अभिव्यक्ति आदिवासी महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

छत्तीसगढ़, आदिवासी और सुरक्षाबलों द्वारा महिलाओ का बलात्कार। मिडिया समेत सभी नारीवादियों की चुप्पी

छत्तीसगढ़, आदिवासी और सुरक्षाबलों द्वारा महिलाओ का बलात्कार। मिडिया समेत सभी नारीवादियों की चुप्पी

पुलिस ने बस्तर में किया 16 आदिवासी महिलाओं से बलात्कार, राज्य सरकार को नोटिस
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यह एक ऐसी कड़वी हकीकत है जिसपर यकीन कर पाना मुश्किल है। मुश्किल है यह सोचना भी कि आज इक्कीसवी सदी में भारत जैसे देश में सुरक्षा बल अपने ही लोगो का बलात्कार कर रहे है। लेकिन चूंकि कुछ बाते मिडिया में नहीं आती तो इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा हो नहीं सकता।  छत्तीसगढ़ में पिछले 18 सालो से आश्रम बना कर अपने परिवार समेत रह रहे हिमांशु कुमार समय समय पर आदिवासियो के लिए आवाज़ उठाते रहे, तब तक जब तक उनका आश्रम तुड़वा नहीं दिया गया और उनको छत्तीसगढ़ से बाहर नहीं करवा दिया गया। 

हिमांशु कुमार फेसबुक पर अपने अनुभवो और आदिवासियो के लिए सरकारी तंत्र से लड़ाई की एक एक ताज़ी खबर अपने पाठको को बताते रहते है। उन्ही के करकमलो का असर है कि अब मिडिया और मानवाधिकार संगठनो का ध्यान बस्तर , छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित हुआ है।  कुछ दिनों पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बस्तर में पुलिस कर्मियों द्वारा 16 बलात्कार की पुष्टि भी की है जिसके लिए राज्य सरकार को नोटिस भी भेजा गया है  

भास्कर अखबार में प्रकाशित एक लेख में गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने बताया कि दो सालों में बलात्कार की कुल 294 घटनाएं हुईं और 257 प्रकरणों की विवेचना पूरी हो गई है। मंत्री का कहना था कि बस्तर में आए सामाजिक परिवर्तन के कारण ये घटनाएं हुईं। ये मानवीय विकृति है, इन घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ऐसी ही एक वारदात का ज़िक्र करते हुए हिमांशु कुमार ने लिखा :

“भीमा को पकड़ कर एक पेड़ से बांध दिया गया,
सिपाही सुखमति के साथ छेड़खानी करने लगे,
दो सिपाहियों ने सुखमति के कपड़े फाड़ दिए,
सिपाहियों ने सुखमति को रौदना शुरु किया,
सुखमती संख्या भी भूल गई कि उसे कितने सिपाहियों ने रौंदा,
जी भर जाने के बाद सुखमती और भीमा को थाने ले जाया गया,
सिपाहियों ने कहा अब इनका क्या करें ?
छोडेंगे तो यह बाहर जाकर सब कुछ बता देंगे……… “




आदिवासियो के अधिकारों के लिए लड़ रहे हिमांशु कुमार ने अभी ताज़ा अपडेट देते हुए लिखा

“सुरक्षा बलों द्वारा सामूहिक बलात्कार की शिकार 28 आदिवासी महिलाओं की याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्वीकार कर ली है ၊
कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर दिया है,
मानवाधिकारों के लिये काम करने वाले संगठन ह्यूमन राइट्स ला नेटवर्क के वकील किशोर नारायण ने महिलाओं की तरफ से याचिका दायर करी है…….. “



अपने इस आर्टिकल के माध्यम से मैं सभी देशवासियो का ध्यान इस लड़ाई की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा और आपसे विनती करूँगा कि सोशल मिडिया पर हिमांशु कुमार का साथ दीजिये।  साथ ही मैं आपको यह भी बता देना चाहता हूँ कि सब उस राज्य की कहानी है जिसके गुर्गे हर तीसरे दिन “हिन्दू भाई- हिन्दू बहन” करते करते देश में नफरत का माहौल बनाते है।

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