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नया प्लांट लगाने की तैयारी में बाल्को : पहले ही दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित इलाकों में एक है कोरबा, पूरे प्रदेश में बढ़ेगा प्रदूषण

बाल्को विस्तार परियोजना पर पर्यावरण जन सुनवाई स्थगित करने की मांग की माकपा ने, दी तीखे विरोध की चेतावनी

कोरबा। एक रिसर्च के मुताबकि छत्तीसगढ़ का कोरबा ज़िला दुनिया के 20 सबसे ज़्यादा प्रदूषण करने वाले शहरों में से एक है। इसी कोरबा शहर में बाल्को औद्योगिक संयंत्र भी स्थापित है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बाल्को से निकलने वाला भारी मात्रा का प्रदूषण कोरबा समेत पूरे छत्तीसगढ़ की जलवायु को ख़राब कर रहा है। बाल्को पर पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करने के आरोप भी लगते हैं।

जानकारी के मुताबिक अब बाल्को संयंत्र अपने कार्य के क्षेत्र का विस्तार कर रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बाल्को संयंत्र का विस्तार कर एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता बढ़ाने की परियोजना के लिए हो रही पर्यावरण जन सुनवाई को स्थगित करने की मांग की है। माकपा ने आरोप लगाया है कि यह जन सुनवाई वास्तविक तथ्यों को छुपाकर, गलत आंकड़े पेश कर तथा आम जनता की जानकारी के बिना आयोजित की जा रही है, ताकि पर्यावरणीय स्वीकृति आसानी से हासिल की जा सके।

देश का तीसरा सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र है कोरबा

जारी एक बयान में माकपा के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार कोरबा का औद्योगिक क्षेत्र देश का तीसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र है। यहां का प्रदूषण सूचकांक 69.11 दर्ज किया गया है, जिसके कारण यहां की आबादी का 12% हिस्सा अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और त्वचा रोग जैसी बीमारियों से जूझ रहा है। कोरबा के पर्यावरण और स्वास्थ्य की इस तबाही में बाल्को अपनी जिम्मेदारी से इंकार नहीं कर सकता, जिसने आज तक पर्यावरण विभाग द्वारा जारी किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया है। झा ने कहा है कि पहले बाल्को इन नोटिसों का जवाब दें, पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे, फिर परियोजना विस्तार के लिए जन स्वीकृति हासिल करे।

रोज़गार के झूठे आकंड़े पेश कर रहा है बाल्को ?

माकपा नेता ने कहा है कि इस परियोजना विस्तार के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने के लिए बाल्को प्रबंधन रोजगार मिलने के झूठे आंकड़े पेश कर रहा है। सच्चाई तो यह है कि एक ओर अपने ही प्लांट बीसीपीपी को वह चला नहीं पा रहा है और सैकड़ों मजदूरों को काम से निकाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना विस्तार के जरिये जो रोजगार देने का दावा किया जा रहा है, उसकी प्रकृति अस्थायी और ठेका श्रेणी की ही होगी। वर्तमान प्लांट में लगभग 300 नियमित कर्मचारी और 2200 ठेका मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि विस्तारित परियोजना में केवल 1050 मजदूरों को ही रोजगार मिलेगा। माकपा ने पूछा है कि यह रोजगार का संकुचन है या सृजन?

एक लाख टन प्रदूषित राखड़ का निपटारा कैसे किया जाएगा

उन्होंने कहा कि बाल्को प्रबंधन को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि विस्तारित परियोजना से जो एक लाख टन राखड़ निकलेगी, उसका निपटारा किस तरह किया जाएगा, क्योंकि वर्तमान प्लांट से जो राखड़ निकल रहा है, वह नदी-नालों और खेती-किसानी को भी तबाह कर रहा है और बाल्को प्रबंधन इसका समाधान करने में असफल रहा है। राखड़ निपटारे के मामले में बाल्को का रिकॉर्ड बहुत ही खराब है।

माकपा ने कहा है कि यदि पर्यावरण जन सुनवाई को स्थगित नहीं किया जाता, तो इस क्षेत्र की जनता का तीखा विरोध बाल्को प्रबंधन और जिला प्रशासन को झेलना पड़ेगा।

वेदांत का बढ़ेगा मुनाफा खेती और रोज़गार को होगा नुकसान

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने बाल्को परियोजना के विस्तार के लिए कल प्रस्तावित जन सुनवाई का विरोध करते हुए कहा है कि बाल्को की परियोजना से वेदांता कंपनी के मुनाफे तो बढ़ेंगे, लेकिन खेती-किसानी और रोजगार को नुकसान पहुंचेगा। किसान सभा ने फर्जी आंकड़ों और गलत तथ्यों के सहारे पर्यावरण स्वीकृति हासिल करने की बाल्को प्रबंधन की तिकड़मबाजी की भी निंदा की है।

सिंचाई के पानी में आएगी 6 MCM की कमी 7000 खेतिहर होंगे प्रभावित

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और कोरबा जिले के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर ने कहा है कि हसदेव बांगो परियोजना से किसानों को 2578 मिलियन घन मीटर पानी देकर 4.33 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई का वादा किया गया था, लेकिन पिछले दस सालों में औसतन 1.93 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए ही पानी दिया गया है। बाकी पानी को उद्योगों की ओर मोड़ दिया गया है। बाल्को के इस विस्तार परियोजना से सिंचाई के पानी में 6 एमसीएम की और कमी आएगी, जिससे 3500 एकड़ की खेती और इस पर निर्भर 7000 खेतिहर परिवार प्रभावित होंगे। किसान सभा नेताओं ने कहा कि इस भूमि पर 35 करोड़ रुपयों की उपज होती है, जबकि बाल्को के विस्तार परियोजना से केवल 1000 लोगों को अस्थाई किस्म का रोजगार मिलेगा, जिन्हें साल भर में मजदूरी में 10 करोड़ रुपयों से भी कम वितरित होगा। इस तरह से यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह है।

बाल्को का रिकॉर्ड खराब पर्यावरण जनसुवाई पर लगे रोक

किसान सभा ने कहा है कि इन परियोजना के कारण वायु-जल की गुणवत्ता और पर्यावरण-पारिस्थितिकी में बदलाव न आने का बाल्को प्रबंधन का दावा थोथा है। वास्तविकता यह है कि कोरबा जिले के खराब पर्यावरण और इसके कारण उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बाल्को अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता। निजीकरण के बाद पर्यावरण के नियमों और विभाग के दिशा-निर्देशों की इस कंपनी ने कभी परवाह नहीं की है, जिसके कारण कोरबा में प्रदूषण का मामला और गंभीर हुआ है। यह परियोजना प्रदूषण को और बढ़ाएगी ही।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि बाल्को के खराब रिकॉर्ड को देखते हुए पर्यावरण सुनवाई पर तुरंत रोक लगाए।

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