो पुलिस ने उसकी पत्नी का अपहरण करा लिया। आदिवासियों ने थाने का घेराव करा उसकी पत्नी को छुड़ाया। फिर पुलिस ने आयता को गिरफ्तार कर नक्सली होने के 5 फर्जी केस बना दिये, और आयता को जेल में ठूंस दिया। आज आयता को सभी मामलों में जमानत मिल गई है, और आयता फिर से आदिवासी हितों की लड़ाई लड़ने को आजाद है। ऐसे हजारों आयता छ्त्तीसगढ़ की जेलों में बंद हैं, और न्याय की राह देख रहे हैं।
गीदम की रहने वाली कवासी हिडमे को पुलिस ने उठाकर बलात्कार किया और फिर जेल में डाल दिया। कुछ महीने पहले अदालत ने उसे बाइज्जत रिहा कर दिया। हिडमे जेल में 6 वर्षों से अधिक का समय बिना अपराध बिता चुकी है। जब अनुसूचित आयोग ने पुलिस से इस मामले में पूछताछ करने पर पुलिस ने इस पूरे मामले को झूठला दिया, और कहा की कवासी हिडमे को गलत तरीके से पुलिस अभिरक्षा में रखना और प्रताड़ित करने का आरोप गलत पाया गया है। क्या हिडमे को कभी न्याय मिल पाएगा। क्या लगभग 7 वर्षों तक बिना अपराध जेल में रहने की तकलीफ से हिडमे कभी मुक्त हो पाएगी।
कुछ रोज पहले द्ंतेवाड़ा के पास नीलामया गाँव मेँ पुलिस की गोली से 55 वर्षीय आदिवासी भीमा माड़वी की मौत हो गई थी। भीमा का बेटा रवि हमारे बीच आज उपस्थित है। बाद मेँ पुलिस ने भीमा को नक्सली भी घोषित कर दिया | बस्तर पुलिस की अभी तक यही कार्यप्रणाली रही है। इस घटना का विरोध करने के लिए जब 19 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी ने दांतेवाड़ा में रैली निकाली तो पुलिस प्रशासन ने उसे सुनियोजित तरीके से रोक दिया।
आम आदमी पार्टी की सोनी सोढ़ी ने रविवार को बस्तर के बासागूड़ा थाना क्षेत्र की महिलाओं से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात से राज्य स्थापना दिवस के दिन बस्तर का काला सच निकालकर सामने आया है। सुरक्षा बालों द्वारा आदिवासी महिलाओं से किए गए दुर्वव्यवहार किसी की आत्मा को कंपा देने के लिए काफी है।
इस क्षेत्र की 3 महिलाओं से बलात्कार की बात सामने आई है, जिसमें एक महिला की मृत्यु भी हो चुके है। बलात्कार की शिकार महिलाओं में एक नाबालिग भी है। लगभग 40 महिलाओं को अर्धनिर्वस्त्र स्थिति में बेज्जत किया गया है। इस मामले की शिकायत बीजापुर कलेक्टर से की जा चुकी है। इस घटना से यह तो साबित होता ही है कि सरकार का बस्तर से नक्सलवाद समाप्त करने का दावा तो खोखला साबित हो रहा ही है, आदिवासी का जीवन और भी नारकीय होता जा रहा है।
आज की पत्रकार वार्ता का उद्देश्य बस्तर के सच को मीडिया के माध्यम से जनता के सामने लाना है। साथ ही आम आदमी पार्टी बस्तर में एक बड़े आंदोलन की घोषणा भी करती है। अभी तक राजनीतिक दलों ने बस्तर पर राजनीति तो की है, लेकिन आदिवासियों के हितों को अनदेखा किया है। आम आदमी पार्टी बस्तर के आदिवासी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ेगी और जीतेगी भी।
संकेत ठाकुर सोनी सोढ़ी नागेश बंछोर उमा प्रकाश ओझा
सायोजक बस्तर संयोजक सचिव सह संयोजक
उचित शर्मा नम्रता यदु सूरज उपाध्याय
आर टी आई प्रभारी राजी समिति सदस्य राजी समिति सदस्य
राज्य समिति, आम आदमी पार्टी, छ्त्तीसगढ़
सलग्न – (1) कवासी हिडमे से संबन्धित दस्तावेज़

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