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बिलासपुर : रिश्वत मांगता है महिला बाल विकास विभाग, HIV संक्रमित बालिकाओं के लिए काम करने वाली एक मात्र संस्था को बंद करवाने की हो रही साज़िश

NGO को मिलने वाले अनुदान का 30% महिला बाल विकास के अधिकारियों को रिश्वत स्वरूप देना पड़ता है. खुल के रिश्वत मांगते हैं अधिकारी.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में HIV पॉजिटिव बालिकाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करने वाली एकमात्र संस्था को प्रदेश का महिला एवम् बाल विकास विभाग(Department of Women and Child Development) बन्द करवाने पर तुला हुआ है.

डेडीकेटेड रूप से HIV के संक्रमण से जूझ रही बालिकाओं के लिए काम करने वाली ये छत्तीसगढ़ की एकमात्र संस्था है. वैसे तो छत्तीसगढ़ सरकार को ही आगे आकर ऐसी संस्थाओं को प्रोत्साहन देना चाहिए था, साथ में ऐसी और भी संस्थाएं बनें इस पर भी सरकार को प्रयास करने चाहिए थे. लेकिन छत्तीसगढ़ का महिला एवम् बाल विकास विभाग इसके उलट जो एकमात्र संस्था चल रही है उसे भी बन्द करवाने पर तुला हुआ है.

ये बात मानने में थोड़ी अजीब सी लगती है कि आखिर महिला एवम् बाल विकास विभाग ऐसा कर क्यों रहा है. दरअसल अच्छी नीयत से काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को एक शब्द बहुत तकलीफ़ देता है वो है “रिश्वत”

विभाग के लालच की पूरी कहानी

महिला एवम् बाल विकास विभाग द्वारा किसी संस्था के किए जा रहे कार्य को मान्यता प्रदान करने की एक कानूनी प्रक्रिया है. जब कोई संस्था किसी कार्य के सारे मानकों पर खरी उतरती है तभी उसे उस कार्य को करते रहने का लाइसेन्स दिया जाता है.

HIV पॉजिटिव बालिकाओं के लिए काम करने वाली छत्तीसगढ़ की एकलौती संस्था अक्टूबर 2010 से संचालित है. 2017 में इन्हें अस्थाई लाइसेंस और 2018 में स्थाई लाइसेंस सरकार की तरफ़ से प्रदान किया जा चुका है. संस्था के संचालक संजीव ठक्कर ने बताया कि संस्था के नियमितीकरण के लिए उन्होंने 2013 में आवेदन किया था इसके बाद कई बार विभाग ने इनकी पूरी जाँच की और फिर इन्हें लाइसेन्स दिया.

ये संस्था अब तक बगैर किसी सरकारी सहायता के, लोगों के आपसी सहयोग से संचालित हो रही है.

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मार्च 2018 में संस्था ने पहली बार महिला बाल विकास विभाग में आवेदन प्रस्तुत कर अनुदान मांगा.


विभाग के लालच की असल कहानी इस आवेदन के बाद से शुरू होती है.

इस आवेदन के बाद विभाग ने फिर से इस संस्था का इंस्पेक्शन करना शुरू किया. इंस्पेक्शन में सबकुछ सही मिलने के बाद अनुदान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अब आपको अनुदान मिलने वाला है लेकिन अनुदान की कुल राशि का 30% रूपया आपको हमें देना होगा (20% बिलासपुर के लिए और 10% रायपुर के लिए) तब ही आपको अनुदान मिल पाएगा वर्ना नहीं.

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगे जाने की इस घटना की लिखित शिकायत संस्था द्वारा दर्ज कारकाई गई है. लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने की जगह उलटे अब संस्था को ही बन्द करवा देने की साज़िश की जा रही है.

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संस्था के संचालकों का आरोप है कि चूंकि हमने विभाग को रिश्वत नहीं दी इसलिए विभाग हमें तरह-तरह से परेशान कर रहा है और द्वेष में आकर हमारा लाइसेन्स निरस्त करना चाहता है. जबकि हमारी संस्था पूर्ण समर्पण के साथ HIV पॉजिटिव बच्चियों के सर्वोत्तम लाभ के लिए काम कर रही है. उन्होंने बताया जिला बाल संरक्षण अधिकारी(DCPO) पार्वती वर्मा ने उनसे रिश्वत की डिमाण्ड की थी.

विभाग ने कहा ओवन होना चाहिए माइक्रोवेव नहीं चलेगा

6 दिसंबर 2018 को बिलासपुर के डिप्टी कलेक्टर और रायपुर की डायरेक्टर मैडम की मौजूदगी में संस्था भवन का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण की रिपोर्ट में लाइसेन्स निरस्त करने के कारण में बताया गया कि भवन में ओवन नहीं हैं. इसके जवाब में संस्था ने विभाग को पत्र लिखकर बताया भी कि हमारे पास ओवन नहीं माइक्रोवेव है. खाना बनाने या गर्म करने के लिए माइक्रोवेव की ज़रुरत होती है ओवन की नहीं. संस्था के लोगों ने कहा कि ऐसे ऊलजुलूल कारण बताकर DCPO पार्वती वर्मा जानबूझकर हमें परेशान कर रही हैं क्योंकि हमने उन्हें रिश्वत नहीं दी.

संस्था की तरफ से कहा गया था कि फिर भी यदि विभाग किसी चीज़ का होना आवश्यक समझता है तो तुरंत वो चीज़ बच्चियों के लिए मुहैया करवा दी जाएगी जिसका विभाग पुनः निरीक्षण कर सकता है. लेकिन संस्था के इस पत्र का विभाग ने कोई जवाब ही नहीं दिया.

8 बच्चियों पर 14 टॉयलेट थे पर विभाग ने कहा टॉयलेट नहीं हैं

संस्था के संचालक ने बताया कि दिसंबर 2018 में जब विभाग ने निरीक्षण किया तब संस्था में केवल 8 ही बच्चियां थीं और 8 बच्चियों के लिए भवन में 14 टॉयलेट मौजूद थे. फिर भी विभाग के अधिकारियों ने रिपोर्ट में ये लिखा कि बच्चियों के लिए पर्याप्त टॉयलेट नहीं हैं.

विभाग ने CWC को अधूरी जानकारी मुहैया कराई है ?

विभाग ने CWC के समक्ष संस्था द्वारा संचालित भवन के निरीक्षण की जो रिपोर्ट प्रस्तुत की उसमे कहा गया कि संस्था बच्चियों को बेसिक सुविधाएं नहीं दे पा रही है जैसे बाल्टी, मग्गा, फ़्रिज, टॉयलेट इसलिए उसका लाइसेन्स निरस्त किया जाए. जबकि संस्था ने पत्र लिखकर बताया भी कि ये सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं जिनका निरीक्षण कभी भी किया जा सकता है. लेकिन विभाग ने संस्था द्वारा लिखे गए पत्रों और तथ्यों का ऊल्लेख CWC के समक्ष किया ही नहीं. अधूरी जानकारी देकर विभाग ने CWC को गुमराह किया है.

कलेक्टर से बड़े हैं जिला कार्यक्रम अधिकारी ?

CWC ने अनुशंसा करते हुए बिलासपुर कलेक्टर को निर्देश दिया था कि वे इसकी जाँच करें और लाइसेन्स निरस्त करने या न करने सम्बन्धी निर्णय लें. 16 मार्च 2020 को कलेक्टर ने मामले को सुना परन्तु कोई निर्णय नहीं दिया, मामले को आगामी तारीख में फिर सुनने की बात कही. मार्च महीने में ही लॉक डाउन लग गया जिसके कारण सुनवाई टल गई.

इसका मतलब कि मामला अब भी कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है. और जब मामला कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है तो जिला कार्यक्रम अधिकारी उसमें कोई आदेश कैसे सूना सकते हैं. क्या छत्तीसगढ़ में महिला बाल विकास विभाग का जिला कार्यक्रम अधिकारी कलेक्टर से बड़ा होता है? क्या छत्तीसगढ़ में विभागीय प्रोटोकॉल ख़त्म हो गया है?

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ज़िला कार्यक्रम अधिकारी भ्रम फैला रहे हैं ?

जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में लिखा गया है कि “जिला स्तरीय निरीक्षण समिति की अनुसहंसा के आधार पर बाल कल्याण समिति के द्वारा संस्था का पंजीयन निरस्त करते हुए संस्था का संचालन बन्द किया गया है” इस पर संस्था का कहना है कि cwc नेकलेक्टर को इस सम्बन्ध में निर्णय लेने को कहा है.

संस्था के सचालकों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के आधिकारी पार्वती वर्मा और सुरेश सिंह जानबूझकर ये सब कर रहे हैं.

  • उन्होंने कहा कि यदि लाइसेन्स निरस्त करने का कोई आदेश दिया भी गया है तो उसकी सुनवाई में संस्था को क्यों नहीं बुलाया गया ?
  • उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया ?
  • चोरी छिपे गुपचुप तरीके से सुनवाई कैसे कर ली गई ?
  • या बगैर किसी सुनवाई के ही ज़िला कार्यक्रम अधिकारी भ्रम फैला रहे हैं ?
  • DCPO पार्वती वर्मा पर रिश्वत मांगने के जो गंभीर आरोप लगे हैं उसपर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है ?
  • क्या महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों का बोलबाला है ?
  • गढ़बो नावा छत्तीसगढ़ का वादा क्या ऐसे ही पूरा होगा ?
  • HIV पॉजिटिव बच्चियों का हक़ मारने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर मुख्यमंत्री महोदय अब तक नकेल क्यों नहीं कास पाए हैं ?

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा HIV पॉजिटिव बच्चियों के लिए काम करने वाली छत्तीसगढ़ की एकमात्र संस्था का लाइसेन्स निरस्त करने के जो भी कारण बताए गए हैं उनकी छानबीन करने से ये साफ़ इशारा मिलता है कि ये सब रिश्वत न मिलने की चिढ़ में किया जा रहा है.

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