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पूर्व सरपंच और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सदस्य पोडियाम पंडा की पुलिस द्वारा गैरकानूनी पकड़ ,प्रताडना और तथा कथित आत्मसमर्पण की पूरी कहानी

** पूर्व सरपंच और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सदस्य पोडियाम पंडा की पुलिस द्वारा गैरकानूनी पकड़ ,प्रताडना और तथा कथित आत्मसमर्पण .
* पडा की पत्नी और भाई और परिजन पहुचे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट.
* हाईकोर्ट के नोटिस के बाद मची पुलिस में
खलबली ,पडा के भाई कोमल और परिजनो पर तरह तरह का दबाव मारपीट और धमकाने का दौर .
* और हाईकोर्ट में याचिका के जबाब में पुलिस ने कहा की पोडियाम   पंडा ने किया सरेंडर .
** प्रताडना ,गिरफ्तारी और तथाकथित आत्मसमर्पण  की पूरी कहानी .
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पोडियाम  पंडा सुकमा  के बेहद लोकप्रिय और जाने पहचाने व्यक्ति है, वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लिए भी काम करते है.कई साल तक वे सरपंच रहे ,आजक ऊनकी पत्नी पोडियाम मुइये सरपंच है. वे पुलिस और प्रशासन को सहयोग देते रहे है.इनके सम्बन्ध पूर्व ग्रहमंत्री ननकी राम कवंर से भी रहे है.

सीआरपीएफ के केम्प निर्माण ,स्कुल निर्माण ,पीडीएस राशन दुकान ,स्वास्थ्य सेवा से लेकर कलेक्टर एलेक्स मेनन के अपहण के समय भी इनकी सहायता से ही उन्हें  छुड़ाया गया था  ,सिपाहियों के अपहरण के समय भी इनकी सहायता ली इई थी. इससे यह भी तय है कि  यह हर तरफ स्वीकार्य नेता रहे है,

अभी 3 मई को पडा मछली मारने मिनपा और चिंतागुफा  गये थे ,वही इन्हे सुरक्षाबलों ने पकड लिया .
उनकी पत्नी पोडियाम मुइये  ने बताया की पंडा  को वहीँ पर बुरी तरह पिटाई की ,इतना की वो चल नहीं पा रहे थे .उन्हें  हेलीकॉप्टर से कही ले गये.

दुसरे दिन स्थानीय अखबार में छपा की एक बड़े नक्सली लीडर को गिरफ्तार किया गया,उस पर 113 केस दर्ज है. उसी समाचार में डीआइजी  सुन्दराजन ने या कहा की उसे अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है .
पंडा की पत्नि और दुसरे लोग मालुम करते रहे की उन्हें कहाँ ले जाया गया है ,कही पता नहीं पडा.

परिजन सुकमा थाना और चिंतागुफा थाना बार बार गये तो उन्हें बताया की वे हमारे पास नही है ,हम उन्हें नही लाये है..

वर्तमान सरपंच और पंडा  की पत्नी  पोडियाम मुईये को  किसी ने कहा कि वह सुकमा थाने  में है उनके  कपड़े लेकर चले जाओ .दस मई को इनका परिवार कपड़े लेकर सुकमा थाने गया की उनसे मिलवा दीजिये . थाने में कहा गया की वो यहाँ नही है ,लेकिन उसके कपडे हमे देदो .यह लोग कपड़े देकर वापस घर आ गये  .

इसका मतलब यही हुआ की वो उस समय वहीँ थे .
सामान्य कानून तो यही है की किसी को भी गिरफ्तार किया जायें तो उसकी सुचना उनके परिवार को दी जाये .

पोडियाम पंडा की पत्नी मुइये  ,भाई कोमल ,बच्चे और परिजन बिलासपुर हाईकोर्ट पहुचे बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाने ,उन्होंने याचिका लगाई जगदलपुर लीगल एड ग्रुप के माध्यम से  12 मई को .
पुलिस को नोटिस हुआ ,की 15 मई तक अपनी स्थित स्पष्ट करे .

बस उसके बाद सुकमा पुलिस में हडबडाहट फैल गई ,12 मई की रात को ही पंडा का भाई कोमल बिलासपुर से सुकमा गया था,13 को पहुचते ही उसे पुलिस ने पकड़ लिया , पंडा के बड़े भाई को भी पकड़ा गया और उन्हें पोडियाम पंडा के पास एसपी आफिस ले जाया गया.

अब  तीनो पर दबाब डाला गया कि कैसे भी पंडा की पत्नी को कहो कि केस वापस ले लिया जाये , पंडा के भाई किशोर के फोन घर से पुलिस लेके आई ,और उससे फोन करवाया उनके वकिल को “की  भाभी से बात करवाओ,जब बात की तो कहा कि केस बापस लेलो ,भाई ने सरेंडर कर दिया है,तुरंत वपस घर आ जाओ  .थोडी देर बाद उसी फोन से पंडा ने बात की उसने भी यही कहा की दीदी मेने सरेंडर कर दिया है 9 मई को ,मेरी पत्नि को वापस सुकमा भेज दो. वकील ने कहा भी की तुम यही बात यहाँ आ कर कह दो ,वो मेरे क्लाईंट है ,वो जैसा कहेगी में वही करूंगी ,वो मेरे पास नहीं है ,काम के बाद वापस चले गये है .दोनों फोन एसपी  सुकमा के कार्यालय से किये गये और उन्हें  डिक्टेट  किया गया .उसके बाद दो बार और फोन आये . शाम  15 को किशोर ने आकर बताया की उसने और पंडा ने पुलिस के सामने उनके बताये हुए बात को ही कहा था उन दोनों ने . शाम को किशोर को पुलिस ने छोड दिया ,उन्हें आशंका थी की किशोर को छुड़ाने के लिए भी याचिका हो सकती है .

तो 15 मई को हाईकोर्ट में आशानुसार यही बताया की पोडियाम पंडा ने आत्मसमर्पण कर दिया है और हम आत्मसमर्पण नीति के अनुसार व्यवस्था करेंगे .

आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  मनीश कुंजाम ने भी बयान देकर कहा की पंडा का नक्सलियों से कोई लेना देना नहीं है .
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तो पूरी कहानी यही है कि पंडा को मछली मारते हुये पुलिस ने पकडा ,मारा पीटा ,दस दिन तक उनके परिवार को  नही बताया जब परिवार हाईकोर्ट पहुचा तो उसे दबाब डाल कर आत्मसमर्पण करवा के हमेशा के लिये  नक्सली बना दिया .
कारण ?
सिर्फ इतना की वो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के  प्रभावशाली नेता और आदिवासियों में बेहद लोकप्रिय था. उसे इसकी कीमत भुगतना पडी .
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