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BJP विज्ञापन: किसान की आय दुगनी कर देंगे, असलियत: समर्थन मूल्य बढ़ाने से व्यापारियों को होगा नुकसान

कुछ समय पहले प्रधानमन्त्री एक लाईव वीडियो कांफ्रेंसिंग कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के किसानो से बात कर रहे थे. एक महिला किसान ने कहा कि उसकी आय अब दुगनी हो गई है. पत्रकार पुण्यप्रसून बाजपेई ने अपने प्राइम टाईम शो “मास्टर स्ट्रोक” में इस बात की पड़ताल की. प्रधानमन्त्री के कार्यक्रम में आय दुगनी हो जाने की बात कहने वाली उस महिला ने न्यूज़ चैनल के कैमरे में बताया कि दिल्ली से साहब आए थे और उन्होंने ही ये आय दुगनी वाली बात कहने को कहा था.

इस कार्यक्रम में नायक की आँखे इसे एक स्क्रिप्टेड धारावाहिक बना दे रही थीं.

कुछ साल पहले अखबारों में विज्ञापन का एक नया पैटर्न आया. देखने में वो विज्ञापन अखबार की दूसरी ख़बरों की तरह दिखता है. पर सिर्फ दीखता है, होता उसमें समाचार नहीं विज्ञापन ही है. इसी पैटर्न के विज्ञापन टीवी चैनलों में भी आने लगे. “पहले मैं बहुत मोटा था” ऐसे वाले विज्ञापन  

अब यही पैटर्न सरकार ने भी अपना लिया है. पर जिस तरह फेयरनेस क्रीम से कभी कोई गोरा नहीं हुआ वैसे ही विज्ञापन से कोई सरकार कभी किसान हितैषी नहीं हुई. सरकार की नीतियों से ही इस बात का आंकलन हो सकता है.

इसका ताज़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ में देखने को मिला है. भूपेश सरकार ने धान खरीदी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2500 प्रति क्विंटल करने की घोषणा की थी. लेकिन इसके लिए केन्द्र की मंज़ूरी चाहिए होती है. किसान हितैषी होने की बात चोंगा लगाकर कहने वाली केंद्र सरकार को तो छत्तीसगढ़ राज्य की ये पेशकश ख़ुशी ख़ुशी मानकर उसे बधाई देनी चाहिए थी. पर ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि ये विज्ञापन थोड़ी न है, किसान हितैषी सिर्फ़ विज्ञापन में दिखना भर होता है, असल नीतियों में होना नहीं होता.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देश के प्रधानमन्त्री को लगभग 4 ख़त लिख चुके हैं. पत्र में उन्होंने समर्थन मूल्य 2500 कर देने का आग्रह भी किया और प्रधानमन्त्री जी से मिलने का समय भी माँगा ताकि वे विस्तार से इस विषय को प्रधानमन्त्री के सामने रख पाएं.

जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि वो छत्तीसगढ़ राज्य को ये राहत नहीं दे सकती. क्योंकि इससे किसान प्रोत्साहित होगा और पहले से अधिक चावल उगाएगा जिससे बाज़ार में चावल के दाम कम हो जाएंगे और व्यापारियों को इससे नुकसान होगा.

इस मामले में भाजपा का दोहरा चरित्र देखने को मिल रहा है. एक तरफ़ केंद्र की भाजपा सरकार धान का समर्थन मूल्य 2500 न कर सकने की दुहाई दे रही है और दूसरी तरफ़ छत्तीसगढ़ में भाजपा के नेता ये कहते घूम रहे हैं कि भूपेश सरकार समर्थन मूल्य बढाने का अपना वादा नहीं निभा रही है.  

इसी विषय पर cgbasket के लिए किसान नेता आनंद मिश्रा से चर्चा की है सामजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप ने.

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