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9 अगस्त: नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले ग्राम पिछोडी में आदिवासी, किसान, मजदूर, कहार इत्यादि ने किया विरोध प्रदर्शन

9 अगस्त किसान मुक्ति दिवस व विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन में आज नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले ग्राम पिछोडी में आदिवासी, किसान, मजदूर, कहार इत्यादि महिला पुरूष एकत्रित हुए

इसमे मुकेश भगोरिया ने किसानों की संपूर्ण कर्जमुकित की बात उठाई.  उन्होंने मांग उठाई कि किसानों को फसल का सही दाम दिया जाए साथ कि नर्मदा घाटी के किसानों के साथ सरकार न्याय करे. सरदार सरोवर बांध से प्रभावित हुए 2019 में डूब 138.68 मीटर पानी भरने के बाद में विस्थापितों का कानूनी पुनर्वास आज भी पूरा नही हुआ है आज भी हजारो परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलना बाकी है.

राहुल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो तीन अध्यादेश लाए गए हैं उनको तत्काल वापस लिया जाए. केन्द्र सरकार किसान विरोधी काम कर रही है. कंपनियों को किसानों की जमीन कम दाम में लेकर देने का प्रयास चल रहा है इस पर तत्काल रोक लगाईं जाए.

‘किसान मुक्ति दिवस’ के रूप में देश के किसान और ‘राष्ट्रीय संघर्ष दिवस’ के रूप में श्रमिकों को अपने अधिकार, संविधान और जनतंत्र बचाने के लिए 9 अगस्त को अपनी मांगों के साथ हमें सड़कों पर उतरना पडा है.  

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आन्दोलनकारी किसानो और मजदूरों ने कहा कि केंद्र शासन से 5 जून 2020 के रोज जारी किये गये तीन अध्यादेश – अ) कृषि उत्पादन , व्यापार अध्यादेश ब) खेती विषयक समर्थन मूल्य और कृषि सेवा अनुबंध अध्यादेश तथा क) जीवनावश्यक वस्तू (संसोधन) अध्यादेश  – 2020 लॉकडाउन में लाएगए हैं जो किसान विरोधी हैं. इससे किसानों के उपज के दाम बढ़ेंगे नहीं, गिरेंगे, और बीज, खाद की सुरक्षा खत्म होगी तथा ग्राहकों को भी खाद्यान्न के लिए मंहगी कीमत चुकानी पड़ेगी. कृषि उपज बाजार समितियाँ याने मंडीयाँ भी कंपनियों के खुले व्यापार से चलने नहीं दी जाएगी.

किसानों मजदूरों की प्रमुख मांग

  • कर्जमुक्ति किसानों का अधिकार मानकर रब्बी की फसल के लिए 2019 – 20 में प्राप्त कर्जा माफ़ किया जाए तथा इस खरीफ मौसम की फसलों के लिए बिना ब्याज का कर्ज उपलब्ध किया जाए. बचत गट तथा अन्य संस्थाओं से प्राप्त कर्ज वसुली रोकी जाए.
  • खेती की हर उपज पर समर्थन मूल्य, जिनमें फल, सब्जियाँ, दूध आदि सभी कृषि उपज में शामिल हो और परिवारजनों की मेहनत के साथ समूची लागत के 1.5 गुना दाम हर उपज के लिए घोषित हों. शासन से किसानों को यह आश्वाशन चाहिए कि शासन स्वयं खेती उपज खरीदकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर की जाने वाली खरीदी को अपराध घोषित करे.
  • बिजली संशोधन विधेयक 2020 वापस लिया जाए और लॉकडाउन खत्म होने तक किसान, खेत मजदूर, छोटे व्यापारी आदि वंचितों के बिजली बिल माफ़ किए जाएं.
  • फरवरी से जून 2020 तक हुई अतिवृष्टि लॉकडाउन या किसी भी संकट से नुकसान की पूरी भरपाई का किसानों को भुगतान किया जाए.
  • आंतराष्ट्रीय बाजार में जबकि डीजल, पेट्रोल की कीमते 50% तक कम हुई है, तो भारत में बढ़ोतरी कैसे?  डीजल, पेट्रोल की कीमतें 50% से कम की जाएं.
  • मनरेगा अंतर्गत उपलब्ध रोजगार 200 दिनों तक बढ़ाया जाए. इस कार्य में न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करते हुए आज के संकटकाल में खेत मजदूर, छोटे किसान तथा प्रवासी मजदूरों को जीने का आधार व आजीविका की सुरक्षा प्रदान की जाए. मनरेगा का बजट कम करना हमें नामंजूर है.
  • हर परिवार को (करदाताओं को छोड़कर)  नगद राशि रु. 10,000 – लॉकडाउन की नुकसान की भरपाई मंजूर करे तथा हर महिना हर व्यक्ति को 15 किलो अनाज, 1 किलो दाल, 1 किलो शक्कर, राशन व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जाए.
  • आदिवासी एवम अन्य किसानों की खेत जमीन तथा वनसंपदा की रक्षा की जाए. कंपनियों के लिए भूअधिग्रहण नामंजूर  करते हुए, पीढ़ियों से काश्त की हुई किसानों की जमीन शासन से ध्वस्त न की जाए, यह सुनिश्चित हो. ‘कँपा’ क़ानून के तहत वन जमीन पर हो रहे जबरन पौधारोपण को रोक जाए.
  • विस्थापितों के संपूर्ण पुनर्वास ( वैकल्पिक उपज के साथ ) हुए बिना उन्हें, जल, जंगल, जमीन से विस्थापित करने वाली कोई परियोजना आगे न बढ़ाई जाए.
  • निष्पक्ष, विस्तृत पर्यावरणीय मूल्यांकन के बिना कोई बड़ी असरकारक परियोजना को मंजूरी न दी जाए. ‘पर्यावरणीय मूल्यांकन राजपत्र 2020’ पर्यावरणीय सुरक्षा क़ानून, 1986 का उल्लंघन है उसे वापस लिया जाए.

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आन्दोलन में शामिल मायाराम भिलाला, धनराज भिलाला, श्यामा मछुवारा, बच्चुराम भाई ने कहा कि हम भारत के किसान, मजदूर, मछुआरे, पशुपालक, एवम बुनियादी जरूरत पूर्ति के जीने वाले सभी मेहनतकश, भारत सरकार और हर राज्य सरकार को चेतावनी देते हैं कि इन मांगो पर त्वरित निर्णय नहीं लेने पर हम आंदोलन तेज करेंगे.

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